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हापुड़ लिंचिंग केसः सुप्रीम कोर्ट ने आगे की जांच करने का निर्देश देने से किया इनकार

याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए पीठ ने समीउद्दीन से निचली अदालत का रुख करने को कहा जो कानून के मुताबिक फैसला लेगी. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व में शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि उसने हापुड़ भीड़ हत्या मामले में जांच पर नयी स्थिति रिपोर्ट दायर की है. 

हापुड़ लिंचिंग केसः सुप्रीम कोर्ट ने आगे की जांच करने का निर्देश देने से किया इनकार
फाइल फोटो

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के हापुड़ लिंचिंग केस में उत्तर प्रदेश पुलिस को आगे की जांच करने का निर्देश देने से मंगलवार को इनकार कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल केस में अतिरिक्त चार्जशीट दाखिल करने को लेकर कोई भी निर्देश जारी करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट के सामने अतिरिक्त दस्तावेज या अर्जी दाखिल करने की इजाजत दी. सुप्रीम कोर्ट में फिलहाल याचिका लंबित रखी.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई एवं न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की अवकाश पीठ ने कहा कि मांस निर्यातक 45 वर्षीय कासिम कुरैशी की हत्या मामले में आगे की जांच करने और पूरक आरोप-पत्र दायर करने के लिए राज्य पुलिस को निर्देश देने की मांग वाली याचिका पर फैसला निचली अदालत लेगी.पीठ मृतक के रिश्तेदार समीउद्दीन की ओर से दायर नयी अंतरिम याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में कहा गया है कि मीट निर्यातक के दोनों भाइयों की तरफ से हापुड़ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज कराए गए बयानों में हुए खुलासों के मद्देनजर आगे जांच की जरूरत है. 

याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए पीठ ने समीउद्दीन से निचली अदालत का रुख करने को कहा जो कानून के मुताबिक फैसला लेगी. उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व में शीर्ष अदालत को सूचित किया था कि उसने हापुड़ भीड़ हत्या मामले में जांच पर नयी स्थिति रिपोर्ट दायर की है. 

दरअसल, पीड़ित की तरफ से अर्जी दाखिल कर कहा गया था कि जांच सही दिशा में नहीं हो रही है लिहाजा सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में दखल दे.आपको बता दें कि पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और मेरठ के आईजी से पूरे घटना की रिपोर्ट सौंपने को कहा था.कोर्ट ने पुलिस से समीउद्दीन की सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा था.आपको बता दें कि गवाह समीउद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी सुरक्षा और केस को यूपी से बाहर ट्रांसफर करने की मांग की थी. साथ ही मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में SIT टीम के गठन की मांग भी की थी. 

याचिकाकर्ता ने दो आरोपियों को दी गई जमानत रद्द करने की मांग की थी.याचिकाकर्ता ने कहा था कि लोकल पुलिस सुप्रीम कोर्ट द्वारा मॉब लिंचिंगकेस में जारी दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर रही है. पुलिस एफआईआर को रोड रेज का मामला बना कर केस दर्ज कर रही है. पुलिस ने अभी तक उसका बयान तक दर्ज नहीं किया है.उनकी मांग है कि बयानों को मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराया जाए और साथ ही मामले में विशेष लोक अभियोजकनियुक्त किया जाए.आपको

बता दें कि पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश जारी किया था. कोर्ट ने मॉब लिंचिंग और गौरक्षा के नाम पर होने वाली हत्याओं को लेकर कहा था कि कोई भी नागरिक कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता. डर और अराजकता की स्थिति में राज्य सरकारें सकारात्मक रूप से काम करें. कोर्ट ने संसद से ये भी कहा था कि वो देखे कि इस तरह की घटनाओं के लिएकानून बन सकता है क्या? 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को दी गई गाइडलाइन जारी करने को कहा था और अगले 4 हफ्तों में कोर्ट में जवाब पेश करने के निर्देश भी दिए थे. सुप्रीम कोर्ट ने जाति और धर्म के आधार पर लिंचिंग के शिकार बने लोगों को मुआवजा देने की मांग कर रही लॉबी को भी बड़ा झटका दिया था. चीफ जस्टिस ने वकील इंदिरा जयसिंह से असहमति जताते हुए कहा था कि इस तरह की हिंसा का कोई भी शिकार हो सकता है सिर्फ वो ही नहीं जिन्हें धर्म और जाति के आधार पर निशाना बनाया जाता है.