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Zee Jankari: इमरान खान के 'इस्लामिक एजेंडे' पर 'मोदी ग्रहण' का विश्लेषण

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दो दिनों के दौरे पर हैं. जहां उन्होंने सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ अल सऊद से मुलाकात की 

Zee Jankari: इमरान खान के 'इस्लामिक एजेंडे' पर 'मोदी ग्रहण' का विश्लेषण

चीन की राष्ट्रवाद वाली नीति के बाद अब हम...भारत की अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति का विश्लेषण करेंगे जिसके केंद्र में भारत और सऊदी अरब की मजबूत होती दोस्ती है. बहुत सारे लोगों को लगता है कि सऊदी अरब एक तेल उत्पादक मुस्लिम देश है और भारत के साथ उसके रिश्ते सिर्फ तेल की खरीददारी तक सीमित हैं. लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि जिस सऊदी अरब से 1300 वर्ष पहले आए...मोहम्मद बिन क़ासिम ने भारत को लूटने की योजना बनाई थी . आज वहीं सऊदी अरब कैसे भारत के साथ रणनीतिक, व्यापारिक और सामाजिक साझेदारी की नई मिसाल स्थापित करने के लिए बेताब है.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के दो दिनों के दौरे पर हैं. जहां उन्होंने सऊदी अरब के राजा सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ अल सऊद से मुलाकात की . और वो सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से भी मुलाकात करेंगे. सऊदी अरब फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है जबकि भारत तेल की खपत के मामले में दुनिया में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे नंबर पर है. Directorate General of Commercial Intelligence and Statistics के मुताबिक भारत अपने कुल तेल का 25 प्रतिशत इराक से खरीदता है जबकि 18 प्रतिशत के साथ दूसरे नंबर पर सऊदी अरब है.

भारत 32 प्रतिशत LPG भी सऊदी अरब से लेता है. लेकिन भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापार का असंतुलन बहुत बड़ा है. भारत और सऊदी अरब के बीच करीब 1 लाख 90 हज़ार करोड़ रुपये का व्यापार होता है लेकिन इसमें से भारत सऊदी अरब से करीब 1 लाख 56 हज़ार करोड़ रुपये का आयात करता है और इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी तेल और गैस की ही है.

जबकि भारत सऊदी अरब को सिर्फ 42 हज़ार करोड़ रुपये का सामान बेचता है. प्रधानमंत्री मोदी चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच इस व्यापार असंतुलन को कम किया जाए और सऊदी अरब भारत में ज्यादा से ज्यादा निवेश करें. सऊदी अरब भी भारत में 100 बिलियन डॉलर्स यानी करीब 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश का इच्छुक है. लेकिन इसके लिए दोनों देशों को मिलकर एक मजबूत RoadMap तैयार करना होगा. आज प्रधामंत्री मोदी ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में Future Investment Initiative Forum यानी FII को भी संबोधित किया और भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापारिक रिश्तों को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई.

पहले आप प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की कुछ बड़ी बातें सुनिए...फिर हम आपको बताएंगे कि 1300 वर्ष पहले.. भारत पर कब्ज़ा करने का सपना देखने वाला मुस्लिम देश सऊदी अरब.. आज कैसे पाकिस्तान के नहीं बल्कि भारत के हितों की बात कर रहा है और कैसे भारत की कूटनीति ने पाकिस्तान को मुस्लिम देशों के बीच अलग थलग कर दिया है. प्रधानमंत्री मोदी का सऊदी अरब का ये दौरा कई मायनों में बहुत महत्वपूर्ण है. प्रधानमंत्री मोदी ने जिस Future Investment Initiative Forum को संबोधित किया उसे Davos in the Desert यानी रेगिस्तान का Davos भी कहा जाता है. स्विटज़रलैंड के Davos में हर साल World Economic Forum की बैठक होती है..जहां विश्व के आर्थिक रूप से शक्तिशाली देश और बड़ी बड़ी कंपनियां हिस्सा लेती हैं. और भारत अब हर ऐसे मंच का हिस्सा है .जहां दुनिया के बड़े बड़े देशों की बातें सुनी जाती हैं.

FII में प्रधानमंत्री मोदी के अलावा ब्राज़ील के राष्ट्रपति Jair Bolsonaro (जायर बोलसोनारो ) और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार और उनके दामाद Jared Kushner (जैरेड कुशनर) के अलावा दुनिया के कई बड़े नेता और कई बड़ी कंपनियों के अधिकारी शामिल हुए. प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे की दूसरी महत्वपूर्ण बात ये है कि सऊदी अरब और भारत के बीच जल्द ही Strategic Partnership Council यानी SPC की स्थापना हो सकती है .

