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कुश्ती कोच महावीर फोगाट बोले, 'खिलाड़ियों का सम्मान करना भूल गई है हरियाणा सरकार'

फोगाट ने कहा कि खेलों को लेकर मौजूदा राज्य सरकार सिर्फ दिखावा करती है कि वो उनके साथ है. 

कुश्ती कोच महावीर फोगाट बोले, 'खिलाड़ियों का सम्मान करना भूल गई है हरियाणा सरकार'
फाइल फोटो

भिवानी: कुश्ती कोच और जननायक जनता पार्टी के खेल प्रकोष्ठ के प्रधान महावीर फोगाट ने युवा निशानेबाज मनु भाकर पर हरियाणा के खेल मंत्री अनिल विज की टिप्पणी की कड़ी निंदा की. फोगाट ने कहा कि हाल में पुरस्कार राशि को लेकर उठे मामले में सारी गलती हरियाणा के खेल विभाग की है जबकि, खेल मंत्री गुस्सा इस निशानेबाज पर निकाल रहे हैं. मनु ने विज की ट्वीट का स्क्रीनशाट पोस्ट कर पुरस्कार राशि के प्रति खेल मंत्री को ध्यान दिलाया था. इसके बाद विज ने मनु से माफी की मांग की थी. 

फोगाट ने कहा, ''हरियाणा सरकार ने बकायदा अधिसूचना जारी कर युवा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने पर इनामी राशि दो करोड़ रुपये करने की घोषणा की थी जिसके बाद मनु भाकर ने देश के लिए आईएसएसएफ कप 2018, राष्ट्रमंडल खेलों और युवा ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीते.''  

उन्होंने कहा, ''हालांकि कुछ समय बाद ही सरकार ने दोबारा सूचना जारी कर इस इनामी राशि को घटाकर एक करोड़ रुपये कर दिया. नियम के अनुसार मनु को वही पुरस्कार राशि मिलनी चाहिए, जितने की उस समय घोषणा की गई थी, जब उसने पदक जीता. लेकिन राज्य सरकार की नियत इतनी खराब है कि वे शायद उसे बाद में जारी किए गए आदेशानुसार एक करोड़ रुपये देना चाहते हैं. खेल मंत्री ने तब ट्वीट कर मनु को दो करोड़ रुपये देने की घोषणा कर वाहवाही ली थी लेकिन अब उन्हें एक खिलाड़ी का सच्चाई भरा ट्वीट चुभ रहा है.'' 

फोगाट ने साथ ही कहा, ''इससे भी ज्यादा अफसोसजनक बात यह है कि खिलाड़ियों से संवाद करने के लिए और उन्हें सरकार द्वारा घोषित सुविधायें दिलवाने के लिए कोई अधिकारी जिम्मेदार नहीं है. मनु ने अपनी नाराजग़ी और आशंका ट्विटर के जरिए इसलिए जाहिर की क्योंकि उसे हरियाणा के खेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ना इनामी राशि दे रहे थे ना सही जानकारी. अब सरकार ऐसे अधिकारियों पर सख्ती करने की बजाय मनु की आलोचना कर रही है.'' 

फोगाट ने कहा कि खेलों को लेकर मौजूदा राज्य सरकार सिर्फ दिखावा करती है कि वो उनके साथ है. उन्होंने कहा, ''जितना जोश और उत्साह सरकार के मंत्री पदक जीतकर आने वाले खिलाड़ियों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए दिखाते हैं, उतनी ही उन्हें खिलाड़ियों की मदद तब भी करनी चाहिए जब उन्हें अभ्यास छोड़कर सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं.'' 

(इनपुट भाषा से)