दो सौ साल पुराना है 'बनारस बीड्स' का कारोबार, कोरोना काल में भी नहीं थमी रफ्तार

चाइनीज आर्टिफिशियल मोतियों को 'ना', विदेशियों को पसंद आ रहे बनारसी बीड्स, कोरोना काल में निर्यात 50 फीसद बढ़ा.

दो सौ साल पुराना है 'बनारस बीड्स' का कारोबार, कोरोना काल में भी नहीं थमी रफ्तार
बनारस के हस्तनिर्मित मोतियों की पूरे विश्व में एक अलग पहचान है.

वाराणसी: बात मोतियों की हो तो बनारस के हस्तनिर्मित मोतियों की पूरे विश्व में एक अलग पहचान है. देश ही नहीं दुनिया भर में इसके मुरीद हैं. बनारस ग्लास बीड्स का निर्यात यूरोप, अमेरिका समेत 70 देशों में किया जाता है. बनारस में शीशे को गलाकर सुंदर बीड्स बनाए जाते हैं. इस कारोबार से बड़ी संख्या में कारीगर जुड़े हुए हैं, जिनमें खासतौर से महिलाएं ज्यादा हैं. इन बीड्स का इस्तेमाल सुंदर सजावटी सामान, आर्टिफिशियल ज्वैलरी,  लैंप शेड्स और झूमर जैसे आइटम्स में किया जाता है.

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कोरोना काल में बढ़ा व्यापार
एक तरफ जहां कोरोना के दौरान दुनिया भर की अर्थव्यवस्था डगमगा गई. ऐसे में भी बनारस के इन मोतियों के कारोबार में 50 फीसद से ज्यादा का इजाफा हुआ. इस दौरान दुनिया ने चीन के नकली और सस्ते ग्लास बीड्स को नकार कर बनारस के हस्तनिर्मित ग्लास बीड्स पर भरोसा जताया. नतीजा ये हुआ कि पिछले करीब 200 सालों से चल रहे इस कारोबार में तेजी से उछाल आया. बनारस में ग्लास बीड्स बनाने का काम ग्रामीण इलाकों में बड़े पैमाने पर किया जाता है. इस व्यवसाय से बड़ी संख्या में महिलाएं भी जुड़ी हैं. इसमें कांच को गलाकर सुंदर मोती बनाए जाते हैं, फिर उन्हें पॉलिश करके देश-विदेश में भेजा जाता है.

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