अगर ऐसा होता है तो सऊदी अरब के साथ रणनीतिक साझेदारी करने वाला भारत चौथा देश बन जाएगा. इससे पहले सऊदी अरब ... ब्रिटेन, फ्रांस और चीन के साथ मिलकर SPC की स्थापना कर चुका है . इस दौरे से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने सऊदी अरब के प्रमुख अखबार Arab News को एक इंटरव्यू दिया .

इस इंटरव्यू में उन्होंने ने कहा है दोनों देशों के रिश्ते सिर्फ ऊर्जा की खरीददारी तक सीमित नहीं हैं. बल्कि रक्षा, Infrastructure, तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं. सऊदी अरब में करीब 30 लाख भारतीय रहते हैं जिनका संबंध सीधे तौर पर सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था के विकास से है. इसलिए एक मुस्लिम देश होते हुए भी सऊदी अरब कश्मीर जैसे मुद्दों पर खुलकर भारत का समर्थन कर रहा है . प्रधानमंत्री मोदी ने Arab News को दिए अपने इंटरव्यू में सऊदी अरब में रहने वाले भारतीयों की भी प्रशंसा की और कहा कि इन भारतीयों ने भी दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत करने की दिशा में बहुत योगदान दिया है.

प्रधानमंत्री मोदी और सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान वर्ष 2016 से लेकर अब तक 5 बार एक दूसरे से मुलाकात कर चुके हैं. वर्ष 2016 में जब प्रधानमंत्री पहली बार सऊदी अरब के दौरे पर गए थे..तब उनका वहां शानदार स्वागत हुआ था और उन्हें सऊदी अरब के सबसे बड़े नागरिक सम्मान Order of King Abdulaziz से सम्मानित किया गया था . इसके बाद जब फरवरी 2019 में मोहम्मद बिन सलमान..भारत आए तो प्रधानमंत्री मोदी ने प्रोटोकॉल तोड़कर...एयरपोर्ट पर जाकर उनका स्वागत किया था .

ये तस्वीरें इस बात का प्रमाण है कि सऊदी अरब और भारत के रिश्ते पहले के मुकाबले बहुत मजबूत हुए हैं और एक मुस्लिम देश होते हुए भी सऊदी अरब भारत के साथ अपने रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है. यहां ये तथ्य भी जान लेना चाहिए कि सऊदी अरब और पाकिस्तान के रिश्ते भी काफी मजबूत रहे हैं और पाकिस्तान को सऊदी अरब से ना सिर्फ आर्थिक मदद मिलती रही है बल्कि कश्मीर जैसे मुद्दों पर भी सऊदी अरब ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया है.

लेकिन पिछले 5 वर्षों में ये कहानी पूरी तरह पलट चुकी है और अब सऊदी अरब कश्मीर पर ऐसा कोई बयान नहीं देता जो भारत के हित में ना हो और जो भारत और सऊदी अरब के रिश्तों को चोट पहुंचाने की क्षमता रखता हो . सऊदी अरब को सबसे प्रभावशाली मुस्लिम देश माना जाता है..

.सऊदी अरब ना सिर्फ दुनिया भर के मुस्लामानों के लिए धार्मिक केंद्र है बल्कि दुनिया की कूटनीति में उसकी हैसियत भी बहुत मजबूत मानी जाती है. लेकिन सिर्फ सऊदी अरब ही नहीं बल्कि दुनिया के कई बड़े मुस्लिम देश भारत के साथ संबंधों को बेहतर करने पर ज़ोर दे रहे हैं और यही वजह है कि कश्मीर के मुद्दे पर टर्की और मलेशिया को छोड़कर ज्यादातर मुस्लिम देशों ने पाकिस्तान का साथ नहीं दिया है.

मुस्लिम देशों के बीच भारत का प्रभाव कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अब तक 6 मुस्लिम देश..प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार से सम्मानित कर चुके हैं. आज के दौर में भारत को जितनी ज़रूरत मुस्लिम देशों की है...उससे कहीं ज्यादा...मुस्लिम देशों को भारत की ज़रूरत है. खासकर सऊदी अरब और UAE जैसे देश..तेल के निर्यात पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं और इसके लिए वो भारत जैसे देशों के साथ व्यापारिक और आर्थिक संबंधो को मजबूत करने पर ज़ोर दे रहे हैं.