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राजस्थान: बदहाली का कगार पर स्वरोजगार देने वाला अनुजा निगम, आधे से ज्यादा पद खाली

स्वरोजगार मुहैया करवाने के उदेश्य से अनुजा निगम की स्थापना की गई थी

राजस्थान: बदहाली का कगार पर स्वरोजगार देने वाला अनुजा निगम, आधे से ज्यादा पद खाली
अनुजा निगम में कुल 253 पद स्वीकृत है

आशीष चौहान/जयपुर: राजस्थान में स्वरोजगार देने वाला अनुजा निगम अब खुद ही रोजगार की तलाश में है. अनुजा निगम के खुद में दफ्तर में बेरोजगारों को रोजगार नहीं दे पा रहा है. निगम में बरसों से कई पदों पर सीटे खाली पड़ी है. ऐसे में भला अनुजा निगम खुद कैसे स्वरोजगार के लिए योजनाएं चला सकता है. प्रदेश में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अंतगर्त आने वाला अनुजा निगम एससी, एसटी, दिव्यागों और सफाई कर्मचारियों के लिए स्वरोजगार के लिए अनेक योजनाऐं संचालित करता है. जिससे सबसे बड़ी योजना स्वरोजगार के लिए ऋण मुहैया करवाना. 

बता दें कि स्वरोजगार मुहैया करवाने के उदेश्य से अनुजा निगम की स्थापना की गई थी, लेकिन अनुजा निगम के अब तो खुद के ही लाले पडे है. जिला स्तर पर आरएएस से लेकर मुख्यालय स्तर तक बढी संख्या में पोस्टिंग खाली है. हैरानी की बात ये है कि केवल तीन ही जिलों में आरएएस अफसरों की पोस्टिंग की गई है.

अनुजा निगम में कुल 253 पद स्वीकृत है, जिसमें मुख्यालय स्तर पर 48 पद स्वीकृत है. लेकिन मुख्यालय स्तर पर 32 पद भरे हुए और 16 पद खाली है. जिला स्तर पर तो अनुजा निगम की हालत बेहद ही नाजुक है. 205 पदों में से केवल 87 पद ही भरे हुए है, 118 पदों पर बरसों से पोस्टिंग ही नहीं हुई. इसके अलावा सभी जिलों में जिला अधिकारी के लिए आरएएस की स्वीकृति है, लेकिन केवल 3 ही जिलों में आरएएस अधिकारी लगाए गए है. बाकी के 30 जिलों में जिला अधिकारियों के पद ही खाली है. जबकि अनुजा निगम की योजनाओं का जिम्मा सबसे ज्यादा जिला स्तर के अधिकारी को ही होता है. इस सबंध में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री मास्टर भवंरलाल आरएएस की नियुक्ति को लेकर सीएम से वार्ता की जाएगी, वैसे प्रदेश में आरएएस की संख्या कम है, फिर भी सीएम स्तर पर बात की जाएगी.

पिछले साल ही केंद्र सरकार से 5631 लाख का बजट आवंटित हुआ था, लेकिन इसमें से महज 1917 करोड़ खर्च हो पाया. इसका सबसे बड़ा कारण यही रहा कि अनुजा निगम का स्टाफ अधूरा है. मंत्री मास्टर भवंरलाल मेघवाल का कहना है कि अन्य पदों को भरने के लिए विभाग में भर्तियां निकाली जाएगी, इसके साथ साथ विज्ञापन के जरिए भर्तियों के बारे में जानकारी दी जाएगी, जिससे विभाग का काम सक्रिय रूप से हो सके. 

फिलहाल जिन जिलों में आरएएस नहीं है, वहां पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के जिला अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाएगी. लेकिन सबसे बडा सवाल यही उठता है कि हर साल करोडों का बजट आवंटित होता है, इसके बावजूद भी यह बजट खर्च नहीं हो पाता. सालों जिलों में पोस्टिंग खाली है ऐसे में अब अनुजा निगम खुद ही स्वरोजगार की तलाश में है.