ZEE जानकारी: अमेरिका ने मसूद अजहर पर कसा शिकंजा

अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के सहयोग से एक Draft Resolution तैयार किया है. और उसे United Nations Security Council में Circulate कर दिया है.

ZEE जानकारी: अमेरिका ने मसूद अजहर पर कसा शिकंजा

आज सबसे पहले हम भारत की सुरक्षा और कूटनीतिक विजय से जुड़ी एक बड़ी ख़बर का विश्लेषण करेंगे. एक पुरानी कहावत है कि जब सीधी उंगली से घी न निकले, तो उंगली टेढ़ी करनी पड़ती है. पाकिस्तान के प्रिय आतंकवादी और चीन के चहेते, मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए.. अमेरिका ने अपनी उंगली टेढ़ी कर ली है. 

ख़बर ये है, कि अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के सहयोग से एक Draft Resolution तैयार किया है. और उसे United Nations Security Council में Circulate कर दिया है. अमेरिका चाहता है, कि मसूद अज़हर के मुद्दे पर सुरक्षा परिषद में एक Public Voting हो. और इसी Voting के आधार पर ये तय किया जाए, कि पुलवामा हमले के लिए ज़िम्मेदार जैश ए मोहम्मद के इस आतंकवादी को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया जाए या नहीं.

आपने आज सुबह से ही इस ख़बर के बारे में सुना होगा या Social Media पर इसके बारे में पढ़ा होगा. लेकिन, अब तक आपको ये समझ में नहीं आया होगा, कि ये Draft Resolution है क्या ? और क्या सिर्फ Public Voting की मदद से, मसूद अज़हर पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई हो सकती है. आज हमने इस महत्वपूर्ण ख़बर को आपके लिए बेहद सरल भाषा में Decode किया है. ताकि आप आसानी से पूरी ख़बर समझ सकें. इसे गहराई से समझाने के लिए आपको Flashback में लेकर चलते हैं.

पुलवामा हमले के 13 दिन बाद, 27 फरवरी 2019 को फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने सुरक्षा परिषद के Resolution 1267 के तहत मसूद अज़हर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव रखा था.

13 मार्च 2019 को सुरक्षा परिषद में इस विषय पर चर्चा हुई. 

लेकिन, फैसले की Deadline से ठीक एक घंटे पहले, चीन ने भारत की पीठ में छुरा घोंप दिया. 

दो हफ्ते पहले मसूद अज़हर को Global Terrirost घोषित किए जाने के पक्ष में 15 में से 14 देशों ने अपना समर्थन दिया. लेकिन, अकेले चीन की वजह से ये प्रस्ताव पारित नहीं हो पाया. क्योंकि, चीन ने Technical Hold लगा दिया. 

Technical Hold का मतलब ये हुआ, कि अगले 6 महीने तक United Nations मसूद अज़हर पर कार्रवाई नहीं कर पाएगा. 

सुरक्षा परिषद को दिए अपने नोट में चीन ने कहा है कि वो मसूद अज़हर पर प्रतिबंध लगाने की अपील को समझने के लिए और समय चाहता है.

सुरक्षा परिषद में लाया गया Resolution, Sanctions के मुक़ाबले थोड़ा कम कारगर होता है. लेकिन, इसे सुरक्षा परिषद में पास कराना, Sanctions Committee के मुक़ाबले आसान होता है. 

सुरक्षा परिषद के ज़रिए किसी संस्था या व्यक्ति पर प्रतिबंध लगाने के लिए आम राय बनानी पड़ती है. और सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य देशों को इस पर मंजूरी देनी होती है. 

जबकि, Resolution के लिए, 15 में से सिर्फ 9 देशों की सहमति अनिवार्य होती है. 

अमेरिका द्वारा बनाया गए Draft Resolution को, Sanctions की तर्ज पर ही बनाया गया है. और उसे उतना ही धारदार रखा गया है. 

संयुक्त राष्ट्र से पास कराया गया कोई Resolution, United Nations के सभी सदस्य देशों की औपचारिक राय होती है. इसके आम तौर पर दो हिस्से होते हैं.

पहला - Preamble यानी प्रस्तावना
और दूसरा होता है - Operative Part..यानी मुख्य हिस्सा. 

प्रस्तावना में आम तौर पर इस बात का ज़िक्र होता है, कि किस आधार पर कार्रवाई की गई या राय रखी गई. 

जबकि, मुख्य हिस्से में ये बताया जाता है, कि Resoultion पास होने के बाद क्या कदम उठाया जाएगा ?

