इन खिलाड़ियों ने नाम लिया वापस
सूत्रों के मुताबिक जिन पहलवानों ने इस टूर्नामेंट से अपने नाम वापस लिए हैं. उनमें अंशु मलिक (57 किग्रा), सरिता मोर (59 किग्रा) और जितेंद्र किन्हा (79 किग्रा), टोक्यो ओलंपिक के रजत पदक विजेता रवि दहिया (57 किग्रा), विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता दीपक पूनिया (86 किग्रा), बजरंग पूनिया (65 किग्रा), उनकी पत्नी संगीता फोगाट (62 किग्रा) और विनेश फोगाट (53 किग्रा) शामिल हैं. इन पहलवानों का कहना है कि तैयारी न होने की वजह से वे इस प्रतियोगिता में शामिल नहीं हो सकते. वहीं अंजू चोट के कारण इस टूर्नामेंट से हट गई हैं.
क्रोएशिया जाने से किया इनकार
रिपोर्ट के मुताबिक जिन पहलवानों ने क्रोएशिया जाने से इनकार किया है, उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर दिए अपने धरने में कहा था कि जब तक भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) को भंग कर इसके अध्यक्ष बृजभूषण शरण (Brij Bhushan Sharan Singh) पर कार्रवाई नहीं की जाती है, वे किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग नहीं लेंगे. उनके इस इनकार के बाद एम सी मैरीकॉम की अध्यक्षता वाली महासंघ की निगरानी कमेटी ने क्रोएशिया जाने के लिए 36 सदस्यीय टीम की घोषणा कर दी है. यह टीम क्रोएशिया की राजधानी जाग्रेब में 1 से 5 फरवरी तक होने वाली UWW रैंकिंग सीरीज इवेंट में भाग लेगी.
मामले की जांच कर रही है कमेटी
बताते चलें कि कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) पर पहलवानों के आरोप के बाद खेल मंत्रालय ने 5 सदस्यीय निगरानी कमेटी का गठन किया है. यह कमेटी एक महीने में जांच पूरी करके खेल मंत्रालय को देगी. तब तक महासंघ के दिन-प्रतिदिन के कामकाज और टीम की घोषणा भी यही कमेटी करेगी. इस कमेटी का अध्यक्ष जानी-मानी बॉक्सर एमसी मैरीकॉम, टॉप्स के पूर्व सीईओ राजगोपालन, पूर्व पहलवान योगेश्वर दत्त, पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी तृप्ति मुरगुंडे और SAI की पूर्व कार्यकारी निदेशक (खेल) राधिका श्रीमन को शामिल किया गया है.
इस नाम को लेकर नाराज हैं पहलवान
कमेटी के गठन के तुरंत बाद विद्रोही पहलवानों ने इस पर नाराजगी जताई थी. बजरंग पुनिया और विनेश फोगाट समेत कई नाराज खिलाड़ियों का कहना था कि इस कमेटी में शामिल लोगों के बारे में उनसे सलाह नहीं ली गई. उनकी नाराजगी खासकर पहलवान योगेश्वर दत्त को लेकर थी. विनेश फोगाट के मुताबिक योगेश्वर दत्त महासंघ की गोद में बैठकर उनकी बोलियां बोल रहे हैं, इसलिए उनसे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती.
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