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राजस्थान विश्वविद्यालय पर गहराया आर्थिक संकट, वेतन और पेंशन भुगतान के भी नहीं हैं पैसे

इस साल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वेतन पेटे से शिक्षकों को करीब 90 करोड़ रुपये का भुगतान किया है लेकिन जब बात पेंशन की होती है तो चौंकाने वाली राशि सामने आती है.

राजस्थान विश्वविद्यालय पर गहराया आर्थिक संकट, वेतन और पेंशन भुगतान के भी नहीं हैं पैसे
फाइल फोटो

जयपुर: पिछले कई सालों से आर्थिक संकट से जूझ रहा राजस्थान विश्व विद्यालय आने वाले समय में और भी ज्यादा आर्थिक संकट से गुजरने की कगार पर पहुंच चुका है. इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है राजस्थान विश्व विद्यालय से रिटायर हो रहे शिक्षकों की पेंशन.

पिछले कुछ सालों से वेतन के मुकाबले इन रिटायर्ड शिक्षकों की पेंशन है जो करीब डेढ़ गुना है. इसे देने के लिए ना तो यूनिवर्सिटी के पास बजट है और ना ही सरकार से राजस्थान यूनिवर्सिटी को कोई सहायता मिल पा रही है. ऐसे में अगर ये सिलसिला इसी प्रकार चलता रहा तो आने वाले दो-तीन सालों में यूनिवर्सिटी के पास पेंशन भुगतान के लिए कुछ नहीं बचेगा. अपनी तकलीफ को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन कई बार सरकार के सामने गुहार लगा चुकी है लेकिन सरकार द्वारा इस पर कोई कदम नहीं उठाया जा रहा.

इस साल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने वेतन पेटे से शिक्षकों को करीब 90 करोड़ रुपये का भुगतान किया है लेकिन जब बात पेंशन की होती है तो चौंकाने वाली राशि सामने आती है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस साल पेंशन पेटे से करीब 120 करोड़ रुपये का भुगतान किया है और यही हालात बने रहे तो आने वाले कुछ सालों में यूनिवर्सिटी के पास ना तो पेंशन भुगतान के लिए पैसा बचेगा और ना ही वेतन भुगतान के लिए. पेंशन की राशि को लेकर राविवि कुलपति आरके कोठारी का कहना है कि पिछले साल वेतन का 75 करोड़ का भुगतान किया था और पेंशन का 90 करोड़. जो इस साल बढ़कर वेतन का 90 करोड़ और पेंशन का 120 करोड़ रुपये हो गया है. वर्ष 2017 से लगातार सरकार से आग्रह किया जा रहा है लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकल रहा.

यूनिवर्सिटी के कुलपति आरके कोठारी का कहना है कि सरकार की ओर से सभी विभागों के रिटायर्ड कर्मचारियों को पेंशन का भुगतान कर रही है लेकिन यूनिवर्सिटी के करीब दो हजार शिक्षकों को विवि प्रशासन को पेंशन का भुगतान करना पड़ रहा है. ऐसे में अगर इन रिटायर्ड शिक्षकों को भी पेंशन का भुगतान सरकार वहन करती है तो यूनिवर्सिटी को काफी राहत मिल सकेगी. वहीं यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड शिक्षक बीडी रावत का कहना है कि पेंशन भुगतान के लिए विवि प्रशासन का अपने स्तर पर मूड नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में न्यायालय के आदेश के चलते विवि प्रशासन को पेंशन का भुगतान करना पड़ रहा है.

एरुटा के अध्यक्ष बीडी रावत का कहना है कि पेंशन के मामले को लेकर हाईकोर्ट ने रिटायर्ड शिक्षकों के पक्ष में फैसला दिया था और उसके बाद डीबी और सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर मुहर लगाई थी. वहीं सरकार को भी 40 करोड़ रुपये के भुगतान के आदेश दिए थे लेकिन सरकार ने अभी तक एक रुपये की सहायता यूनिवर्सिटी को नहीं है.

साथ ही अदालत ने कहा था की स्टेट यूनिवर्सिटी होने के नाते सरकार पर यूनिवर्सिटी का पूरा भार उठाने की जिम्मेदारी है लेकिन सरकार इससे अपना मुंह मोड़ रही है. साथ ही रावत का कहना है कि यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को दो भागों में बांट रखा है. एक वो जो 1996 से पहले लगे थे और दूसरे वो जो 1996 के बाद लगे थे.

गौतरलब है कि विवि ने 90 के दशक में राज्य सरकार का पेंशन एक्ट लागू किया था. तब से ही राजस्थान यूनिवर्सिटी पेंशन का पूरा भार वहन कर रही है. साथ ही अनुदान नहीं दिए जाने के चलते लम्बे समय तक पेंशन का भुगतान भी अटका रहा है. ऐसे में अगर सरकार का यूनिवर्सिटी के प्रति ये ही रवैया बना रहा तो वो दिन दूर नहीं जब पेंशन तो छोड़ो वेतन तक के लिए यूनिवर्सिटी के पास पैसे नहीं बचेंगे.