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'अयोध्या में भगवान राम का प्राचीन मंदिर ढहा दिया गया और उसकी जगह मस्जिद बना दी गई'

वैद्यनाथन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में जस्टिस अग्रवाल ने खुद अपने विचार देते हुए लिखा है कि अयोध्या में भगवान राम का प्राचीन मंदिर ढहा दिया गया और उसकी जगह मस्जिद बना दी गई. इसके बावजूद हिन्दू लोगों की उस स्थान के प्रति आस्था कम नहीं हुई.

'अयोध्या में भगवान राम का प्राचीन मंदिर ढहा दिया गया और उसकी जगह मस्जिद बना दी गई'

नई दिल्‍ली: अयोध्‍या केस की आठवें दिन की सुनवाई में मंगलवार को रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने दलील पेश करते हुए कहा कि जहां मस्जिद बनाई गई थी उसके नीचे एक विशाल निर्माण था और ASI की खुदाई में जो चीजें सामने आईं हैं उसके मुताबिक वह हिंदू मंदिर था. वैद्यनाथन ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में जस्टिस अग्रवाल ने खुद अपने विचार देते हुए लिखा है कि अयोध्या में भगवान राम का प्राचीन मंदिर ढहा दिया गया और उसकी जगह मस्जिद बना दी गई. इसके बावजूद हिन्दू लोगों की उस स्थान के प्रति आस्था कम नहीं हुई. हिन्दू लोग वहां पर पहले की तरह जाते रहे और पूजा अर्चना करते रहे. उन्होंने कभी उस जगह पर पूजा करना बंद नहीं किया.

सी एस वैद्यनाथन ने कहा कि बाबरी मस्जिद के नीचे जिस तरह का स्ट्रक्चर था, उसकी बनावट, उसके निर्माण के तरीके और उसमें भगवान के चिन्ह बताते हैं कि वहां पहले से मंदिर था, पहले मुस्लिम पक्ष मंदिर के स्ट्रक्चर को ही मना करता था, लेकिन बाद में वो कहने लगे कि स्ट्रक्चर तो था, लेकिन वो एक इस्लामिक स्ट्रक्चर की तरह था.

अयोध्या केस: 'जहां मस्जिद बनाई गई थी उसके नीचे एक विशाल निर्माण था'

रामलला विराजमान की दलील
वैद्यनाथन ने कहा कि मैंने कोर्ट के सामने पुराने सभी तथ्य और रिकॉर्ड पेश किए हैं. जिससे साबित होता है कि राम जन्मभूमि भगवान राम का जन्म स्थान है. इस स्थान के प्रति लोगों की निष्ठा शुरू से चली आ रही है. मस्जिद गिरने के बाद एक पत्थर के स्लैब मिले जिनमें 12 या 13 वीं शताब्दी में लिखे एक शिलालेख शामिल हैं. शिलालेख थोड़ा क्षतिग्रस्त है और अंतिम दो पंक्तियां भारी क्षतिग्रस्त हो गई हैं. शिलालेख का मूल पाठ संस्कृत में है. शिलालेखों पर उल्लेख साकेता मंडल में बने मंदिर से है और यह राम के जन्म का स्थान है.

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उन्‍होंने कहा कि 1114 AD से 1155 AD तक 12 वीं शताब्दी में साकेत मंडल का राजा गोविंदा चंद्रा था. उस वक्त अयोध्या उसकी राजधानी थी. यहां विष्णु हरि का बहुत बड़ा मंदिर था. पुरातत्वविदों ने इसकी पुष्टि की है. खुदाई में मिले शिलालेख की प्रामाणिकता को कभी चुनौती नहीं दी गई है. सिर्फ शिलालेख के मिलने की जगह को चुनौती दी गई कि क्या वह विवादित जगह से मिला या नहीं.

सी एस वैधनाथन ने कहा कि पत्थर की जिस पट्टी पर संस्कृत का लेख लिखा है, उसे विवादित ढांचा विध्वंस के समय एक पत्रकार ने गिरते हुए देखा था, इसमें साकेत के राजा गोविंद चंद्र का नाम है. साथ ही लिखा है कि ये विष्णु मंदिर में लगी थी.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि क्या ये सब ASI के द्वारा इकट्ठा किया गया था? रामलला के वकील वैद्यनाथन ने कहा कि ये ASI रिपोर्ट में नहीं था, ASI रिपोर्ट काफी बाद में आई थी. सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि ASI रिपोर्ट का हवाला देते हुए मगरमच्छ, कछुओं का भी जिक्र किया और कहा कि इनका मुस्लिम कल्चर से मतलब नहीं था.