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लोकसभा चुनाव 2019: आंवला में क्या BJP इस बार मार पाएगी हैट्रिक ?

आंवला यूपी का 24वां लोकसभा क्षेत्र है. इसे ये नाम इसलिए मिला क्योंकि यहां आंवला के पेड़ बहुतायत में मिलते हैं.

लोकसभा चुनाव 2019: आंवला में क्या BJP इस बार मार पाएगी हैट्रिक ?
इस बार बीजेपी के सामने सीट बचाने की चुनौती है.

नई दिल्ली: 17वीं शताब्दी की शुरुआत में आंवला में रुहेलों ने राज किया, तब ये शहर रूहेलखंड रियासत की राजधानी हुआ करता था. उत्तर प्रदेश की आंवला लोकसभा सीट पर अभी बीजेपी का कब्जा है. यूपी में इस बार दो बड़ी पार्टी सपा और बसपा के गठबंधन के बाद यहां मुकाबला और भी रोचक हो गया है. 2014 में यहां बीजेपी अपना कमल खिलाने में सफल हुई थी. इस बार बीजेपी के सामने सीट बचाने की चुनौती है. आंवला यूपी का 24वां लोकसभा क्षेत्र है. इसे ये नाम इसलिए मिला क्योंकि यहां आंवला के पेड़ बहुतायत में मिलते हैं.

साल 2014 में क्या था समीकरण
साल 2014 के चुनाव में बीजेपी ने ये सीट समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को 1,38,429 वोटों से हराकर हासिल की थी. साल 2014 में यहां पर सपा दूसरे नंबर पर, बसपा तीसरे और कांग्रेस चौथे नंबर पर रही थी. साल 2014 में यहां पर 16,53,577 मतदाताओं ने हिस्सा लिया.

 

क्या है राजनीतिक इतिहास
आंवला में पहली बार 1962 में लोकसभा के आम चुनाव हुए और हिन्दू महासभा दल के ब्रिज लाल सिंह यहां के पहले सांसद बने. साल 1967 में कांग्रेस ने यहां अपना खाता खोला और लगातार 2 बार इस सीट पर जीती. इस दौरान सावित्री श्याम यहां की सांसद रहीं और 10 सालों तक आंवला का प्रतिनिधित्व किया. साल 1984 में कांग्रेस ने इस क्षेत्र में दोबारा जीत हासिल की और कांग्रेस नेता कल्याण सिंह सोलंकी यहां के सांसद की कुर्सी पर बैठे. साल 1984 के बाद से ही यहां कांग्रेस वापसी को तरस रही है. साल 1989 और 1991 में बीजेपी लगातार दो बार यहां से जीती. साल 1996 के चुनाव में बीजेपी को यहां झटका लगा और क्षेत्रीय दल समाजवादी पार्टी विजय होकर सामने आई. साल 2004 में जनता दल (यू) के टिकट पर सर्वराज सिंह संसद तक पहुंचे. पिछले दो बार से लगातार बीजेपी यहां कमव खिलाने में सफल रही है. साल 2009 में मेनका गांधी और 2014 में बीजेपी के धर्मेंद्र कुमार कश्यप जीतकर संसद तक पहुंचे.