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बिक्री न के बराबर, फिर भी 65 हजार रुपए के किराए पर खोली दुकानें; 20 मुस्लिमों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर

अचानक यह लोग पंजाब में आकर कैसे बस गए? कहां से आए? यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी सवाल बन चुका है.

बिक्री न के बराबर, फिर भी 65 हजार रुपए के किराए पर खोली दुकानें; 20 मुस्लिमों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर
मुस्लिम समुदाय के लोगों ने डेढ़ साल के भीतर यहां आकर कई दुकानें किराए पर लेकर कपड़े बेचने का काम शुरू किया है.

तरनतारन(पंजाब): सरहदी जिला तरनतारन जहां से लगातार आतंकी गतिविधियां सामने आ रही हैं. राज्य ही नहीं बल्कि देश की सुरक्षा एजेंसियों की भी इन गतिविधियों पर नजर है. इसी बीच यहां सुरक्षा से जुड़ा एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. शहर में पिछले डेढ साल में बीस के लगभग मुस्लिम समुदाय से जुड़े संदिग्ध लोगों ने दुकानें किराए पर लेकर कपड़े बेचने का काम शुरू किया है. इन दुकानों का किराया 30 से 65 हजार रुपए तक है. दुकानों के आकार की बात करें तो वे भी बहुत बड़ी भी नहीं हैं.

सूत्रों की मानें तो कथित दुकानदार शहर में जहां खुद रह रहे हैं उन घरों का किराया भी 10 हजार और उससे अधिक है. वहीं, दुकानों में ग्राहकों की संख्या की बात करें तो न के बराबर है. इन लोगों के लिए दोपहर का खाना भी किसी होटल से आता है. अचानक यह लोग यहां आकर कैसे बस गए? कहां से आए? और इतना रुपया कैसे और कहां से खर्च किया जा रहा है? यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी सवाल बन चुका है. जिसका जवाब तलाशने के लिए एजेंसियां इन लोगों को पर नजर बनाए हुए हैं.

एडीसी संदीप रिषी के मुताबिक, उन्होंने इस मामले को लेकर आदेश भी जारी कर दिए हैं कि किराएदारों की सूचना देना मकान मालिक और बिल्डिंग के मालिक के लिए जरूरी है. ऐसा न करने वाले के खिलाफ कार्रवाई होगी.

सरहदी जिला तरनतारन यहां श्री दरबार साहिब से सटा गार्द बाजार और तहसील बाजार. इन दोनों बाजारों कपड़े, सुनार, मुनियारी, स्टेशनरी, हलवाई समेत अन्य कई व्यवसाय की दुकाने लंबे समय से हैं. इनमें 10 फीसदी दुकानें किराए पर हैं.


बाजार में एक दुकान का किराया 30 से 65 हजार रुपए है.

बाजार के पुराने व्यापारी अपना नाम न उजागर करने की शर्त पर बताते हैं कि दुकानों का किराया यहां अधिक से अधिक 20 से 30 हजार रुपए है. इनका कहना है कि डेढ़ साल पहले यहां पर अचानक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने वही दुकानें 30 से 65 हजार रुपए तक के किराए पर ले लीं और वहां महिलाओं के कपड़े बेचने का काम शुरू कर दिया. अब तक उक्त लोग जितना किराया भर चुके हैं इतना माल भी इन दुकानों में नहीं है.

समाज सेवी अश्विनी कुमार कुक्कू के मुताबिक, इस बारे प्रशासन को एक साल पहले जानकारी दी थी. इसके बावजूद प्रशासन ने न तो इन लोगों की डीटेल हासिल की और न ही इन लोगों को बुलाकर इनसे जानने की कोशिश की कि यह लोग कहां से आए और इतना रुपया कहां से खर्च कर रहे हैं.

संबंधित थाने एसएचओ गुरचरण सिंह से बात की गई तो उनका कहना था कि इन लोगों की डीटेल हासिल की जा रही है. इन दुकान मालिकों को भी बुलाया गया है. पूरी रिपोर्ट बना कर उच्चाधिकारियों को दी जाएगी.