चाचा चौधरी के जनक मशहूर कार्टूनिस्ट प्राण नहीं रहे

लोकप्रिय कार्टून चरित्र चाचा चौधरी और उसके मित्र साबू को गढ़ने वाले जाने माने कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा का आज 75 साल की उम्र में निधन हो गया। वह प्राण नाम से लोकप्रिय थे। प्राण के प्रकाशक डायमंड कॉमिक्स के अनुसार प्राण का आज सुबह गुड़गांव के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह कैंसर से पीड़ित थे।

चाचा चौधरी के जनक मशहूर कार्टूनिस्ट प्राण नहीं रहे

नई दिल्ली : लोकप्रिय कार्टून चरित्र चाचा चौधरी और उसके मित्र साबू को गढ़ने वाले जाने माने कार्टूनिस्ट प्राण कुमार शर्मा का आज 75 साल की उम्र में निधन हो गया। वह प्राण नाम से लोकप्रिय थे। प्राण के प्रकाशक डायमंड कॉमिक्स के अनुसार प्राण का आज सुबह गुड़गांव के एक अस्पताल में निधन हो गया। वह कैंसर से पीड़ित थे।

डायमंड कामिक्स के प्रकाशक गुलशन राय ने कहा, प्राण का सुबह नौ बजे मेदांता अस्पताल में निधन हो गया। वह गत आठ महीने से आंत के कैंसर से पीड़ित थे। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्टूनिस्ट प्राण के निधन पर दुख जताते हुए ट्विटर पर संदेश पोस्ट किया।

मोदी ने प्राण को एक बहुमु़खी कार्टूनिस्ट बताया जो अपने कार्य के जरिये लोगों के चेहरे पर मुस्कुराहट लेकर आए। प्राण का जन्म 1938 में पाकिस्तान में लाहौर के पास कासूर में हुआ था। उन्होंने कार्टूनिस्ट के तौर पर अपने करियर की शुरूआत 1960 में दिल्ली के समाचार पत्र ‘मिलाप’ से की थी जिसमें वह ‘दाबू’ नाम से कॉमिक पट्टी बनाते थे। 1969 में प्राण ने हिंदी पत्रिका ‘लोटपोट’ के लिए चाचा चौधरी का स्केच बनाया जिससे वह प्रसिद्ध हो गए।

राय ने कहा, जब मैंने 1981 में प्राण से सम्पर्क किया तो वह समाचार पत्रों के लिए छोटे कार्टून बना रहे थे। उस समय कोई भारतीय कॉमिक्स नहीं था, वह सभी विदेशी नामों की प्रतिकृतियां थीं। हम गत 35 वर्षों से उनके कार्टून के अकेले प्रकाशक रहे। पांच दशक के करियर में प्राण ने सामान्य कला और हास्य समझ का इस्तेमाल कर श्रीमतीजी, पिंकी, बिल्लू, रमण और चन्नी चाची जैसे किरदार गढ़े जो नियमित तौर पर भारतीय पत्रिकाओं में प्रकाशित होते हैं।

प्राण का जन्म 15 अगस्त 1938 को पाकिस्तान के कासूर में हुआ था। आजादी के समय बंटवारे के बाद उनका परिवार ग्वालियर आ गया। उन्होंने राजनीति विज्ञान से एमए किया और उसके बाद मुंबई के सर जेजे आर्टर्स स्कूल से स्कूल फाइन आर्ट की डिग्री ली। 2001 में उन्हें भारतीय कार्टूनिस्ट्स इंस्टीटयूट की ओर से लाइफटाइम अचीवमेंट से नवाजा गया। इसके साथ ही 1995 में उन्हें लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने पीपल ऑफ द ईयर के चुना।