लोकसभा चुनाव 2019: खजुराहो में जीतने को बेचैन है कांग्रेस, 20 सालों से है BJP का राज
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लोकसभा चुनाव 2019: खजुराहो में जीतने को बेचैन है कांग्रेस, 20 सालों से है BJP का राज

खजुराहो से उमा भारती ने 4 लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज कराई थी और इसी सीट से जीत हासिल कर वह संसद तक पहुंची थीं.

लोकसभा चुनाव 2019: खजुराहो में जीतने को बेचैन है कांग्रेस, 20 सालों से है BJP का राज

खजुराहोः मध्य प्रदेश की खजुराहो लोकसभा सीट प्रदेश की उन सीटों में से एक है, जहां BJP का बोलबाला रहा है. इस सीट से सांसद रहे नागेंद्र सिंह ने भारी मतों के अंतर से 2014 में इस सीट पर जीत दर्ज कराई थी, लेकिन 2018 के विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रत्याशी न मिलने पर बीजेपी ने नागेंद्र सिंह को ही विधानसभा के चुनावी मैदान में उतारने का निर्णय लिया और नागेंद्र सिंह ने यहां भी अपनी शानदार जीत दर्ज कराई, लेकिन इसके बाद से यह सीट खाली पड़ी है. बता दें खजुराहो भाजपा की दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की जीत का गवाह माना जाता है. खजुराहो से उमा भारती ने 4 लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज कराई थी और इसी सीट से जीत हासिल कर वह संसद तक पहुंची थीं.

2014 के राजनीतिक समीकरण
2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशी नागेंद्र सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी राजा पटेरिया को 2,47,490 वोटों के अंतर से करारी मात दी थी. 2014 के लोकसभा चुनाव में जहां नागेंद्र सिंह को 4,74,966 वोट मिले तो वहीं राजा पटेरिया को 2,27,476 वोट मिले. वहीं 6 फीसदी वोटों के साथ बसपा यहां तीसरे नंबर की पार्टी रही.

राजनीतिक इतिहास
खजुराहो के राजनीतिक इतिहास की बात की जाए तो साल 1957 और 1962 के लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस ने जीत दर्ज कराई थी, लेकिन 1977 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां लोकदल के लक्ष्मीनारायण नायक ने जीत हासिल की और यहां के सांसद बने. हालांकि 1980 में कांग्रेस ने वापसी की और फिर 1984 में भी कांग्रेस ही इस रेस में अव्वल रहा, लेकिन 1989 में खजुराहो लोकसभा सीट से उमा भारती ने जीत हासिल की. इसके बाद 1990 में कांग्रेस ने फिर वापसी की, लेकिन उमा भारती ने 2004 के चुनाव में फिर भाजपा ने वापसी की और तब से लेकर अब तक इस सीट पर भाजपा का ही कब्जा है.

सांसद का रिपोर्ट कार्ड
नागेंद्र सिंह को उनके निर्वाचन क्षेत्र के विकास के लिए 22 करोड़ का फंड दिया गया, जिसमें से उन्होंने 17 करोड़ से कुछ अधिक की राशि विकास कार्यों पर खर्च कर दिए. जबकि 5 करोड़ के करीब का फंड बिना खर्च किए रह गया. वहीं संसद में नागेंद्र सिंह की उपस्थिति 81 प्रतिशत रही, जिसमें उन्होंने 7 डिबेट में हिस्सा लिया.

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