जयपुर: सतीश पूनिया को फिर मिली राजस्थान बीजेपी की कमान

भारतीय जनता पार्टी में संगठन चुनाव चल रहे हैं और इस कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष की निर्वाचन प्रक्रिया गुरुवार को शुरू हुई थी.

जयपुर: सतीश पूनिया को फिर मिली राजस्थान बीजेपी की कमान
संगठन चुनाव में अध्यक्ष के लिए केवल सतीश पूनिया ने नामांकन दाखिल किया था.

जयपुर: राजस्थान बीजेपी को शुक्रवार को निर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष मिल गया. शुक्रवार को सतीश पूनिया के निर्वाचन की औपचारिक घोषणा हो गई. बता दें कि, बीजेपी मुख्यालय और सतीश पूनिया के धर पर अभिनंदन के लिए कार्यकर्ता जमा हुए और उनको बधाइयां दी.

गौरतलब है कि, संगठन चुनाव में अध्यक्ष के लिए केवल पूनिया ने नामांकन दाखिल किया था. बीजेपी के अध्यक्ष के निर्वाचन प्रक्रिया शुक्रवार को पूरी हो जाएगी , साथ ही राष्ट्रीय परिषद के 25 नामों का ऐलान भी होगा. सतीश पूनिया ने गुरुवार को दो सेट में अपना नामांकन दाखिल किय था. इस पद पर एकमात्र नामांकन मौजूदा अध्यक्ष सतीश पूनिया का आया है और इस कारण सतीश पूनिया का निर्वाचन तय माना जा रहा है. हालांकि औपचारिक घोषणा शुक्रवार को दोपहर के बाद ही होगी.

बीजेपी में संगठन चुनाव चल रहे हैं और इस कड़ी में प्रदेश अध्यक्ष की निर्वाचन प्रक्रिया गुरुवार को शुरू हुई थी, दोपहर 3 से शाम 5 बजे तक नामांकन दाखिले का काम हुआ. बीजेपी के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने निर्वाचन अधिकारी राजेंद्र गहलोत के समक्ष दो सेट में अपना नामांकन पत्र पेश किया. एक सेट पर 20 प्रस्ताव को के दस्तखत के साथ सतीश पूनिया ने मुहूर्त के अनुसार 4:30 बजे नामांकन दाखिल किया. निर्वाचन अधिकारी राजेंद्र गहलोत ने कहा कि संगठन चुनाव चल रहे हैं और इस कड़ी में राष्ट्रीय परिषद के लिए भी 25 नामांकन पत्र मिले थे.

वहीं, शुक्रवार सुबह 11 से 12 बजे का समय नाम वापसी के लिए रखा गया था. राजेंद्र गहलोत ने बताया की 12 बजे के बाद अध्यक्ष के निर्वाचन की औपचारिक घोषणा हो गई. यह घोषणा केंद्रीय पर्यवेक्षक नित्यानंद राय और बैजयंत पंड्या की मौजूदगी रही. इसके साथ ही राष्ट्रीय परिषद के 25 सदस्यों के चुनाव की घोषणा भी शुक्रवार को की गई.

वहीं, गुरूवार को प्रदेश में संगठन चुनाव की निर्वाचन प्रक्रिया सम्पन्न की गई. जिसके बाद यह लगभग तय था कि सतीश पूनिया निर्वाचित अध्यक्ष ही बनेंगे. लेकिन नये निर्वाचित प्रदेशाध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के 25 सदस्यों की भूमिका राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में भी बनी रहेगी.