उत्तराखंड के इस गांव में 'खतरों का खेल' बन गई है जिंदगी, हादसे के इंतजार में प्रशासन?

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि इलाके के जनप्रतिनिधियों को इस हालात का अंदाजा नहीं है. उन्हें कई बार बताया गया है कि बरसात में इलाके का हाल कैसा होता है. रास्ता न होने की भी बात कही गई लेकिन उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगी.

उत्तराखंड के इस गांव में 'खतरों का खेल' बन गई है जिंदगी, हादसे के इंतजार में प्रशासन?
टूटी हुई सड़क और उफनता नाला

रुद्रप्रयाग: उत्तराखंड में मॉनसून आते ही कई इलाकों में ऐसी बारिश होती है, कि घंटों में बाढ़ आ जाती है. ऐसे में आपदा प्रबंधन अगर ठीक से न हो, तो हालात बदतर हो सकते हैं. कुछ ऐसी ही स्थिति इन दिनों रुद्रप्रयाग जिले के पूर्वी घंगासु बांगर क्षेत्र की है. यहां हुई जबरदस्त बारिश के बाद से इलाके के नदी नाले उफान पर हैं. ऐसे हालात में सामान्य इलाकों में तो रहना मुश्किल हो ही जाता है, यहां तो ढंग से सड़कें भी नहीं हैं. ऐसे में लोग जिस तरह जान जोखिम में डालकर जिंदगी जी रहे हैं, वो आपदा प्रबंधन और लोकनिर्माण विभाग की बखिया उधेड़ने वाला है. 

उफनते नाले को पार करने की जद्दोजहद 
रूद्रप्रयाग जिले के जखोली विकास खण्ड में पूर्वी घंगासु बांगर क्षेत्र पड़ता है. जहां मॉनसून में तेज बारिश होने के बाद जीने के लिए परिस्थितियां काफी मुश्किल हो जाती हैं. रोजमर्रा के कामों के लिए भी यहां के लोगों को उफनते हुए नालों और नहरों को पार करना पड़ता है. हालांकि उन्हें भी पता होता है कि ये उनके लिए कितना खतरनाक है. 

तेज धारा में बह रही है जनता, जनप्रतिनिधि गायब 
स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि इलाके के जनप्रतिनिधियों को इस हालात का अंदाजा नहीं है. उन्हें कई बार बताया गया है कि बरसात में इलाके का हाल कैसा होता है. रास्ता न होने की भी बात कही गई लेकिन उनके कान पर जूं तक नहीं रेंगी. लोगों का कहना है कि वे अच्छी जानते हैं कि रोजाना वे अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं लेकिन दिनचर्या तो चलानी ही पड़ेगी. 

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सड़क बनी तो थी लेकिन टिकी ही नहीं 
स्थानीय लोगों ने ये भी बताया कि लोग जहां उफनते नाले को पार कर रहे हैं, वहां पहले एक सड़क भी थी. बाढ़ के पानी के तेज बहाव में सड़क टिक नहीं पाई और धराशाई हो गई. इस घटना के बाद से उन्हें ऐसे ही जीना पड़ रहा है. ग्रामीणों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि धीरे-धीरे पैदल चलने की जगह भी खत्म हो रही है. ऐसे में वे किस तरह अपना काम करेंगे. 

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