झंडेवाली देवी के दर्शन से पूरी होती है हर मुराद, जानें मंदिर का प्राचीन इतिहास

मंदिर का इतिहास करीब 100 साल पुराना है. आज भी अपनी मान्यता के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है.

झंडेवाली देवी के दर्शन से पूरी होती है हर मुराद, जानें मंदिर का प्राचीन इतिहास
झंडेवालान मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो झंडेवाली माता को समर्पित है.

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के मध्य में स्थित झंडेवालान एक सिद्धपीठ है. झंडेवालान मंदिर एक प्राचीन मंदिर है जो झंडेवाली माता को समर्पित है.  यह मंदिर झंडेवालान रोड, करोल बाग में स्थित है. यह मंदिर बहुत प्रसिद्ध व देवी शाक्ति का प्रतीक है. मंदिर में पूरे साल भक्त माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में आते है. मान्यता है कि झंडेवाली मां के दर्शन से लोगों की हर मुराद पूरी हो जाती है. 

दिल्ली के मध्य में स्थित एक सिद्धपीठ जहां मां झंडेवाली विराजती हैं. मंदिर का इतिहास करीब 100 साल पुराना है. आज भी अपनी मान्यता के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. दिल्ली के पहाड़गंज में स्थित इस मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.  सुबह 5 बजे से इधर मंदिर के कपाट खुलते हैं तो उधर भक्तों की कतारें लगना शुरू हो जाती हैं. कोरोना काल से पहले की बात करें तो दिनभर में 5 से 6 हजार श्रद्धालु हर दिन यहां दर्शन के लिए आते थे. अभी हर दिन एक से दो हजार भक्त माता झंडेवाली के दर्शन के लिए इस मंदिर में आते हैं.

झंडेवाला माता मंदिर में दर्शन का समय ऋतु के अनुसार अलग-अलग है. गर्मियों में सुबह 5 बजे से 1 बजे तक और शाम 4 बजे से 10 बजे तक दर्शन होते हैं जबकि सर्दियों में मंदिर सुबह 5.30 बजे से 1 बजे तक और संध्या के समय 4 बजे से 9.30 बजे तक दर्शन के लिए खुलता है. मंगल आरती 5 बजे होती है जिसमें सूखा मेवा भोग लगाया जाता है. फिर शृंगार के बाद सुबह 9 बजे आरती होती है और फिर रात 8 बजे संध्या आरती होती है. कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से आरती मंदिर के youtube चैनल पर लाइव भी दिखाई जाती है. 

झंडेवाला मंदिर के पुजारी पंडित भीम दत्त बताते हैं कि माता झंडेवाली लक्ष्मी का स्वरूप हैं जिनके एक तरफ मां काली हैं और दूसरी तरफ मां सरस्वती. श्रद्धालु बड़ी दूर दूर से यहां आते हैं. 

इसका नाम झंडेवाला मंदिर क्यों पड़ा?
मंदिर के इतिहास की बात करें तो 100 साल से भी पहले दिल्ली के एक व्यापारी श्री बद्री भगत को सपने में माता ने दर्शन दिए थे और कहा था कि इस बंजर जमीन में तुम्हें मेरी मूर्ति मिलेगी, जिस जगह मेरी मूर्ति होगी वहां एक झंडा होगा. बद्री भगत ने जब मूर्ति ढूंढी तो इसी जगह उन्हें झंडे के नीचे माता की मूर्ति मिली. तब से उन्होंने यहां मूर्ति की स्थापना की और इस मंदिर का नाम झंडेवाला मंदिर पड़ा. 

मंदिर परिसर में माता झंडेवाली के अलावा, स्वयंभु शिवलिंग, हनुमान जी, गणेश, जी और सरस्वती जी की भी प्रतिमा है. बताया जाता है कि जब भक्त बदरी भगत को माता की मूर्ति मिली थी, तब वो मूर्ति खंडित थी. आमतौर पर खंडित मूर्ति की स्थापना नहीं की जाती लेकिन क्योंकि ये स्वयं प्रकट मूर्ति थी इसलिए इसको स्थापित किया गया. 

लोगों की श्रद्धा इस मंदिर में इतनी है कि सालों साल से लोग यहां आ रहे हैं, चाहे मुश्किल कितनी भी हो लेकिन रास्ता नहीं बदलता. ये भरोसा मन में हमेशा बना रहता है कि माता के दरबार में हर मुश्किल का हल है. 

इस मंदिर की मान्यता ये है कि यहां आकर जिसने जो कुछ मांगा है वो उसे जरूर मिला है. मां कभी अपने दर से किसी को खाली नहीं जाने जाती. लोगों की सभी मनोकामनाएं यहां पूरी हो जाती हैं. माता झंडेवाली के दिव्य दर्शन और आशीर्वाद के साथ ही श्रद्धालुओं को छोले और हलुए का प्रसाद मिलता है. 

नवरात्रि में 24 घंटे खुला रहता है मंदिर
नवरात्रि में मंदिर 24 घंटे खुला रहता है. यहां मकर संक्रांति उत्सव सामाजिक समरसता के साथ मनाया जाता है, जिसमें समाज के सभी तबके के लोग सम्मिलित होते हैं और खिचड़ी को प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं. मंदिर में समय-समय पर धार्मिक कार्यक्रम श्रीमद्भागवत कथा, श्री हनुमान जयंती, शिवरात्रि पर शिव तांडव नृत्य नाटिका, अन्नकूट का विशाल भण्डारा औरसामाजिक कार्यक्रमों में प्रत्येक वर्ष रक्तदान शिविर एवं स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया जाता है. 

मां झंडेवाली की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होने की वजह से मंदिर की महिमा सर्वत्र फैल रही है. इस कारण हिंदू धर्म के अतिरिक्त अन्य संप्रदायों के लोग भी मां के दर्शन के लिए मंदिर में आते हैं, जिनमें विदेशी भक्त भी शामिल हैं. ये विश्वास ही तो होता है जो भक्तों को इन पवित्र धामों तक खींच लाता है. ये आशा ही तो होती है जो निराश मनुष्य को भी हारने नहीं देती. झंडेवाली मां का ये द्वार ऐसी ही उर्जा के स्रोत हैं. 

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