Corona से जुड़ी गलत जानकारियां फैलाने में सबसे आगे है Facebook, ये लोग भी शामिल
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Corona से जुड़ी गलत जानकारियां फैलाने में सबसे आगे है Facebook, ये लोग भी शामिल

इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट (ICFJ) और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में टो सेंटर फॉर डिजिटल जर्नलिज्म द्वारा जर्नलिज्‍म और COVID-19 पर किए गए अंतरराष्ट्रीय सर्वे में फेक न्‍यूज पर भी जानकारियां जुटाई गईं हैं. 

Corona से जुड़ी गलत जानकारियां फैलाने में सबसे आगे है Facebook, ये लोग भी शामिल

नई दिल्‍ली: COVID-19 महामारी की कवरेज करने वाले पत्रकारों का दावा है कि गलत जानकारियां फैलाने वालों में फेसबुक सबसे आगे है. इसके बाद दूसरा नंबर इलेक्‍टेड ऑफिशियल्‍स का है, यानी कि ऐसे पदों पर बैठे लोग जो चुनकर आए हैं. इंटरनेशनल सेंटर फॉर जर्नलिस्ट (ICFJ) और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में टो सेंटर फॉर डिजिटल जर्नलिज्म द्वारा जर्नलिज्‍म और COVID-19 पर किए गए अंतरराष्ट्रीय सर्वे में फेक न्‍यूज पर भी जानकारियां जुटाई गईं हैं. 

फेसबुक ने उठाए हैं कदम 
हालांकि फेसबुक ने हाल ही में अभद्र भाषा (Hate Speech) को ले‍कर अपनी नीतियों में बदलाव किए हैं, जो ऐसे सभी कंटेंट पर प्रतिबंध लगाती है जो भड़काऊ होने के साथ-साथ तोड़-मरोड़कर पेश किए गए हों. हालांकि पहले जुकरबर्ग ने ऐसा करने की अपीलों को नकार दिया था. 

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रिसर्चर्स ने फेसबुक को कहा फर्जी खबरों का स्‍त्रोत 
इस मुद्दे पर रिसर्च करने वालों ने पाया कि 66 फीसदी पत्रकारों ने फेसबुक को फर्जी खबरों से जोड़ा और इसे गलत खबरों का प्राथमिक स्‍त्रोत करार दिया. इस अध्ययन में शामिल 82 फीसदी पत्रकारों ने दावा किया कि उन्होंने Facebook और इसके WhatsApp और Instagram प्‍लेटफॉर्मों को गलत सूचना देने की जानकारी भी दी लेकिन इनमें से लगभग आधे पत्रकारों ने कहा कि वे कंपनी से मिली प्रतिक्रिया को लेकर असंतुष्ट थे. सर्वे में Twitter, Youtube और Google Search के जरिए गलत जानकारियां फैलाने को भी शामिल किया गया. 

बता दें कि कोरोना वायरस और जर्नलिज्‍म के बीच के संबंध के बारे में पता लगाने के लिए यह प्रोजेक्‍ट अप्रैल 2020 में शुरू किया गया था.

राजनेता भी फैलाते हैं गलत खबरें 
सर्वे में अमेरिका, ब्रिटेन, भारत, नाइजीरिया और ब्राजील के आधे पत्रकारों ने दावा किया कि कोविड-19 के बारे में गलत सूचनाएं फैलाने में सोशल मीडिया के बाद दूसरा नंबर राजनेताओं और इलेक्‍टेड ऑफिशियल्‍स का है. 

सर्वे के निष्कर्षों में दावा किया गया कि COVID-19 के बारे में गलत सूचना फैलाने वाली वेबसाइटों को अप्रैल के महीने में Facebook पर 50 करोड़ व्‍यूज मिले, जबकि उस समय COVID-19 पूरी दुनिया में भयावह तरीके से फैल रहा था. 

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