बारां के इस आदर्श गांव में उड़ी स्वच्छता अभियान की धज्जियां, प्रशासन बेखबर

अन्ता पंचायत समिति की ओडीएफ ग्राम पंचायत सीसवाली में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ाई हुई है. कस्बे में हर जगह गन्दगी के अबांर लगे रहते हैं.

बारां के इस आदर्श गांव में उड़ी स्वच्छता अभियान की धज्जियां, प्रशासन बेखबर
नालियों का गन्दा पानी आम रास्ते में भरा रहता है.

राम मेहता/बारां: सीसवाली कस्बे में स्वच्छता अभियान की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है. कहने को तो सीसवाली ग्राम पंचायत को महात्मा गांधी आदर्श ग्राम पंचायत का दर्जा हासिल है. कस्बा चीख चीख कर स्वच्छता अभियान के रखवालों को वालों को बुला रहा है, लेकिन दस सालों बाद भी यह पुकार अभी तक किसी ने नहीं सुनी.

अन्ता पंचायत समिति की ओडीएफ ग्राम पंचायत सीसवाली में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से लड़खड़ाई हुई है. कस्बे में हर जगह गन्दगी के अबांर लगे रहते हैं. गली मोहल्ले की नीलियां जाम होने से नालियों का गन्दा पानी आम रास्ते में भरा रहता है, जिससे राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

बता दें कि, ग्राम पंचायत सीसवाली बारां जिले की सबसे बडी ग्राम पंचायत है. कस्बे में करीब दस वर्षो से सफाई कर्मी अपनी विभिन्न मांगो को लेकर हड़ताल पर हैं. जिनका सरकार एंव ग्राम पंचायत द्बारा अब तक कोई समाधान नहीं किया गया. कुछ दिन पहले भी कस्बे के लोगों ने क्षेत्रीय मंत्री खनन एव गौपालन मंत्री को जनसुनवाई के दौरान कस्बे की सफाई का मुद्दा उठाया था मगर अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई.

धार्मिक जुलुस हो या राष्ट्रीय पर्व अपने अपने समुदाय या सगंठन मिलकर सफाई करते है. बाहर से आये मेहमानों के सामने कस्बे की लाज बचाने की कोशिश करते है. आपको यह जानकर हैरानी होगी की सांसद दुष्यन्त सिंह और क्षैत्रीय खनन एव गोपालन मन्त्री प्रमोद जैन भाया का क्षेत्र है. कुछ दिन पहले राज्य सरकार द्बारा सीसवाली कस्बे को स्मार्ट विलेज घोषित किया गया है. लेकिन लगता है की गन्दगी इतनी स्मार्ट हो गई है कि नेताओं को यह होते हुए भी किसी को दिखाई नहीं दे रही है.

धार्मिक आयोजनो एंव शैक्षणिक परिणामों के कारण यह कस्बा आध्यात्मिक एंव शैक्षणिक नगरी के रूप मे अपनी पहचान बनाने में कामयाब हुआ है. लेकिन यह गन्दगी यहां के धार्मिक एंव शैक्षणिक वातावरण पर गहरा प्रहार कर रही है. कस्बे के वरिष्ठ नागरिक व राजनिति के दिग्गज नेता से पहुंच होने के बावजूद भी कस्बे की सफाई पर कोई ध्यान नहीं देते है. चुनावी दिनों में भी कस्बे वासियों का पहला मुद्दा सफाई व्यवस्था का ही रहता है. लेकिन सरपंच हो या विधायक सिर्फ वादा करके चले जाते हैं.