लखनऊ: बीजेपी नेता दयाशंकर सिंह के परिवार की महिलाओं पर अमर्यादित टिप्पणी के मामले में आरोपित बसपा के पूर्व महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रामअचल राजभर को जमानत मिल गई है. एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court)  के स्पेशल जज पवन कुमार राय ने बुधवार को मामले में सुनवाई की. जिसमें दोनों को 20-20 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत दी. गौरतलब है कि दोनों ने बीते दिनों ही एमपी-एमएलए कोर्ट में सरेंडर किया था. 


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कोर्ट ने भगोड़ा घोषित करते हुए दिए थे कुर्की का आदेश
एमपी-एमलए कोर्ट के विशेष जज पवन कुमार राय ने नसीमुद्दीन सिद्दीकी (Nasimuddin Siddiqui) और राम अचल राजभर (Ram Achal Rajbhar)  को भगोड़ा घोषित करते हुए उनकी चल-अचल संपत्ति को कुर्क करने का आदेश जारी किया था. जिसके बाद 19 जनवरी को दोनों ने कोर्ट में सेरेंडर कर जमानत अर्जी दी थी. इस पर कोर्ट ने दोनों को न्यायिक हिरासत में लेकर जेल भेजने के निर्देश दिए थे. 


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क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि जुलाई 2016 में भाजपा के वरिष्ठ नेता दयाशंकर सिंह द्वारा बसपा अध्यक्ष मायावती (Mayawati) के प्रति आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के बाद खासा विवाद हुआ था. इसके विरोध में बसपा कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया था.


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इस दौरान पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी और उस वक्त के प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर की अगुवाई में बड़ी संख्या में बसपा कार्यकर्ताओं ने हजरतगंज चौराहे पर किए गए प्रदर्शन में तेतरा देवी की नाबालिग पोती तथा परिवार के अन्य सदस्यों के बारे में अशोभनीय टिप्पणी की थी और अपशब्दों का इस्तेमाल किया था. जिसके बाद दयाशंकर सिंह की मां तेतरा देवी ने 22 जुलाई 2016 को हजरतगंज कोतवाली में नसीमुद्दीन, राम अचल राजभर और मेवालाल के खिलाफ नामजद FIR किया था.


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