राजनीति में मुझसे सबसे बड़ी भूल हुई: अजित पवार

महाराष्‍ट्र में सूखे की स्थिति पर बीते दिनों दिए गए विवादस्‍पद बयान पर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने सोमवार को माफी मांग ली है। उन्‍होंने कहा कि ऐसा बयान देकर राजनीति में मुझसे अब तक की सबसे बड़ी भूल हुई है।

ज़ी न्‍यूज ब्‍यूरो
मुंबई : महाराष्‍ट्र में सूखे की स्थिति पर बीते दिनों दिए गए विवादस्‍पद बयान पर महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजित पवार ने सोमवार को माफी मांग ली है। उन्‍होंने कहा कि ऐसा बयान देकर राजनीति में मुझसे अब तक की सबसे बड़ी भूल हुई है।
गौर हो कि अजित पवार ने बीते दिनों पानी की मांग को लेकर करीब दो महीने से अनशन पर बैठे एक किसान का मजाक उड़ाते हुए कहा था कि बांध में पानी नहीं है तो क्या पेशाब कर दें। इस बयान के बाद अजित की चौतरफा आलोचना हुई थी।
महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री अजीत पवार ने पानी की कमी और बिजली कटौती के बारे में अपनी विवादास्पद टिप्पणी के लिए आज माफी मांग ली। हालांकि उनके विवादास्पद बयानों को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण राज्य विधायिका के दोनों सदनों की कार्यवाही बार बार बाधित हुई और बाद में पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। विधानसभा में पवार पर विपक्ष ने तीखा हमला किया और कहा कि केवल माफी मांगने से काम नहीं चलेगा, उन्हें मंत्री पद छोड़ देना चाहिए।
हंगामे के कारण निचले सदन को पांच बार के स्थगन के बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। विपक्ष के नेता एकनाथ खड़से ने कहा कि सूखा प्रभावित लोगों का मजाक उड़ाने के बाद माफी मांग लेने से काम नहीं चलेगा। पवार को हटना पड़ेगा। वह मौजूदा मंत्री पद के लिए योग्य नहीं हैं। एक सभ्‍य व्यक्ति के लिए ऐसी टिप्पणी उपुयक्त नहीं है। राज्य विधान परिषद भी इसी मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण सात बार के हंगामे के बाद बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।
निचले सदन में भारी हंगामे के बीच निजी स्पष्टीकरण देते हुए पवार ने स्वीकार किया कि उन्हें सतर्कता से अपने शब्दों का इस्तेमाल करना चाहिए था।
इससे पहले, राकांपा नेता ने कहा था कि सोलापुर का एक किसान 55 दिनों से अनशन पर है। वह बांधों से अपने खेत के लिए पानी छोड़े जाने की मांग कर रहा है। बांधों में पानी नहीं है। हमें क्या करना चाहिए? क्या हमें बांधों में पेशाब कर देना चाहिए? पीने के लिए भी पानी नहीं है इसलिए हम पेशाब भी नहीं कर सकते।’ अजित ने यह बयान शनिवार को पुणे के इंदापुर में एक सभा को संबोधित करते हुए दिया था।
उन्होंने बिजली कटौती को लेकर एक और विवादास्पद बयान दे डाला। उन्होंने कहा कि मुझे जानकारी हुई है कि महाराष्ट्र में जनसंख्या बढ़ रही है। चूंकि राज्य में बिजली की कमी है तो बिजली के न रहने पर लोग काम क्या करेंगे। अजित के इस बयान की सभी राजनीतिक दलों ने निंदा की।
हालांकि, बयान पर बढ़ते विरोध को देखते हुए अजित ने रविवार शाम अपने विवादास्पद बयान पर माफी मांग ली थी। पवार ने कहा कि अगर उनके बयान से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए माफी मांगते हैं। उनका बयान सूखे से प्रभावित लोगों को लक्ष्य करके नहीं दिया गया था।
आजाद मैदान में भूख हड़ताल पर बैठे किसान भैया देशमुख ने कहा कि पवार ने अपने बयान से राज्य की जनता की भावना को ठेस पहुंचायी है। देशमुख ने कहा कि किसी उप-मुख्यमंत्री के मुंह से ऐसी टिप्पणी शोभा नहीं देती।