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महाराष्ट्र: कांग्रेस-एनसीपी के इस गढ़ में 2014 में लगी थी सेंध, इस बार भी शरद पवार की प्रतिष्ठा है दांव पर

2014 के चुनाव में एनसीपी ने बारामती, सातारा, कोल्हापुर, माढा इन 4 सीटों पर कब्जा किया था. शिवसेना को 2 सीट मिली थीं. शिरूर और मावल सीट पर शिवसेना ने कब्जा किया था. बीजेपी को 3 (सोलापुर, पुणे और सांगली) सीट मिली थी. उस वक्त बीजेपी की सहयोगी रहे राजू शेट्टी की 'स्वाभिमानी शेतकरी संघटना' ने हातकणंगले सीट पर कब्जा किया था.

महाराष्ट्र: कांग्रेस-एनसीपी के इस गढ़ में 2014 में लगी थी सेंध, इस बार भी शरद पवार की प्रतिष्ठा है दांव पर
अमरावती में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते एनसीपी प्रमुख शरद पवार (फोटो साभार: ANI)

मुंबई: पश्चिम महाराष्ट्र में इस बार एनसीपी नेता शरद पवार की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है. शुगर इंडस्ट्री के रूप में प्रसिद्ध इस क्षेत्र में लोकसभा की 10 सीट हैं. आपको बता दें कि कांग्रेस-एनसीपी के इस गढ़ में बीजेपी ने 2014 में सेंध लगा दी थी. कहा जाता है कि जिस पार्टी की सीट पश्चिम महाराष्ट्र में ज्यादा आती है वही महाराष्ट्र में राज करता है. पश्चिम महाराष्ट्र, महाराष्ट्र की राजनीति मे निर्णायक भूमिका निभाता है. राष्ट्रीय नेता शरद पवार और सुशील कुमार शिंदे पश्चिम महाराष्ट्र से ही आते हैं. महाराष्ट्र का सबसे समृद्ध माने जाने वाले पश्चिम महाराष्ट्र से इस बार ज्यादा सीट कौन लेकर जाएगा उस पर सबकी नजर है. इस खास रिपोर्ट में देखिए इस बार क्या है पश्चिम महाराष्ट्र का चुनावी समीकरण...

2014 के चुनावों में एनडीए को मिली थीं 6 सीटें
पश्चिम महाराष्ट्र में पुणे, बारामती, मावल, शिरूर, सातारा, सांगली, कोल्हापुर, हातकणंगले, सोलापुर और माढा सहित कुल 10 लोकसभा सीटें हैं. 2014 के चुनाव में एनसीपी ने बारामती, सातारा, कोल्हापुर, माढा इन 4 सीटों पर कब्जा किया था. शिवसेना को 2 सीट मिली थीं. शिरूर और मावल सीट पर शिवसेना ने कब्जा किया था. बीजेपी को 3 (सोलापुर, पुणे और सांगली) सीट मिली थी. उस वक्त बीजेपी की सहयोगी रहे राजू शेट्टी की 'स्वाभिमानी शेतकरी संघटना' ने हातकणंगले सीट पर कब्जा किया था. राजू शेट्टी उस वक्त सांसद बने थे लेकिन इस बार वह कांग्रेस-एनसीपी के गठबंधन के साथ हैं.

महाराष्ट्र की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है यह इलाका
कुल मिलाकर देखें तो बीजेपी ने पश्चिम महाराष्ट्र यानी कांग्रेस-एनसीपी के गढ़ में 2014 में सेंध लगाई थी. बीजेपी सेना का परफॉर्मेंस अच्छा रहा जिस वजह से पहली बार ऐसा हुआ कि 2014 में 10 सीट में से बीजेपी गठबंधन को 6 सीट मिली थी. आपको बता दें कि पश्चिम महाराष्ट्र कांग्रेस और एनसीपी का परंपरागत गढ़ रहा है. वेस्टर्न महाराष्ट्र महाराष्ट्र की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाता है. देश की राजनीति के सबसे पावरफुल नेता शरद पवार इसी क्षेत्र से आते हैं. यही नहीं महाराष्ट्र के ज्यादातर सीएम इसी क्षेत्र से रहे हैं. इसी क्षेत्र से आने वाले यशवंतराव चव्हाण, वसंतदादा पाटिल, शरद पवार, सुशील शिंदे और पृथ्वीराज चव्हाण महाराष्ट्र के सीएम रह चुके हैं.

