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राजस्थान: शून्यकाल के दौरान NRHM भर्ती घोटाले का उठा मुद्दा, मांगा गया मंत्री का इस्तीफा

शून्यकाल के दौरान मालवीय नगर विधायक और पूर्व चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए एनएचएम भर्ती घोटाले के मामले को उठाया. 

राजस्थान: शून्यकाल के दौरान NRHM भर्ती घोटाले का उठा मुद्दा, मांगा गया मंत्री का इस्तीफा
स्थगन प्रस्ताव के जरिए मामले को उठाया गया. (प्रतीकात्मक फोटो)

जयपुर: विधानसभा सत्र के दूसरे दिन शून्यकाल में एनआरएचएम भर्ती घोटाले पर पूर्व चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने चिकित्सा मंत्री डॉ रघु शर्मा को बर्खास्त करने की मांग की. शून्यकाल में मालवीय नगर विधायक और पूर्व चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने स्थगन प्रस्ताव के जरिए एनएचएम भर्ती घोटाले के मामले को उठाया.

इस दौरान सराफ ने कहा कि एनएचएम में कम्यूनिटी हेल्थ ऑफिसर के 2500 पदों की भर्ती निकाली गई. विभाग के मंत्री ने 17 मई को ट्वीटर पर  2500  पदों पर भर्ती की जानकारी दी. उन्होंने ट्वीटर पर लिखा कि बेरोजगारों के लिए स्वास्थ्य विभाग से बडी खबर. जिसे देख प्रदेश के बेरोजगारों में नौकरी की आस जागी. लेकिन प्रदेश के बेरोजगारों का दुर्भाग्य है कि मंत्री ने भर्ती की जानकरी नहीं होने की बात कह कर आनन फानन को 22 जून को परीक्षा होने वाली थी इसे रदद कर दिया गया. इसके बाद विभाग के एसीएस ने एनएचएम के  एचआर सैल को सस्पेंड कर दिया. इस भर्ती के लिए  कुल 30 हजार आवेदन आए है. अभ्यार्थियों की नियुक्ति् के लिए पैसे वसूलने तक की जानकारी सामने आई .

पूर्व चिकित्सा मंत्री सराफ ने कहा कि मैं पूछना चाहता हूं कि 17 मई केा मंत्री स्वंय ट्वीटर पर जानकारी दे रहे है कि एनएएचएम में 2500 पदों पर भर्ती निकाली गई और फिर क्या कारण रहे कि भर्ती को रदद किया गया. सराफ ने कहा कि जब ये भर्ती केंद्र की गाइड लाइन के अनुरूप निकाली गई थी. इस भर्ती को गाइड लाइन के अनुरूप 30 जून तक इस भर्ती को पूरा करना था. अब भर्ती रदद होने के बाद 3 हजार करोड की पीआईपी से 20 परसेंट के हिसाब से 600 करोड़ काटा जाएगा इसका जिम्मेदार कौन है. उन्होंने मंत्री पर प्रदेश की जनता से झूठ बोलने का आरोप लगाया. साथ ही पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने की मांग की.

स्थगन के माध्यम से विधायक अशोक लाहोटी ने भी कहा कि क्या किसी मंत्री का इकबाल इतना भी नहीं रहता है कि उसे पता ही नहीं हो कि उसके विभाग की फाइलें कहा जा रही है. मंत्री खुद कह रहे हैं कि मेरे पास फाइल नहीं आई. मंत्री ने खुद टिवटर पर लिखा था और भर्ती की जानकारी दी. 14 जून को नोटशीट पर भी मंत्री ने इस भर्ती की योग्यता केा लेकर पूछा. इसके बाद  20 जून केा मंत्री जी कहते हैं कि मेरे पास फाइल ही नहीं आई है. ये राजस्थान की जनता का अपमान है. लाहौटी ने कहा कि जब से ये मंत्री बने है ये खुद बीमार रहने लगे है.

इस मामले पर चिकित्सा मंत्री को पूर्व मंत्री वासुदेव देवनानी ने भी जम कर घेरा. देवनानी ने कहा कि फाइल सारे कंपोनेट के साथ भारत सरकार के पास गई.भारत सरकार ने स्वीकृति दी. इस सबंध में एमओयू हुआ है और एप्रूवल के समय एसीएस थे और मंत्री और एसीएस कह रहे हें कि हमे पता नहीं.26 अप्रेल को खुद एसीएस ने मिनिट ए्रपूव किए है. 16 मई को विज्ञप्ति अखबरों में आती है. मंत्री जी क्या अखबार नहीं पढते है. इनके पास डॉक्टर आते हैं और मंत्री अनुभव की कमी बताते हुए इस भर्ती में अनुभव की जानकारी नोटशीट पर मांगते है. इस प्रकरण में छोटे अधिकारियों को ही सजा दी जा रही है. क्या इस भर्ती में केकड  नहीं आने से भर्ती को निरस्त किया गया.इसकी एसीबी जांच होनी चाहिए.