एक मजबूर EVM की आत्मकथा: 5000 साल पुरानी सभ्‍यता और 23 मई का विकट दिन

चुनाव आयोग ने लंबी प्रक्रिया के बाद लाखों की संख्या में मुझे तैयार कराया. फिर सुरक्षा के चाक चौबंद उपायों के बीच मुझे जिला मुख्यालय तक भिजवाया. वहां मुझे मोटे तालों के बीच अंधेरे कमरों में रख दिया गया. उस अंधेरे में मैं सोचती थी कि खुद अंधेरे में रहकर मैं लोकतंत्र का उजाला कैसे फैलाऊंगी. लेकिन यही जमाने की रीत है...

एक मजबूर EVM की आत्मकथा: 5000 साल पुरानी सभ्‍यता और 23 मई का विकट दिन

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