क्षेत्र में क्या है मशहूर
- सबसे ज्यादा श्क्कर के कारखाने यहां हैं
- यहां की शुगर लॉबी पावरफुल है
- पश्चिम महाराष्ट्र में शुगर लॉबी डिसाइडिंग फैक्टर है
- देश का ऑटो क्लस्टर है
- पंजाब के बाद देश का सबसे ज्यादा एग्रीकल्चरल प्रॉस्परस बेल्ट है
- शुगर कोऑपरेटिव भी यहीं है
- एनसीपी को 2014 में पूरे महाराष्ट्र से 4 सीट मिलीं और यहीं से वह सीट मिलीं
- महात्मा ज्योतिबा फुले, गोपाल गणेश आगरकर, राजश्री साहु महाराज इसी क्षेत्र से आते थे
- लोकमान्य तिलक के नेतृत्व में स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा यहीं से दी गयी थी
- सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक और शैक्षणिक मूवमेंट के लिए यह क्षेत्र जाना जाता है

शरद पवार की राजनीति पर होगा सीधा असर
पश्चिम महाराष्ट्र में बीजेपी ने ज्यादा सीट जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. मंत्री चंद्रकांत पाटिल ने खुद यहां डेरा डाल रखा है और हर सीट पर अपनी पैनी नजर बनाकर रखे हुए हैं. बीजेपी को पूरा भरोसा है कि बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को इस बार पहले की अपेक्षा ज्यादा सीटें मिलेंगी और इस क्षेत्र मे वह एकक्षत्र राज्य करेंगे. राजनीतिक जानकारों की मानें तो बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कांग्रेस-एनसीपी के गढ़ में लगाए गए सेंध को बरकरार रखना और इसके लिए बीजेपी ने इस क्षेत्र पर ज्यादा ध्यान भी दिया है. यहां सफलता का मतलब है कि शरद पवार को राजनीतिक रूप से डैमेज करना.

आइए नजर डालते हैं कि पश्चिम महाराष्ट्र की लोकसभा सीटों पर कौन उम्मीदवार कहां से चुनाव लड़ रहा है और वहां की राजनीतिक स्थिति क्या है...

पुणे
पुणे सिटी से बीजेपी की टिकट पर गिरीश बापट का मुकाबला कांग्रेस के मोहन जोशी से है. गिरीश बापट राज्य में मंत्री भी हैं. कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली पुणे लोकसभा सीट से भाजपा ने अपने मौजूदा सांसद अनिल शिरोले का टिकट काट दिया है. जबकि कांग्रेस ने भी 2014 के चेहरे को बदल दिया है. इस वजह से यहां दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है. चुनाव प्रचार में स्थानीय मुद्दे हावी हैं. पश्चिमी महाराष्ट्र का यह लोकसभा सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता था. लेकिन 2014 में मोदी लहर में भाजपा के अनिल शिरोले ने यहां से कांग्रेस के विश्वजीत कदम को हराया था. शिरोले 2014 में तीन लाख से अधिक मतों से विजयी हुए थे.

