close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक समीक्षा: कहानियां, जिनकी नाभिनाल गांव में है

स्‍त्री और पुरुष सदा से दो भाषाओं में संवाद करते आ रहे हैं. स्‍त्री कुछ कहती है, पुरुष कुछ सुनता है. पुरुष कुछ चाहता है, स्‍त्री कुछ और समझ रही होती है. देह भाषा और भाव भंगिमाओं के पाठ में भी यह अंतर महसूस होता है. खैर … फि‍लहाल बात अखिलेश की प्रतिनिधि कहानियों पर.

मई 27, 2019, 04:03 PM IST

Book Review: औरंगजेब और भी बहुत कुछ था जो हम नहीं जानते

औरंगजेब पर इल्जाम है कि उसने अपनी हुकूमत में हिंदुओं पर अत्याचार किए और बड़ी तादाद में हिंदू मंदिरों को तोड़ दिया था.

मई 1, 2019, 03:44 PM IST

पुराने घावों की नई परख: रेत समाधि

कथा सार संक्षेप यह है कि कथा के केंद्र में दो औरतें हैं एक बड़ी हो रही हैं और दूसरी छोटी. दोनों रिश्‍ते में मां बेटी हैं

Jan 31, 2019, 02:26 PM IST

क्योंकि ये कहानी है वादियों में रहने वाले हमारे ‘हम-वतनों’ की

यह घाटी में रहने वाले उस हर शख़्स की कहानी है जिसने काश्मीर की ख़ूबसूरत वादियों में नफ़रत की धुंध को फैलते देखा है

Nov 5, 2018, 09:20 AM IST

खुद की तलाश में भटकते एक युवा की कहानी है 'हमन हैं इश्क मस्ताना'

आज का तकरीबन हर इंसान आभासी और असल दुनिया के बीच ऐसी ही ऊहापोह में उलझा है और 'हमन हैं इश्क मस्ताना' का नायक अमरीश बिस्वाल भी एक ऐसी ही परिस्थिति में उलझा व्यक्ति है. 

Nov 1, 2018, 01:04 PM IST

पुस्तक समीक्षा : ‘मुल्क’ पटकथा

किताब के रूप में 'मुल्क' को देखना, फिल्म देखने से अलग है. यह नाटक नहीं है. उपन्यास जैसा तो बिल्कुल नहीं है. फिक्शन या नॉन-फिक्शन पढ़ने के आदी पाठक 'मुल्क' पढ़ते हुए थोड़ा रुकते अवश्य हैं, लेकिन कथानक के प्रति जिज्ञासा उन्हें इसके अंदर तक ले जाती है.

Oct 30, 2018, 01:19 PM IST

प्रेमचंद से मन्नू भंडारी तक: पटकथा भले बदली हो, 'निर्मला' की व्यथा जस की तस है!

राधाकृष्ण प्रकाशन ने प्रेमचंद के प्रसिद्ध उपन्यास 'निर्मला' पर आधारित एक पटकथा का प्रकाशन किया है, जिसे लिखा है जानीमानी साहित्यकार मन्नू भंडारी ने.

Oct 18, 2018, 12:44 PM IST

पुस्तक समीक्षा : झूठ के बाजार में 'झूठ से अलग' गजलों की एक दास्तान

संदीप पाण्डेय की गजलें जीवन में व्याप्त झूठ पर केंद्रित हैं. जैसा कि शीर्षक से ही लगता है कि उनकी गजलों में जीवन की उदासी, बेचैनी, क्रोध, चालबाजियां और घोखा सब कुछ हैं.

Aug 7, 2018, 02:45 PM IST

Book Review : नारी सपने देखती नहीं, बुनती है...

‘हसीनाबाद' वह कहानी है जो बताती है कि किस तरह औरत को उसके ही सपनों से बाहर निकाल दिया जाता है, किस तरह से वह खुद अपने सपनों से बाहर हो जाती है. यह उपन्यास बताता है कि दरअसल समाज कहीं भी पहुंच जाए लेकिन आज भी औरत की खुशियों का फैसला पुरुष ही करता है...

Jan 31, 2018, 05:00 PM IST

Book Review : बीजेपी का ‘विनिंग फ़ॉर्मूला' समझाती है यह पुस्तक

मसलन राज्यों की जन-भावना और संस्कृति को देखते हुए बीजेपी ने बीफ-बैन और उस से सम्बंधित राजनीति को पूर्वोत्तर राज्य में बिलकुल भी इस्तेमाल नहीं किया. तीसरा है ज़मीनी हकीकत को समझते हुए व्यावहारिक दृष्टिकोण.

Sep 30, 2017, 01:36 PM IST