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ZEE जानकारी: पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क जो अपनी आजादी के दिन को लेकर है 'कंफ्यूज'

 वहां के समाचार पत्रों में ये सवाल उठाते हुए कई आर्टिकल लिखे जाते हैं कि पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस, 14 अगस्त को होना चाहिए या 15 अगस्त को होना चाहिए ? 

ZEE जानकारी: पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क जो अपनी आजादी के दिन को लेकर है  'कंफ्यूज'

आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि पाकिस्तान, दुनिया का एक ऐसा देश है जो आज भी अपने जन्म की तारीख को लेकर Confused है. यानी पाकिस्तान अपने स्वतंत्रता दिवस को लेकर भ्रमित है . पाकिस्तान के विद्वान इस पर किताबें लिखते हैं . वहां के समाचार पत्रों में ये सवाल उठाते हुए कई आर्टिकल लिखे जाते हैं कि पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस, 14 अगस्त को होना चाहिए या 15 अगस्त को होना चाहिए ? 

ज़रा सोचिए.. कि वो देश कैसा होगा ? और उस देश की स्थापना करने वाले लोग कितने अज्ञानी होंगे जिन्हें ये भी नहीं पता कि उनका स्वतंत्रता दिवस कब होता है ? आज हमने इस पर रिसर्च किया कि जब भारत और पाकिस्तान एक साथ आज़ाद हुए थे, तो फिर पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को क्यों मनाया जाता है ?
और हमें इसे जुड़ी कई दिलचस्प जानकारियां मिलीं.

'Radio पाकिस्तान' पर हर वर्ष मोहम्मद अली जिन्ना की आवाज़ में पहला बधाई संदेश सुनाया जाता है.... जिसमें कहा जाता है कि '15 अगस्त की आज़ाद सुबह पूरे राष्ट्र को मुबारक हो'... लेकिन मुहम्मद अली जिन्ना की ये बधाई हर वर्ष 15 के बजाए 14 अगस्त को सुनवाई जाती है.

अपने Research के दौरान आज हमें पाकिस्तान के कुछ डाक टिकट भी मिले हैं . जिनमें लिखा है... Pakistan Postage 15 August 1947. 

यहां ये भी समझना होगा कि पाकिस्तान आखिर कौन सी स्वतंत्रता और आज़ादी का उत्सव मना रहा है ? सच तो ये है कि आज़ादी की लड़ाई में पाकिस्तान की मांग करने वाली पार्टी मुस्लिम लीग का कोई योगदान नहीं था. 

मुस्लिम लीग, सर सैयद अहमद खां की Two Nation Theory का समर्थन करती थी . सर सैयद ने कहा था कि मुसलमानों को अंग्रेज़ों का साथ देना चाहिए क्योंकि अगर अंग्रेज़ चले गए तो लोकतंत्र में बहुसंख्यक हिंदू, मुसलमानों को दबा देंगे . 

वर्ष 1906 में ढाका में मुस्लिम लीग की स्थापना हुई थी . और उसके बाद से लगातार मुस्लिम लीग, अंग्रेज़ों के कदमों में सिर झुकाती ((सज़दा)) रही . 

मोहम्मद अली जिन्ना के सिर पर अंग्रेज़ों का हाथ था . अंग्रेज़ों की मदद से मोहम्मद अली जिन्ना ने पाकिस्तान का निर्माण किया . ((और ये कितना क्रूर मज़ाक है कि आज पाकिस्तान अंग्रेज़ों से ही आज़ादी हासिल करने का जश्न मनाता है . सच ये है कि हर साल 14 अगस्त को पाकिस्तान के लोगों को भ्रमित किया जाता है .))

पाकिस्तान के विद्वान K.K. Aziz ने पाकिस्तान के इतिहास की समस्याओं पर एक किताब भी लिखी है जिसका नाम है... Murder of History . इस किताब के पेज नंबर 180 पर उन्होंने लिखा है - 

"14 अगस्त को पाकिस्तान आज़ाद हो गया, ये बात सही नहीं है . The Indian Independence Bill 4 जुलाई 1947 को ब्रिटेन की संसद में पेश किया गया था और 15 जुलाई को कानून बन गया था . इसी के तहत 14 और 15 अगस्त की मध्यरात्रि को भारत और पाकिस्तान को आज़ाद किया जाना था . दोनों नए देशों को Viceroy के द्वारा ही निजी तौर पर Power Transfer किया जाना था. 

