राजस्थान: गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अधिकारियों की पहल, शुरू की यह योजना

गौशाला पदाधिकारियों ने बताया कि उनका उद्देश्य गोशाला को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि गायों की पूर्ण देखभाल हो सके

राजस्थान: गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अधिकारियों की पहल, शुरू की यह योजना
गोशाला में वर्तमान में लगभग 1386 गाय हैं जिनके लिए यह योजना बनाई है

नरेन्द्र/चुरु: गोशाला में गायो की अच्छी सेहत व गोशाला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोशाला संचालकों ने अनूठी योजना का शुभारंभ किया है. जुबिली पिंजरापोल गोशाला बीड़ में गंदे पानी को फिल्टर कर सदुपयोग कर फसल बीजाई एवं सब्जी उत्पादन का कार्य शुरू किया गया है ताकि गोशाला आत्मनिर्भर बन सके. वहीं गायों का स्वस्थ्य रखने के लिए गोशाला की बीड़ में सरसों एवं चने की फसलों की बोआई की गई है. वहीं नगरपालिका प्रशासन की ओर से 80 लाख रूपये से भी अधिक की बनी योजना कारगार साबित नहीं हो रही है. जिसके कारण गोशाला में गायों के लिए बनाई गई योजना भी खत्म होती सी नजर आ रही है. 

गोशाला पदाधिकारियों ने बताया कि उनका उद्देश्य गोशाला को आत्मनिर्भर बनाना है ताकि गायों की पूर्ण देखभाल हो सके एवं गायों के नाम पर चंदा आदि के लिए भटकना ना पड़े. वर्तमान में प्रवासी लोगों के सहयोग से एवं गोशाला ट्रस्ट की आर्थिक मदद से गोशाला में गायों की सेवा की जा रही है. गोशाला अध्यक्ष बालकिशन सरावगी ने बताया कि क्षेत्र में यह गोशाला अपने आप में एक ऐतिहासिक गोशाला है. जिसके निर्माण में सैंकड़ों वर्ष बीत गए हैं तथा गोशाला के अधीन लगभग 1400 बीघा जमीन है जो बीड़ के नाम से जानी जाती है. गोशाला में वर्तमान में लगभग 1386 गाय हैं जिनके लिए गोशाला पदाधिकारियों ने योजना बनाई है.

ट्रायल के तौर पर गोशाला पदाधिकारियों ने गंदे पानी को फिल्टर कर सौ बीघा जमीन में फसल बोआी का कार्य शुरू किया है. जिसमें साठ बीघा जमीन अन्य लोगों को दी गई है तथा 33 प्रतिशत लाभ गोशाला को मिलेगी. जिसमें गोशाला का कोई खर्चा नहीं होगा. सिर्फ फसल बोने वाले लोग गोशाला को 33 प्रतिशत का हिस्सा देंगे. इसके अलावा दस बीघा जमीन में सरसों, चना, पालक, मूली, गोभी, मेथी, आलू, धनिया, चकुंदर, सूंफ एवं बैगन की सब्जी की खेती शुरू की गई है. जिसके उत्पादन से गोशाला को आत्मनिर्भर बनाना है.

अधूरी है योजना
नगरपालिका प्रशासन ने गुलपुरा मोड़ पर स्थित गैनाणी से गंदे पानी की निकासी के लिए गोशाला में दो तालाब बनाए हैं. जो एक पूर्व में ही संचालित है. जिससे गोशाला में फसल आदि के लिए पानी का उपयोग नहीं के बराबर हो रहा है. इसके अलावा गुलपुरा मोड़ से गोशाला तक गंदे पानी की निकासी के लिए 48 लाख रूपये की लागत से एक तालाब बनाया गया है तथा 27 लाख रूपये की लागत से पेयजल लाइन डाली गई है. गोशाला पदाधिकारियों का कहना है कि योजना अन्तर्गत तालाब में पूरा पानी नहीं पहुंच रहा है और ना ही जैनरेटर एवं पंप हाऊस का निर्माण हुआ है. ऐसी स्थिति में गोशाला में फसल एवं सब्जी उत्पादन का कार्य गति नहीं पकड़ रहा है.

लगाए बाग-बगीचे
गोशाला अध्यक्ष बालकिशन सरावगी ने बताया कि इसके अलावा एक बाग-बगीचा भी तैयार किया गया है. ताकि सुबह-शाम घूमने वाले लोगों को लाभ मिल सके एवं फसल का मुख्य लक्ष्य है कि गायों का अनाज एवं हरा चारा मिल सके.