बारामती
बारामती में शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले का मुकाबला बीजेपी के कांचन कुल से है. महाराष्ट्र की बारामती सीट लोकसभा चुनाव में काफी चर्चा में है. यह सीट देश की हाई प्रोफाइल सीट में से एक सीट है. यहां से एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले चुनाव लड़ रही हैं. 2009 से इस सीट से दो बार सांसद रही सुप्रिया एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं. उन्हे चुनौती बीजेपी की कांचन कुल दे रही हैं. यह सीट पवार परिवार के लिए इसिलए खास है क्योंकि 1991 से ही इस सीट पर पवार परिवार का कब्जा रहा है. 1991 से 2009 तक एनसीपी के अध्यक्ष शरद पवार खुद इस सीट पर सांसद रह चुके हैं. बेटी को वापस संसद पहुंचाने के लिए शरद पवार ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. बीजेपी ने अपनी कई सभाओं में बारामती की सीट का जिक्र किया है और उस दरमियान यह भी एनसीपी को चुनौती दी है कि इस बार बारामती की सीट एनसीपी को हराकर ही दम लेंगे. बीजेपी की चुनौती को एनसीपी गंभीरता से ले रही है. प्रतिष्ठा की इस सीट को बचाने के चक्कर में शरद पवार की नींद उड़ी हुई है.

मावल
मावल सीट पर शरद पवार के नाती (पौत्र) पार्थ पवार उम्मीदवार हैं. पार्थ शिवसेना के वर्तमान सांसद श्रीरंग बारने को चुनौती दे रहे हैं. पार्थ महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे हैं और पहली बार चुनाव लड़ रहे हैं. पवार परिवार की यह तीसरी पीढ़ी है जो इस बार चुनाव मैदान मे हैं. इस वजह से स्थानीय राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है. पवार का पूरा परिवार इस सीट पर पार्थ के लिए लगा हुआ है. आपको बता दें कि इस लोकसभा क्षेत्र में 22 लाख मतदाता हैं.

शिरूर
शिरूर सीट पर एनसीपी के टिकट पर अमोल कोल्हे हैं वहीं शिवसेना के टिकट पर यहां शिवाजीराव आढलराव हैं. महाराष्ट्र में पुणे जिले के तहत आने वाले शिरूर लोकसभा सीट पर तीन बार के शिवसेना सांसद शिवाजीराव आढलराव पाटिल और अभिनेता से नेता बने अमोल कोल्हे के बीच दिलचस्प मुकाबला होने वाला है. अमोल मराठी सीरियल के अभिनेता हैं और फरवरी में शिवसेना को छोड़ कर एनसीपी में इंट्री ली है. इस गढ़ में कोल्हे को उतारना एनसीपी प्रमुख शरद पवार का शिवसेना को धक्का देनेवाला कदम है क्योंकि कोल्हे अभिनेता 'स्वराजरक्षक संभाजी' धारावाहिक में छत्रपति संभाजी और 'राजा शिव छत्रपति' में छत्रपति शिवाजी महाराज की अपनी भूमिकाओं को लेकर घर-घर में जाने जाते हैं. शिरूर को पाटिल का मजबूत गढ़ माना जाता है. उन्होंने 2004 से तीन बार भारी मतों के अंतर से चुनाव जीते हैं.

सातारा
महाराष्ट्र की सातारा लोकसभा सीट ऐतिहासिक महत्व रखती है. यहां अब तक शिवाजी महाराज के वंशज की सत्ता चलती रही है. सातारा को मराठा साम्राज्य के शक्ति केंद्र के रूप में जाना जाता है. सातारा से शिवाजी महाराज के वंशज उदयनराजे भोसले सांसद हैं. इस सीट पर उदयनराजे भोसले का दबदबा है. इनका मुकाबला शिवसेना के नरेंद्र पाटील से है. नरेंद्र पाटील माथाड़ी के नेता भी हैं. वे पहले एनसीपी एमएलसी थे फिर बीजेपी और बाद में शिवसेना में आ गए.

