मुशर्रफ पर चलेगा राष्ट्रद्रोह का मुकदमा: नवाज शरीफ

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आज कहा कि पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के खिलाफ दो बार देश के संविधान का उल्लंघन करने के मामले में घोर राष्ट्रद्रोह के मुकदमा चलाया जाएगा।

इस्लामाबाद : पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने आज कहा कि पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के खिलाफ दो बार देश के संविधान का उल्लंघन करने के मामले में घोर राष्ट्रद्रोह के मुकदमा चलाया जाएगा। दोषी करार दिए जाने पर मुशर्रफ को मौत की सजा अथवा उम्रकैद हो सकती है। प्रधानमंत्री ने जिन दो मामलों का जिक्र किया है उनमें से पहला 1999 का तख्तापलट और दूसरा साल 2007 में आपातकाल लगाकर न्यायाधीशों को बख्रास्त करने का है। शरीफ ने संसद के निचले सदन नेशनल एसेंबली में यह ऐलान अपने सत्ता में लौटने के तीन सप्ताह बाद किया है। शरीफ ने संसद को बताया कि मुशर्रफ की ओर से उठाए गए कदम ‘घोर राष्ट्रद्रोह’ के दायरे में आते हैं।
उन्होंने कहा कि मुशर्रफ को उनके कदमों के लिए सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का सामना करना चाहिए। साल 2007 में आपातकाल लगाने के मुशर्रफ के फैसले का हवाला देते हुए शरीफ ने कहा, संघीय सरकार का यह ठोस विचार है कि तीन नवंबर, 2007 को संविधान को दरकिनार करने का उठाया गया कदम पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 6 के तहत घोर राजद्रोह के तहत आता है। पीएमएल-एन के नेता शरीफ ने कहा, प्रधानमंत्री संविधान की हिफाजत करने की शपथ लेता है। इस शपथ में निहित है कि सरकार अनुच्छेद 6 के तहत दोषियों को न्याय के जद में लाएगी।
शरीफ ने कहा कि उनकी सरकार मुशर्रफ के खिलाफ मुकदमा चलाने के संदर्भ में सभी राजनीतिक दलों को विश्वास में लेने के लिए विचार विमर्श करेगी। संसद में शरीफ के बयान के तत्काल बाद एटार्नी जनरल मुनीर मलिक ने सरकार की स्थिति के बारे में सुप्रीम कोर्ट की उस पीठ को सूचित किया जो मुशर्रफ के खिलाफ घोर राष्ट्रद्रोह का मामला चलाने की मांग संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही है। एटार्नी जनरल का कहना है कि मुशर्रफ के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है, हालांकि सरकार को अपने भविष्य के कदम के लिए 30 दिनों के समय की जरूरत है।
उधर, पाकिस्तान की सबसे बड़ी अदालत ने एटॉर्नी जनरल को भविष्य के कदम के बारे में फैसले के महज तीन दिन का समय दिया तथा उन्हें आदेश दिया कि सरकार गुरूवार तक अपना जवाब दाखिल करे। जानकारों का कहना है कि सरकार को सेना की तरफ से दबाव का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि वह अपने एक पूर्व जनरल को सार्वजनिक रूप से अपमानित होते नहीं देखना चाहेगी। पाकिस्तान के संविधान के अनुसार राष्ट्रद्रोह के मामले में मुकदमे का फैसला सिर्फ सरकार कर सकती है। शरीफ ने कहा, मुशर्रफ ने दो बार संविधान का उल्लंघन किया। 1999 में उन्होंने निर्वाचित सरकार का तख्तापलट किया। फिर उन्होंने न्यायाधीशों को बख्रास्त कर उन्हें नजरबंद कर दिया। (एजेंसी)