शम्सुर रहमान फारुकी

"बड़े शौक से सुन रहा था ज़माना, तुम्हीं सो गए दास्तां कहते-कहते"

फारुकी आलमी शोहरत याफ्ता तजज़ियाकार और नज़रियानिगार और शायर थे. उन्होंने दास्तान गोई को दुबारा ज़िंदा करने में बुनियादी किरदार अदा किया

Dec 25, 2020, 01:59 PM IST