सांगली
सांगली सीट पर बीजेपी की तरफ से संजय पाटील हैं उनका मुकाबला स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के विशाल पाटील से है जो कि पहले कांग्रेस मे थे. इनके दादा वसंतदादा पाटील 3 बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं. 1962 से 2014 के बीच 52 सालों तक लगातार कांग्रेस का शासन रहा. यहां तक की आपातकाल के बाद जब कांग्रेस अपने बुरे दिनों में थी तब भी यहां कांग्रेस का सांसद बना. कांग्रेस के तिलिस्म को मोदी लहर ने 2014 में तोड़ा जब एक कांग्रेसी संजयकाका पाटील को यहां से बीजेपी से टिकट मिला. संजय पाटील को करीब ढाई लाख वोटों से जीत मिली थी.

कोल्हापुर
कोल्हापुर सीट पर एनसीपी से धनंजय महाडिक हैं. इनका मुकाबला शिवसेना के संजय मंडलिक से है. कोल्हापुर लोकसभा सीट की विधानसभाओं पर बीजेपी-शिवसेना मजबूत स्थिति में है लेकिन सांसद यहां एनसीपी पार्टी का है. यहां पिछले बार के लोकसभा चुनावों में शिवसेना उम्मीदवार के रूप में हारे धनंजय भीमराव महाडिक ने एनसीपी पार्टी में आकर 2014 में यहां से जीत हासिल की थी. महालक्ष्मी मंदिर यहां का प्रमुख धार्मिक स्थल है. यहां की कोल्हापुरी हस्तपशिल्प बहुत प्रसिद्ध है. कोल्हापुरी चप्पलें तो देश-विदेश में मशहूर हैं. यह इलाका गुड़ के लिए भी फेमस है.

हातकणंगले
हातकणंगले सीट से स्वाभिमानी शेतकरी पक्ष के राजू शेट्टी हैं. इनका मुकाबला शिवसेना के धैर्यशील माने से है. राजू शेट्टी 2014 में एनडीए के साथ थे अब वे कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन के साथ हैं. राजु शेट्टी हमेशा किसानों के मुद्दे को उठाते रहे हैं और आंदोलन के लिए जाने जाते हैं.

माढा
माढा सीट पर एनसीपी से संजय शिंदे चुनावी मैदान में हैं. उनका मुकाबला बीजेपी के रंजीत निंबालकर से है. इस सीट पर विजय सिंह मोहित पाटील सांसद हैं. पहले इस सीट पर शरद पवार ने लड़ने की बात कही थी उसके बाद उन्होंने इस सीट पर न लड़ने का निर्णय लिया. इसके बाद विजय सिंह मोहित पाटील ने अपने बेटे को इस सीट से लड़ाने की बात शरद पवार से की लेकिन शरद पवार ने नहीं माना. उसके बाद उनके बेटे रणजीत सिंह पाटील बीजेपी में चले गए. कयास लगाए जा रहे हैं कि विजय सिंह मोहित पाटील एनसीपी को यहां से डैमेज कर सकते हैं. 

सोलापुर
सोलापुर सीट से कांग्रेस के टिकट पर सुशील शिंदे उतरे हैं. शिंदे कांग्रेस के कद्दवार नेता हैं. इन्होंने सबसे पहले हिंदु आतंकवाद की बात कही थी. बीजेपी से धार्मिक गुरू जय सिद्धेश्वर महाराज हैं. लिंगायत कम्युनिटी में इनका वर्चस्व है. इन्हें वर्तमान सांसद शरद बनसोडे का टिकट काटकर दिया गया है. भारिप बहुजन से डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के वंशज प्रकाश आंबेडकर मैदान में हैं. प्रकाश आंबेडकर का माहौल पहले के अपेक्षा काफी अच्छा है. सोलापुर सीट पर लिंगायत और दलित कम्युनिटी के वोटर्स ज्यादा हैं. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक प्रकाश आंबेडकर और सुशील शिंदे इन दोनों के लड़ने की वजह से यहां दलित कम्युनिटी के वोट का बंटवारा होगा. इस बात का फायदा सोलापुर लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार को मिल सकता है.