हालांकि, ये प्रस्ताव तभी पास हो पाएगा, जब सुरक्षा परिषद के 5 स्थाई सदस्य देशों में से कोई भी देश इस प्रस्ताव के खिलाफ Veto का इस्तेमाल ना करे. 

इसका मतलब ये हुआ, कि चीन इस प्रस्ताव के खिलाफ भी Veto कर सकता है. लेकिन, इस प्रस्ताव को Technical Hold के नाम पर फंसा नहीं सकता. 1946 से लेकर अब तक संयुक्त राष्ट्र में 206 बार Veto का इस्तेमाल किया गया है.

सुरक्षा परिषद की Sanctions Committee में जो भी कार्रवाई होती है, वो बंद कमरों में होती है. 

लेकिन, अमेरिका द्वारा लाए गये प्रस्ताव पर Public Voting होगी. यानी सबकुछ सार्वजनिक तौर पर होगा. और ऐसी स्थिति में अगर चीन Veto का इस्तेमाल करता है, तो वो पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ जाएगा. और आतंकवाद के खिलाफ उसका दोहरा चरित्र पूरी दुनिया में Expose हो जाएगा. 

ये Voting कब होगी, अभी इस पर जानकारी उपलब्ध नहीं है. लेकिन, अगर Voting के ज़रिए इस प्रस्ताव को पास कर दिया जाता है. और चीन विरोध नहीं करता. तो मसूद अज़हर पर वैसे ही प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे, जैसा कि Sanctions Committee के माध्यम से लगाने की कोशिश हो रही थी. 

उदाहरण के तौर पर, मसूद अज़हर और जैश-ए-मोहम्मद के सभी बैंक खाते सीज़ किए जा सकेंगे. 
उसकी सभी संपत्तियों पर सरकार का क़ब्ज़ा हो सकेगा.
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े देशों के लोग उसकी किसी भी तरह की मदद नहीं कर पाएंगे. 
कोई देश मसूद अज़हर या उसके संगठन को हथियार भी नहीं दे पाएगा.
इसके अलावा मसूद अज़हर पर Travel Ban भी लग जाएगा.

हालांकि, चीन को अमेरिका द्वारा लाए गए Resolution पर भी ऐतराज़ है. आज उसने अमेरिका पर संयुक्त राष्ट्र को कमज़ोर करने का आरोप लगाया है. और कहा है, कि मसूद अजहर को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के लिए अमेरिका जबरदस्ती प्रस्ताव लाने की कोशिश कर रहा है. और इससे ये मुद्दा और उलझ जाएगा.

इस बीच पाकिस्तान पुलवामा हमले के मुद्दे पर धोखेबाज़ी वाला खेल, खेल रहा है. 

पुलवामा हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी संगठनों के 22 Camps की सटीक Location उसके साथ Share की थी. 

लेकिन इसके जवाब में आज पाकिस्तान ने ये कहा है, कि उसने इन सभी इलाकों में जाकर जांच की. और पाकिस्तान की Investigation Team ने ये पाया, कि उन सभी 22 स्थानों पर एक भी Terror Camp मौजूद नहीं है. 

भारत ने 27 फरवरी को दिल्ली में पाकिस्तान के Acting High Commissioner को एक Dossier दिया था. जिसमें पुलवामा हमले में जैश ए मोहम्मद का हाथ होने के सबूत दिए गए थे. इस Dossier में जैश के अलग-अलग Terror Camps और उसके आतंकवादियों से जुड़े सबूत भी शामिल थे. 

पाकिस्तान का दावा है, कि उसने Dossier मिलते ही तत्काल प्रभाव से एक जांच टीम का गठन किया. और पुलवामा हमले के मामले में 54 लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की. 

लेकिन, आज पाकिस्तान ने ये दावा किया है, कि इन सभी 54 लोगों का पुलवामा हमले से सीधे-सीधे कोई लेना-देना नहीं है.

इसे आप पाकिस्तान का Cover UP भी कह सकते हैं. दुनिया को भ्रमित करने के लिए पाकिस्तान ने भारत से और सबूत मांगे हैं. साथ ही उसने ये भी कहा है, कि अगर भारत उससे गुज़ारिश करे, तो भारत को इन जगहों का दौरा करने और निरीक्षण करने की इजाजत दी जा सकती है.

पाकिस्तान के विदेश मंत्री कहते हैं, मसूद अज़हर पाकिस्तान में है और बहुत बीमार है. पाकिस्तान के अधिकारी उसके संपर्क में हैं. 

पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता कहते हैं, कि उनके देश में जैश ए मोहम्मद का नामों निशान नहीं है.

और अब इमरान ख़ान कहते हैं, कि पाकिस्तान की सरकार जैश के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. 

भारत से सबूत मांगने वाले पाकिस्तान को ये तीनों ही लोग खुद ही Expose कर रहे हैं. और रही सही कसर आज हम पूरी कर देते
हैं. और इसमें Zee News की लाइब्रेरी का बड़ा योगदान है. हमने अपनी लाइब्रेरी से तमाम सबूत निकाल लिये हैं.

20 साल पहले रिहा होने के बाद मसूद अज़हर कांधार से पाकिस्तान चला गया. उस वक्त खुद पाकिस्तान की सरकार ने कहा था, कि अगर मसूद अज़हर पाकिस्तान लौटता है, तो उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. क्योंकि, पाकिस्तान में उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है. शायद इसीलिए, 20 साल पहले पाकिस्तान लौटने पर मसूद अज़हर का भव्य स्वागत किया गया था. Media Reports के मुताबिक उस वक्त पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के तत्कालीन DG, लेफ्टिनेंट जनरल Mahmud Ahmed खुद गाड़ी चलाकर उसे Receive करने पहुंचे थे. 

पाकिस्तान की सेना के प्रवक्ता को मसूद अज़हर की 19 साल पुरानी ये तस्वीर देखनी चाहिए. Indian Airlines की फ्लाइट IC814 के हाईजैक के बाद मसूद अज़हर रिहा हो गया था. कांधार से पाकिस्तान पहुंचने के बाद 9 जनवरी 2000 को मसूद अज़हर बहावलपुर पहुंचा था. उस वक्त पूरी सुरक्षा के बीच इस आतंकवादी ने रैली की थी. Road Show किया था. बंदूक लहराई थीं. और एक ज़हरीला भाषण दिया था. तब इस आतंकवादी ने पाकिस्तान की सरकार की शह पर धमकी दी थी, कि वो कश्मीर में आतंकवाद फैलाने के लिए 5 लाख लोगों को इकट्ठा करेगा. 

इसके ठीक एक हफ्ते पहले मसूद अज़हर ने पाकिस्तान की सेना और पाकिस्तान की पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच कराची में भी एक रैली की थी. क़रीब 10 हज़ार लोगों की भीड़ के बीच हुई इस रैली में, इस आतंकवादी ने पाकिस्तानी जनता से कश्मीर घाटी में जेहाद शुरु करने की अपील की थी. 

उस समय रैलियां करने के साथ साथ, मसूद अज़हर बंद कमरे में बैठकर इंटरव्यू भी दे रहा था और भारत के खिलाफ युद्ध लड़ने की धमकी दे रहा था. वो आज भी वैसा ही कर रहा है. इसलिए जो इमरान ख़ान आज मसूद अज़हर को लेकर भारत से सबूत मांग रहे हैं. वो अगर चाहें, तो ISI से संपर्क करके, मसूद अज़हर का घर ढूंढ सकते हैं. और खुद उसी से पूछ सकते हैं, कि बताओ पुलवामा हमले को किस तरह अंजाम दिया.

इमरान ख़ान को अगर इन सबूतों से भी संतुष्टि नहीं मिलती है. तो वो जैश ए मोहम्मद की Online Magazine अल-कलाम की Website पर जाकर भारत विरोधी और Zee News विरोधी लेख पढ़ सकते हैं. हमने मसूद अज़हर और जैश का पूरा सच दुनिया के सामने Expose किया है. शायद तभी वो हमसे इतनी नफरत करता है. और अपने लेख में Zee News का नाम लेकर...आपके पसंदीदा शो DNA का नाम लेकर....हमें सबक सिखाने की धमकी देता है. सच तो ये है, कि पाकिस्तान अपनी आतंकी सोच का सच दुनिया के सामने आने ही नहीं देना चाहता.

इसका छोटा सा उदाहरण ये है, कि बालाकोट में 26 फरवरी को भारतीय वायुसेना के Air Strikes के बाद पूरे इलाके को पाकिस्तान की सेना और वहां के सुरक्षाबलों ने घेर लिया. पाकिस्तान की सेना जब दुनियाभर के पत्रकारों को लेकर बालाकोट पहुंची थी, तो उन्हें भी उतना ही दिखाया गया, जितना वहां की फौज दिखाना चाहती थी. उन्हें टूटे हुए पेड़ दिखाए गए. Air Strikes के बाद ज़मीन पर गिरा मलबा दिखाया गया. लेकिन सच क्या था...आज आप ये भी जान लीजिए.

