महाराष्ट्र: अजित पवार की वह चिठ्ठी जिसने रातोरात बदल दिए सियासी खेल

महाराष्ट्र की सियासी उठापटक न जाने किसे चारो खाने चित कर के छोड़ेगी और न जाने किसके सिर मुख्यमंत्री पद का ताज सजेगा. आज यानी मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है. जिसमें फ्लोर टेस्ट की समय सीमा तीन दिन घटा दी गई है. इस बीच यह पूरा खेल अजित पवार के किस चिठ्ठी से शुरू हुआ और अदालत के दरवाजे तक पहुंच गया, इसको लेकर सियासी बाजार गर्म है.   

महाराष्ट्र: अजित पवार की वह चिठ्ठी जिसने रातोरात बदल दिए सियासी खेल

मुबंई: एनसीपी के विधायक दल के नेता रहे अजित पवार कल तक भले शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन का हिस्सा रहे थे लेकिन भाजपा के साथ मिलकर स्थिर सरकार बनाने के ख्वाब के पीछे एक खोखली कहानी है. दरअसल, भाजपा को अजित पवार का समर्थन एक चिठ्ठी के सहारे मिला. दिलचस्प बात यह है कि चिठ्ठी में जो लिखा था, भाजपा उसे पढ़कर काफी खुश हुई होगी, लेकिन अब जो स्थितियां हैं, वह भाजपा को बिल्कुल नहीं सुहा रही हैं. अजित पवार ने उस चिठ्ठी में लिखा था कि उनके पास एनसीपी के सभी 54 विधायकों का समर्थन है. और वे भाजपा के साथ सरकार बनाने की ईच्छा रखते हैं. 

चिठ्ठी में सभी 54 विधायकों के हस्ताक्षर

उस चिठ्ठी में एनसीपी के सभी 54 विधायकों के हस्ताक्षर थे. जिसके बाद भाजपा ने हामी भरी और तुरंत सरकार बनाने का सारा खेल शुरू हो गया. अगली ही सुबह भाजपा के देवेंद्र फड़णवीस ने मुख्यमंत्री पद की तो अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली. अब के हालात कुछ और हैं. अजित पवार के इस हरकत से नाराज हो गया चाचा जी. चाचा जी मतलब एनसीपी प्रमुख शरद पवार. उन्होंने पार्टी के सभी विधायकों को हिदायत दे डाली कि अजित के साथ आने की स्थिति में वे उनपर कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं. एंटी डिफेक्शन कानून के तहत विधायकों को पार्टी से निष्कासित कर उनकी विधायकी भी खाई जा सकती है. 

महाविकास अगाड़ी गठबंधन ने पहले ही कर दिया शक्ति परीक्षण

इसके बाद एक-एक कर अजित पवार के सभी विधायकों ने पाला बदला और शरद पवार के शरण में चले गए. धनंजय मुंडे जो अजित पवार के करीबी माने जाते हैं, उन्होंने भी पार्टी के साथ ही खड़ा होने का मन बनाया और शरद पवार के खेमें में खड़े दिखाई दिए. मामला अब यहां तक बढ़ गया है कि सोमवार शाम को एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस ने अपने सभी 162 विधायकों के साथ होटल हयात में फ्लोर टेस्ट से पहले ही शक्ति परीक्षण कर यह दिखा दिया कि संख्याबल उनके पास है. महाविकास अगाड़ी गठबंधन के नाम से जाने जानी वाली शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन ने अपने विधायकों को होटल के कमरों में कैद कर रखा है. विधायकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पार्टी के  वरिष्ठ नेता संभाल रहे हैं. 

भाजपा के खेमे में छाई है शांति

भाजपा के खेमे में फिर भी बड़ी शांति दिख रही है. पार्टी की चहल-पहल कुछ खास नहीं हो रही. मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके देवेंद्र फड़णवीस ने तो सरकार बनने के बाद प्रदेश में अटके पड़े कुछ कामों का निपटारा भी शुरू कर दिया है. ऐसे में यह संदेह अब भी है कि क्या 145 पार का जादूई आंकड़ा जो दोनों ही धुरी दिखाने की कोशिश में हैं, वह असल में है किसके पाले में.