इस शहर ने पूरा किया पीएम मोदी का ड्रीम, इन जगहों के प्रशासन और पब्लिक ने किया मटियामेट

इस बार 4272 शहरों के बीच सर्वे हुआ. सर्वे में शहरों की लोकल बॉडी के दावों पर जनता की राय ली गई और लिस्ट बनाई गई है.

इस शहर ने पूरा किया पीएम मोदी का ड्रीम, इन जगहों के प्रशासन और पब्लिक ने किया मटियामेट
इंदौर के बाद दूसरे स्थान पर गुजरात का राजकोट और तीसरा सबसे स्वच्छ शहर नवी मुंबई है. फाइल फोटो

नई दिल्ली: स्वच्छता के मामले में इंदौर ने एक बार फिर बाजी मार ली है. मंगलवार को यहां केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय ने इंदौर को लगातार चौथी बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया. इंदौर के बाद दूसरे स्थान पर गुजरात का राजकोट और तीसरा सबसे स्वच्छ शहर नवी मुंबई है. शहरी विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप पुरी ने हर तीन महीने पर जारी होने वाली स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल पिछली तिमाही में दूसरा सबसे स्वच्छ शहर था, लेकिन इस बार तीन पायदान नीचे खिसक कर पांचवें स्थान पर पहुंच गया है.

इस बार 4272 शहरों के बीच सर्वे हुआ. सर्वे में शहरों की लोकल बॉडी के दावों पर जनता की राय ली गई और लिस्ट बनाई गई है. साल 2019 की पहली और दूसरी तिमाही का रिजल्ट इस तरह है-इंदौर दोनों तिमाही में नंबर 1 शहर है.

दस लाख की जनसंख्या में पहली तिमाही की रैंकिंग है
1- इंदौर
2-भोपाल
3 सूरत
4 नासिक
5 राजकोट

दूसरी तिमाही में

1-इंदौर
2-राजकोट
3-नवी मुंबई
4- वडोदरा
5-भोपाल

वहीं 1 से 10 लाख की जनसंख्या में पहली तिमाही में
नंबर वन -जमशेदपुर,
नंबर टू-NDMC दिल्ली,
 नंबर थ्री- खरगोन, 
नंबर फोर -बिलासपुर,
नंबर फाइव- कोल्हापुर है.

वहीं दूसरी तिमाही में जमशेदपुर चंद्रपुर खरगोन लोनी अंबिकापुर टॉप फाइव है. वहीं देश में 35 राज्य अब खुले में शौच से मुक्त हो चुके हैं. केंद्रीय आवासन शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मुताबिक "लोगों के व्यवहार में अब बड़ी बदलाव आ गया है लोग समझने लगे हैं क्या अच्छा है,और ये भी कि योजना का लाभ लेने से क्या बदलेगा जो कि बहुत अच्छी बात है.

पुरी आगे कहते हैं कि शहरों में आगे जाने, स्वच्छ बनने की होड़ लगी है ये सकारात्मक बात है. वो मीडिया को याद भी दिलाते हैं कि अगर कोई राज्य खुले में शौच या कोई और मानक का पालन नहीं रहता है तो हमें बताइए उनका ODF सर्टिफिकेट वापस लिया जाएगा और रैंकिंग अपने आप नीचे गिर जाएगी. स्वच्छता का सीधा संबंध प्रापर्टी के रेट से है अगर रैंकिंग में ऊपर है तो अपने आप रेट ज्यादा मिलेगा."

सर्वे से पता लगता है कि अलग ज़ोन में छोटे छोटे शहर भी अच्छा काम कर रहे हैं. जैसे एक से दस लाख जनसंख्या वाली कैटेगरी में खरगोन बिलासपुर कोल्हापुर कोरबा रोहतक सोलापुर पनवेल रायगढ़ अंबिकापुर तेनाली भटिंडा जैसे शहर है जो स्वच्छता में अच्छा काम कर रहे हैं.

इसके अलावा पच्चीस हज़ार से कम जनसंख्या वाली केटेगरी में बेरी इंद्री सिधौली मुनक अच्छा काम कर रहे हैं. पचास हज़ार से दस हज़ार तक जनसंख्या में फजिल्का गजरौला बिसवान रूपनगर राजपुरा अच्छा काम कर रहे हैं. इस बारे में मंत्रालय के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा कहते हैं कि "अब राज्य और शहरों के प्रशासन वो वो जागृति आ गई है कि वो खुद अपने को आगे बढ़ाने में सर्वे ,योजनाओं में भाग लेने के लिए सामने आ रहे हैं. जो ट्रेंड है वो ये दिखाता है कि हर शहर को लगातार टॉप बने रहने में मेहनत करनी ही पड़ेगी नहीं तो वो अगली तिमाही में नीचे के रैंक में आ जाएगा."

वो ये भी कहते हैं कि "इंदौर जैसे शहर तो अपने गीले कचरे को बेचने लगे हैं वहां 200 टन गीला कचरे के लिए टेंडर निकाला गया और अच्छा रिस्पॉन्स मिला . इसके अलावा कुछ शहर वेस्ट मैनेजमेंट पर अच्छा काम कर रहे हैं जिससे साफ सफाई तो हो ही रही है पर कमाई भी हो रही है ,वो अपना फंड जुटाने में खुद के लिए बड़ी मदद कर रहे हैं."

हालांकि राजधानी दिल्ली एनडीएमसी एरिया को छोड़कर अभी भी पिछड़ी हुई है. स्वच्छता के मिशन डायरेक्टर विनोद कुमार जिंदल इस बारे में कहते हैं कि "दिल्ली के स्थानीय निकाय एरिया के पास जगह कम पड़ रही है, जनसंख्या का भारी दबाव है,फंड भी कम है,कचरा कहां फेंके ये भी परेशानी है,वहीं लोग अब भी उस तरह का योगदान नहीं कर रहे जितनी ज़रुरत है."

हालांकि हरदीप सिंह पुरी इसे मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार मानते हैं. वो कहते हैं कि "केजरीवाल की वजह से पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सही ढांचा तैयार हो पाया जिससे सड़कों पर दबाव है . स्थानीय निकाय को फंड भी कम मिल रहा है जिससे वो काम नहीं हो पा रहा जो होना चाहिए अनधिकृत कॉलोनियों में सही बंदोबस्त नहीं होने से अस्वछता होती है और कई तरह की बीमारी जन्म लेती है इस पर पहली बार काम हुआ और अब केंद्र सरकार ने 1700 से ज्यादा कॉलोनियों को अधिकृत किया यहां हर तरह का विकास हो पाएगा." 

इन सारे शहरों की सालाना रैंकिंग मार्च में आएगी . सरकार में मान रही है कि तकनीक के प्रयोग से देश को स्वच्छ बनाने में जनभागीदारी बढ़ रही है 2400 शहरों के 57,000 टॉयलेट गूगल मैप पर आ गए हैं. स्वच्छता एप के डेढ़ करोड़ सबस्क्राइबर, 1969 नंबर की हेल्पलाइन भी जनभागीदारी बढ़ा रही है इससे बहुत बड़ा बदलाव आएगा.