खुफिया एजेंसियों के मुताबिक, बालाकोट में भारत की कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने PoK में मौजूद 4 Terror Camps को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया है. 

पाकिस्तान ने निकयाल और कोटली इलाक़े में मौजूद लश्कर और जैश के आतंकियों से कहा है, कि वो अपने Camps को Line Of Control से दूर रखें .

आतंकियों के कई Camps, पाकिस्तानी सेना के Camps में शिफ्ट किये जा रहे हैं. और इन Camps के बाहर पाकिस्तानी सेना का कड़ा पहरा लगा दिया गया है. 

इसके अलावा पाकिस्तान ने अपने आतंकवादियों को पाकिस्तान की सेना की वर्दी पहनने के निर्देश दिए हैं. क्योंकि, अगर वो पाकिस्तानी सेना की यूनिफार्म में होंगे, तो ये पहचान पाना मुश्किल होगा कि कौन आतंकवादी है और कौन पाकिस्तानी सेना का जवान है.

हमें लगता है, पाकिस्तान के लिए इतने सबूत काफी हैं. और अगर उन्हें और सबूत चाहिए, तो हम आने वाले दिनों में Zee News की लाइब्रेरी की मदद से उनकी मुराद पूरी करते रहेंगे.

चीन, अपने देश में उइग़र मुसलमानों पर अत्याचार करता है और वो चाहता है कि पाकिस्तान इस पर ख़ामोश रहे. चीन उइग़र मुसलमानों के मुद्दे पर पाकिस्तान का मौन समर्थन हासिल करने के लिये मसूद अज़हर के साथ खड़ा है.
पाकिस्तान भले ख़ामोश हो...लेकिन उइग़र मुसलमानों के मुद्दे पर चीन को अब चुनौती मिल रही है. अमेरिका के विदेश मंत्री Mike Pompeo ने चीन के दोहरे चरित्र पर सवाल उठाये हैं.

उन्होंने लिखा है कि चीन एक तरफ अपने यहां लाखों मुसलमानों का उत्पीड़न करता है. लेकिन दूसरी तरफ़ हिंसक इस्लामी आतंकवादी संगठनों को संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों से ‘बचाता’ है.
Pompeo का इशारा चीन के उस पक्षपात की तरफ़ था जिसने आतंकी मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किये जाने से बचा लिया.
Pompeo ने लिखा है कि - दुनिया, अब मुसलमानों के प्रति, चीन के शर्मनाक पाखंड को बर्दाश्त नहीं कर सकती.

अमेरिका के विदेश मंत्री ने बुधवार को कुछ उइग़र मुसलमानों से भी मुलाक़ात की. ये वो लोग थे जो चीन के दमन से बचने के लिये किसी तरह वहां से निकलने में कामयाब रहे हैं.
Mike Pompeo ने कहा है कि चीन अप्रैल 2017 से अपने पश्चिमी प्रांत शिनजियांग में उइग़र मुसलमानों पर अत्याचार कर रहा है.

चीन ने ऐसे कैंप बनाये हैं जहां 10 लाख से ज़्यादा उइग़र मुसलमानों को नज़रबंद करके रखा गया है. अमेरिका ने इन सभी लोगों को तुरंत रिहा करने की मांग की है. ये अमेरिका की तरफ़ से.. चीन के लिए सबसे कड़वी कूटनीतिक दवाई है. 

वैसे इस कड़वी दवा की डोज़ पाकिस्तान को भी दिये जाने की ज़रूरत है. जो पाकिस्तान ख़ुद को इस्लामिक दुनिया का मसीहा बताता है. जो पाकिस्तान, कश्मीर में आतंकवाद फैलाकर, उसे इस्लामिक क्रांति बताता है. वही पाकिस्तान आज उइग़र मुसलमानों पर किये जा रहे चीन के ज़ुल्म पर ख़ामोश है...पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक अंतर्राष्ट्रीय अखबार को दिए इंटरव्यू में कहा है कि उन्हें ये भी नहीं पता कि उइग़र मुसलमानों का मुद्दा क्या है...और उइगर मुसलमानों के साथ चीन में क्या बर्ताव हो रहा है. इमरान ख़ान का ये इंटरव्यू साबित करता है कि इस्लाम के नाम पर पाकिस्तान कैसे पूरी दुनिया के मुसलमानों के साथ सबसे बड़ा धोखा कर रहा है.