मुस्लिम महिलाएं News

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सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम समाज में प्रचलित एक कुप्रथा ‘तलाके बिद्दत’ यानी तीन बार तलाक बोलकर किसी पति द्वारा पत्नी को दिए गए तलाक को अपरिवर्तनीय मान लेना, को अवैध ठहरा कर एक दूरगामी फैसला दिया है. हालांकि यह फैसला सर्वसम्मति से नहीं आया है और प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति खेहर एवं न्यायमूर्ति अब्दुल नजीर ने इससे सहमति नहीं जतायी है और उनके अनुसार तीन तलाक मुस्लिम पर्सनल लॉ का हिस्सा है. अतएव उसे मूल अधिकारों का स्तर प्राप्त है. वहीं, न्यायमूर्ति नरिमन एवं यू.यू. ललित का कहना है कि ‘तीन तलाक एक मनमाना कृत्य है, और सन् 1937 का जो कानून इसे मान्यता प्रदान करता है वह असंवैधानिक है और इसे रद्द कर दिया है.’
Aug 22,2017, 20:27 PM IST
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Aug 22,2017, 19:11 PM IST
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