UP पंचायत चुनाव: इस तरीके से पता कर सकते हैं किसे मिलेगा प्रधानी का टिकट

आरक्षण के बाद जो सीटें बच जाएंगी उनमें से एक तिहाई सामान्य महिला के लिए रिजर्व होंगी. इसके बाद भी जो सीटें बचेंगी वो जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट के नाम होंगी. 

UP पंचायत चुनाव: इस तरीके से पता कर सकते हैं किसे मिलेगा प्रधानी का टिकट

लखनऊ: प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए सरकार ने आरक्षण की व्यवस्था तय कर दी है. सरकार ने ग्राम प्रधान सीट के आरक्षण के लिए जिलाधिकारी को आदेश दिए हैं. यानी आरक्षण की व्यवस्था कैसे होगी, सीट किस कैटिगरी में जाएगी, इस पर रोटेशन सिस्टम को फॉलो करते हुए सीटें आरक्षित की जाएंगी. अभी तक किसी भी जिले की सीट को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है. लेकिन हम आपको बताएंगे कि बिना लिस्ट आए कैसे आप पता लगा सकते हैं कि आपके गांव की सीट किस कैटिगरी में आएगी. 

पंचायत चुनाव को लेकर सरकार ने कहा है कि सबसे ग्राम पंचायत, ब्लॉक प्रमुख जैसे पदों के लिए सबसे पहले ST, फिर SC, इसके बाद OBC के कैटिगरी के लोगों को मौका दिया जाएगा. इसके बाद जो सीटें बच जाएंगी उनमें से एक तिहाई सामान्य महिला के लिए रिजर्व होंगी. इसके बाद भी जो सीटें बचेंगी वो जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट के नाम होंगी. 

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प्रदेश में कितनी सीटें आरक्षित?
प्रदेश में पंचायत में 49 फीसदी सीटें आरक्षित हैं. एक फीसदी ST 21 पर्सेंट SC, 27 फीसदी ओबीसी के लिए रिजर्व हैं. बची 51 फीसदी सीटें सामान्य कैटिगरी के लिए हैं. सभी कैटेगरी की एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.

किस पंचायत में किसे कैटेगरी को आरक्षण?
आरक्षण की व्यवस्था में जो सबसे पहला नियम देखा जाएगा वह ये है कि अगर कोई पंचायत साल 1995, 2000, 2005, 2010 और 2015 में रिजर्व कैटेगरी में रही होगी तो उसके इस बार जनरल होनी की पूरी संभावना है. साथ ही अगर कोई सीट जनरल में रही होगी तो अबकी बार वो रिजर्व हो जाएगी. अब रिजर्व का मतलब ये है कि चाहे वो एससी में या फिर ओबीसी में रिजर्व रही हो. मसलन अगर पिछले चुनाव में कोई सीट ST के लिए रिजर्व रही होगी तो उसे इस बार इससे बाहर रखा जाएगा. इसी तरह कोई सीट अगर SC और OBC के लिए भी रिजर्व रही होगी तो इस साल उसे इस कैटेगरी से बाहर रखा जाएगा.

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पहले क्या थी व्यवस्था?
अभी तक के पंचायत चुनावों में प्रदेश में ऐसी बहुत-सी सीटें हैं जो 1995 के बाद से अभी तक कभी सामान्य नहीं रहीं. ऐसी सीटें इस बार सामान्य होंगी. प्रदेश में पहली बार 1995 पंचायत चुनाव में आरक्षण की व्यवस्था की गई थी. अब इस बार रोटेशन का सिस्टम देखा जाएगा. इसे ऐसे समझा जा सकता है कि जो सीट जिस कैटेगरी के लिए 2021 से जितनी पहले आरक्षित रही होगी उसका नंबर इस बार सबसे पहले रहेगा. 

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आसान भाषा में समझिए कैसे होगा आरक्षण?
इस ऐसे समझिए कि अगर कोई पंचायत 1995 में एससी के लिए, 2000 में ओबीसी के लिए, 2005 में फिर एससी के लिए, 2010 में जनरल के लिए और फिर 2015 में एससी के लिए रिजर्व थी तो इस बार वह ओबीसी के खाते में जा सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि ये सीट एससी के लिए दो बार और जनरल के लिए एक बार आरक्षित हो चुकी है. इसलिए उस पंचायत को इस OBC के लिए आरक्षित किए जाने की प्रबल संभावना है.

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15 तक साफ हो जाएगी तस्वीर
हालांकि पंचायतों की आरक्षण सूची छापने अंतिम तिथि 15 मार्च तक है. इसके बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी. लेकिन रोटेशन सिस्टम की व्यवस्था में ऐसा ही फॉर्मूला अपनाया जाएगा.

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