Lord Mountbatten एक ही समय पर कराची और नई दिल्ली में मौजूद नहीं रह सकते थे . ये भी संभव नहीं था कि 15 अगस्त की सुबह वो भारत में रहें और फिर कराची पहुंच जाएं क्योंकि भारत को आज़ादी मिलने के बाद वो भारत के पहले गवर्नर जनरल बन जाते. इसलिए पाकिस्तान को 14 अगस्त 1947 को ही सत्ता सौंपना ठीक था, जब वो भारत के Viceroy थे . लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि पाकिस्तान को अपनी आज़ादी 14 अगस्त को मिली क्योंकि The Indian Independence Act इसकी मंजूरी नहीं देता."

अब आप देखिए कि ये कितना बड़ा विरोधाभास है कि पाकिस्तान का निर्माण Viceroy Lord Mountbatten की मौजूदगी में 14 अगस्त 1947 को हुआ . लेकिन The Indian Independence Act के मुताबिक उसका निर्माण 15 अगस्त 1947 को हुआ था. 

K.K. Aziz पाकिस्तान के बड़े इतिहासकार हैं जिन्होंने आज़ादी पर पाकिस्तान के धर्मसंकट का विश्लेषण अपनी किताब में किया . पाकिस्तान के बड़े-बड़े विद्वान ही नहीं, समाचार पत्र और लेखक भी इसे लेकर भ्रमित हैं कि पाकिस्तान को आज़ादी कब मिली ? इस संबंध में हमने पाकिस्तान के अखबार Dawn का एक Article भी पढ़ा, इसमें लिखा है कि 

"14 अगस्त 1947 को एक स्वतंत्र मुस्लिम राज्य के रूप में पाकिस्तान का निर्माण हुआ . लाहौर, कराची और पेशावर रेडियो स्टेशन्स से कुरान का पाठ हुआ और फिर रात 12 बजे के बाद आज़ादी की घोषणा हुई . पाकिस्तान की जनता के नाम मोहम्मद अली जिन्ना का बधाई संदेश On Air किया गया . ये पाकिस्तान बनने के बाद स्वतंत्रता पर जिन्ना की पहली Radio Speech थी . Radio पाकिस्तान के पूर्व उप निदेशक अंसार नासरी ने इस भाषण का उर्दू में अनुवाद किया था . भाषण को ये कहकर प्रसारित किया गया कि 14 अगस्त 1947 को पाकिस्तान का निर्माण होने के तुरंत बाद कायद-ए-आज़म ने देश से बात की.''

इसी Article में आगे लिखा है कि Radio पाकिस्तान के पूर्व उप निदेशक अंसार नासरी ने इस नियम को ध्यान में नहीं रखा कि रात 12 बजे के बाद अगली तारीख आ जाती है . इसीलिए गलती से उन्होंने अपने अनुवाद में 15 अगस्त के बजाय 14 अगस्त कहा . 

पाकिस्तान का निर्माण मुस्लिम लीग और मोहम्मद अली जिन्ना के अहंकार का नतीज़ा है . शायद इसीलिए पाकिस्तान के कुछ लोगों ने ये सोचा कि भारत से एक दिन पहले ही, अपना स्वतंत्रता दिवस मनाकर, वो भारत से आगे निकल जाएंगे . लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ, क्योंकि अहंकार की कलम से इतिहास नहीं लिखा जा सकता है. 14 अगस्त, पाकिस्तान के अहंकार का दिवस है.. पाकिस्तान अगर चाहे तो इस तारीख को आज भी बदलकर 15 अगस्त कर सकता है. लेकिन हमें मालूम है.. वो ऐसा कभी नहीं करेगा.