क्या त्रिवेंद्र सिंह रावत के फैसले बदलकर तीरथ सिंह रावत जीत पाएंगे चुनाव?

आइए जानते हैं, किन मुद्दों को लेकर सियासत गर्म है...

क्या त्रिवेंद्र सिंह रावत के फैसले बदलकर तीरथ सिंह रावत जीत पाएंगे चुनाव?

देहरादून: विधानसभा चुनाव से एक साल पहले उत्तराखंड की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को हटा दिया. उनके स्थान पर तीरथ सिंह रावत को नया मुख्यमंत्री बनाया गया. सीएम बनने के बाद पहले वह अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे. अब वह अपने फैसलों को लेकर सुर्खियां बटोर रहे हैं. उनके कुछ ऐसे फैसले हैं, जो सीधे त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार से जुड़े हैं. आइए जानते हैं, किन मुद्दों को लेकर सियासत गर्म है...

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गैरसैंण का फैसला पलटा
त्रिवेंद्र सिंह रावत के कुर्सी छोड़ने के पीछे गैरसैंण को कमिश्नरी बनाने के फैसले को सबसे बड़ा कारण माना जा रहा था. नए सीएम तीरथ सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले को बदल दिया गया. अब इसके बाद एक बार फिर उत्तराखंड में दो कमिश्नरी हो गई. 

देवस्थानम बोर्ड का क्या होगा?  
त्रिवेंद्र सिंह रावत के एक और फैसले को लेकर चर्चा चल रही है. दरअसल, देवस्थानम बोर्ड को लेकर सरकार को साधु-संतों की नाराजगी झेलनी पड़ी थी. इसके बाद अब तीरथ सिंह रावत ने कहा है कि देवस्थानम बोर्ड में शामिल 51 मंदिरों को बोर्ड से मुक्त किया जाएगा. देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार किया जाएगा. जल्दी ही चार धामों के तीर्थ पुरोहितों की बैठक बुलाएंगे. किसी के भी अधिकार को उनकी सरकार किसी को भी छीनने नहीं देगी. इसके बाद से इसको लेकर भी सुबबुगाहट बढ़ गई है. 

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इस मुद्दे पर भी हो रही चर्चा
इनके अलावा तीरथ सिंह रावत ने एक और अहम घोषणा की है. उनका कहना है कि कुंभ नगरी में शराब पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा.  अगले महाकुंभ के लिए संतों को अभी से भूमि चिहिंत कर दी जाएगी. किसी को भी गंगा स्नान करने में रोक-टोक नहीं की जाएगी. माना जा रहा था कि कुंभ की व्यवस्थाएं भी त्रिवेंद्र सिंह के जाने की एक बड़ी वजह बनी थी. 

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