एमपी के हनी ट्रैप कांड में दिग्गज नेताओं के नाम? आरोपी मोनिका बनी सरकारी गवाह!

जिस जगह नेता अधिकारियों को बुलाया जाता वहां पहले से हिडन कैमरा लगा रहता था. उस कैमरे में उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें कैद कर ली जाती थी. इसके बाद ब्लैकमेलिंग का खेल शुरु होता था. अधिकारी से करोड़ों रुपए की मांग की जाती थी.

एमपी के हनी ट्रैप कांड में दिग्गज नेताओं के नाम? आरोपी मोनिका बनी सरकारी गवाह!

नई दिल्ली: हनीट्रैप के मसले को लेकर मध्य प्रदेश में सियासत गरम है. आरोप में सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्ष बीजेपी के आला नेताओं के अलावा बड़े आईएस अधिकारी इंजीनियर तक सब शामिल हैं. कांग्रेस और बीजेपी दोनों दूसरे की कमीज़ से अपनी कमीज़ ज़्यादा सफेद होने के दावे कर रही हैं. कांग्रेस का आरोप है कि रैकेट की सरगना श्वेता का पति बीजेपी का नेता है और 2005 से ही ये सेक्स रैकेट चल रहा था. कांग्रेस ने पूर्व सीएम शिवराज सिंह पर सीधा निशाना साधा और आरोप लगाया कि श्वेता जैन को उन्होंने ही किशोर न्यास का सदस्य बनाया.

एमपी कांग्रेस के सचिव राकेश सिंह ने कहा, ''वो तो चीफ हैं हनीट्रैप के.. शिवराजजी तो मुख्यमंत्री बने हनीट्रैप की वजह से, नहीं तो वो मुख्यमंत्री के लायक नहीं थे. हनी ट्रैप में बाबूलाल गौर को फंसाने के बाद उन्हें बनाया गया. वो तो विधानसभा का चुनाव भी नहीं जीते थे. मुख्यमंत्री बनने के 6 महीने बाद चुनाव लड़े. इससे स्पष्ट होता है कि उनमें ऐसी कौन सी खूबी थी या जिसे बनाया बोर्ड मेंबर उसमें क्या खूबी थी.''

हनी ट्रैप मामले की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम की जांच में चौंकानेवाले खुलासे हो रहे हैं. देश का सबसे बड़ा ब्लैकमेलिंग सेक्स स्कैंडल कहे जाने वाले इस मामले से जुड़ी 4000 फाइलें जांच एजेंसियों को मिल चुकी है. सूत्रों के मुताबिक इस स्कैंडल के तार बॉलीवुड तक फैले माने जा रहे हैं. इस बीच हनी ट्रैप मामले में गिरफ्तार हुई 19 साल की आरोपी मोनिका यादव सरकारी गवाह बनने के लिए राज़ी हो गई है. बुधवार को ही मोनिका के पिता ने मानव तस्करी मामले में पांच आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी. मोनिका के गांववाले मानते हैं कि पूरे मामले में मोनिका को मोहरा बनाया गया.

मोनिका के गांव के सरपंच इंदर सिंह लहरी का कहना है कि कोई वीडियो उसका बनाकर उलझा दिया, फिर उसको ब्लैकमेल किया गया. उसे फंसा कर के बार-बार फिर वही काम करवाया. बाकी वो इस तरह की नहीं थी.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस गैंग को श्वेता जैन चला रही थी

रैकेट चलाने वाली श्वेता जैन पहले किसी माध्यम से नेता बड़े अधिकारी या बिज़नेसमैन तक पहुंच बनाती. फिर उन्हें हुस्न के जाल में फंसाने के लिए गैंग में शामिल लड़कियों को उनके पास भेजती. जिस जगह नेता अधिकारियों को बुलाया जाता वहां पहले से हिडन कैमरा लगा रहता था. उस कैमरे में उनकी आपत्तिजनक तस्वीरें कैद कर ली जाती थी. इसके बाद ब्लैकमेलिंग का खेल शुरु होता था. अधिकारी से करोड़ों रुपए की मांग की जाती थी.

ऐसा ही कुछ इंदौर नगर निगम के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर हरभजन सिंह के साथ हुआ. इंजीनियर ने आरोप लगाया था कि एक आरोपी महिला ने उनसे दोस्ती कर एक आपत्तिजनक वीडियो बनाया और उसके आधार पर 3 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी. हरभजन सिंह की शिकायत पर ही पुलिस ने मोनिका के अलावा, आरती दयाल, श्वेता स्वप्निल जैन, श्वेता विजय जैन, बरखा सोनी और एक ड्राइवर ओमप्रकाश को गिरफ्तार किया था.

आरोपी मोनिका बनी सरकारी गवाह

पुलिस मान रही है कि मोनिका के सरकारी गवाह बनने से ये बात सामने आएगी कि श्वेता ने किस तरह से ऑपरेशन को अंजाम दिया. एसआईटी के सूत्रों ने खुलासा किया कि वीडियो क्लिप की फोरेंसिक जांच के बाद, सिंडिकेट में शामिल ब्लैकमेल करने वाले व्यक्तियों की पहचान की जाएगी. उसके बाद उन हाई प्रोफाइल लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा और नामों का खुलासा किया जाएगा.

फिलहाल हनी ट्रैप मामले ने एमपी की राजनीति में भूचाल ला दिया है. और इसकी आंच महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ दिल्ली गोवा मुंबई तक पहुंच चुकी है. क्या ये पूरा खेल श्वेता जैन के इशारों पर खेला जा रहा था या पर्दे के पीछे से कोई और इस साज़िश की अगुवाई कर रहा था, ये वाकई दिलचस्प सवाल है.