PICS: मुर्दों के साथ रहना पसंद करते हैं यहां के लोग, मौत पर मनाया जाता है जश्न

क्या आप दुनिया के उस हिस्से के बारे में जानते हैं जहां लोग अपने पूर्वजों के शव के साथ रहते हों? अगर नहीं, तो आज हम आपको उसी जगह के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां लोग अपने परिवार के सदस्य की मौत के बाद उन्हें कभी दफनाते नहीं है. बल्कि मुर्दे को ममी के रूप में तब्दील कर उसे घर पर ही रखते हैं.

ज़ी न्यूज़ डेस्क | Jul 23, 2021, 17:27 PM IST
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इंडोनेशिया के तोराजन समुदाय की परंपरा

Tradition of the Torajan Community of Indonesia

मुर्दों को अपने साथ रखने की ये परंपरा इंडोनेशिया के तोराजन समुदाय में पाई जाती है. इस समुदाय में डेड हार्वेस्ट फेस्टिवल (Dead Harvest Festival) भी मनाया जाता है, जिसमें मुर्दों को बॉक्स से बाहर निकालकर, नहला धुलकर और फिर से नए कपड़े पहनाकर मरे शख्स को जो भी खाना पसंद था वही बनाया जाता है.

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पूरे गांव में मनाया जाता है जश्न

Celebration is celebrated in the whole village

डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, जिस दिन लोग मुर्दों को बाहर निकालते हैं और उन्हें सजाते हैं, उस दिन अपने रिश्तेदारों और दोस्तों को भी बुलाते हैं. पूरे गांव में जश्न जैसा माहौल होता है. ये सब इसलिए होता है क्योंकि वे अपने घर वालों से बहुत ज्यादा लगाव महसूस करते हैं. इसलिए उन्हें हमेशा के लिए दफनाने से पहले कई साल तक अपने साथ रखते हैं.

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जो मर गया है वो भी जिंदा है

he who is dead is also alive

इंडोनेशिया के टोराजन संप्रदाय के लोग मानते हैं कि मौत जीवन का अंत नहीं है और जो मर गया वो भी जिंदा है. ये लोग न सिर्फ मुर्दों को साथ रखते हैं, बल्कि उन्हें खाना भी देते हैं. इस संप्रदाय में जब किसी की मृत्यु हो जाती है तो उसे दफनाने की जगह एक भैंस की बलि दी जाती है. भैंस की बलि और उत्सव के बाद मृत शरीर को घर ले जाया जाता है. इसके बाद उसे अनाजघर और बाद में श्मशान ले जाते हैं.

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मृत शरीर को इस तरह करते हैं सुरक्षित

This is how to protect the dead body

फिर मुर्दे को वापस घर ले आते हैं. उनके लिए एक कमरा खाली कर दिया जाता है. जिसमें जरूरत का हर सामान, कपड़े और पसंद की चीजें रखी जाती हैं. मृत शरीर को कई वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए उसके शरीर को फॉर्मल्डहाइड और पानी के घोल से परिरक्षित करते हैं. बाद में इस मुर्दे को परिवार में शामिल कर दिया जाता है. यहां मौत को लोग एक उत्सव की तरह मनाते हैं. 

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पूरे गांव में टहलने जाते हैं मुर्दे

The dead go for a walk in the whole village

इस दिन टूटे हुई ताबूत की मरम्मत कराई जाती है या फिर उसे बदल दिया जाता है. इसके बाद अपने परिजनों के शव को तय रास्ते से पूरे गांव में टहलाते हैं. गांव की इस परंपरा को 'माइनेने' कहा जाता है. ये परंपरा हर साल अगस्त में निभाई जाती है. इसे शवों की सफाई का कार्यक्रम माना जाता है. परंपरा के दौरान बाहर से आए लोगों को मुर्दों से मिलने भी दिया जाता है.