UP के शिक्षकों ने बनाई 'हमार बिटिया- हमार मान' फिल्म, नहीं खर्च हुए एक भी रुपए, इंटरनेट पर मचा रही धूम

क्षेत्रीय भाषा की प्रधानता लिये हमार बिटिया- हमार मान फिल्म ने यह साबित किया है कि शिक्षक समाज का अहम हिस्सा होते हैं...

UP के शिक्षकों ने बनाई 'हमार बिटिया- हमार मान' फिल्म, नहीं खर्च हुए एक भी रुपए, इंटरनेट पर मचा रही धूम

अजीत सिंह/जौनपुर: यूपी के जौनपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिससे बच्चों के जीवन में टीचर्स का महत्व समझ आ जाता है. यहां के एक प्राथमिक विद्यालय के टीचर्स ने मिलकर बुनियादी शिक्षा जगत में नया इतिहास लिख दिया. दरअसल, शिक्षकों ने मिलकर बेटियों और लिंगभेद की सोच रखने वाले माता-पिता को प्रेरित करने वाली एक फिल्म बनाई है. बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ घंटे की इस फिल्म में एक भी पैसा खर्च नहीं किया गया है. 

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"हमार बिटिया- हमार मान" नाम से बनी है फिल्म
इस फिल्म में सभी किरदार स्कूल के टीचर्स और स्टूडेंट्स ने ही निभाए हैं. पूरी मूवी की स्क्रिप्ट, रिकॉर्डिगं और एडिटिंग शिक्षक शिवम सिंह ने की है. मिशन शक्ति पर आधारित  इस फिल्म का नाम "हमार बिटिया- हमार मान" रखा गया है और रिलीज होते ही यह सोशल मीडिया पर धूम मचा रही है.

बच्चों की एक्टिंग स्किल को भी मिला बढ़ावा
बच्चों के अभिनय कौशल को प्रोत्साहित करते हुए खपरहां न्याय पंचायत के परिषदीय विद्यालय में इस फिल्म का निर्माण किया गया. मिशन शिक्षण संवाद के अंतर्गत बनी यह फिल्म जहां मिशन शक्ति को समाहित करती है, तो वहीं समाज की अनेक विसंगतियों के बारे में भी बताती है. 

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मोबाइल फोन से शूट की गई मूवी
क्षेत्रीय भाषा की प्रधानता लिये हमार बिटिया- हमार मान फिल्म ने यह साबित किया है कि शिक्षक समाज का अहम हिस्सा होते हैं. प्रेम तिवारी ने इस फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी है और शिक्षक शिवम सिंह ने इसे अपने मोबाइल से शूट किया है. साथ ही, इस मूवी के लिए प्रदेश के कई जनपदों के टीचर्स का भी अमूल्य योगदान रहा है.

यह फिल्म बताती है समाज की जिम्मेदारी
यह फिल्म समाज में बेटियों के प्रति सजगता को बढ़ाने का प्रयास करती है और उनके प्रति समाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से भी अवगत कराती है. इस फिल्म में कई बेटियों की जिंदगी में आने वाली कई परेशानियों के बारे में बताया गया है, जैसे गरीबी, मजबूरी, विवशता, सहायता, सम्मान, आदि. शिक्षकों का कहना है कि हमार बिटिया- हमार मान केवल फिल्म नहीं, बल्कि एक विचार है, जिसे विश्व पटल पर देखे और समझे जाने की आवश्यकता है.

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वहीं, इस मूवी में मुख्य किरदार निभाने वाली दिव्या और उसके माता-पिता इससे काफी खुश हैं. परिवारजनों का कहना है कि यह फिल्म उनके असल जीवन पर बनाई गई है. दिव्या ने बताया कि उसका कोई भाई नहीं है. वह अपने माता-पिता का नाम रोशन करना चाहती है. 

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