वो गाना जिसे गाते-गाते मोहम्मद रफी के गले से बहने लगा था खून, हैरान कर देगा ये किस्सा

मोहम्मद रफी आज बेशक हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके इतने खूबसूरत और सदाबहार गाने दिए हैं कि कभी ऐसा लगता ही नहीं है कि वह सालों पहले इस दुनिया से रुखस्त हो गए हैं.

Written by - Bhawna Sahni | Last Updated : Jul 31, 2021, 12:25 PM IST
  • मोहम्मद रफी ने 31 जुलाई को हमेशा के लिए आंखें मूंद ली थीं
  • मोहम्मद रफी अपने गानों के जरिए हमेशा दिलों में जिंदा रहेंगे
वो गाना जिसे गाते-गाते मोहम्मद रफी के गले से बहने लगा था खून, हैरान कर देगा ये किस्सा

नई दिल्ली: 'गूंजती है तेरी आवाज अमीरों के महल में, झोपड़ों के गरीबों में भी है तेरे साज, यूं तो अपने मौसिकी पर साहब को फक्र होता है मगर ए मेरे साथी मौसिकी को भी आज तुझ पर है नाज.' मशहूर म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद (Naushad) के ये चंद शब्द आज भी आंखें नम कर देते हैं. क्योंकि, ये लाइनें उन्होंने सिनेमा के सदाबहार गायक मोहम्मद रफी (Mohammed Rafi) की याद में लिखी थीं.

हर परिस्थितियों में दिल को सुकून देते हैं रफी के गाने

इस फिल्मी दुनिया में कई कलाकार ऐसे रहे हैं जो बेशक आम लोगों की पहुंच से कोसों दूर हों, लेकिन अपनी कला के जरिए वह हर दिल में बसे. ऐसे ही कलाकारों में एक नाम मोहम्मद रफी का भी शुमार है. उनके नग्में आज भी लोगों को किसी भी हालात में अकेला नहीं छोड़ सकते. उनके गाने अगर आपको थिरकने पर मजबूर कर देते हैं, तो वहीं, महबूबा से अपने दिल की बात कहने और बिरहा में जल रहे आशिकों की कहानी भी बयां कर देते हैं.

आज भी दीवाना बनाते हैं रफी साहब के गाने

मोहम्मद रफी की आवाज का जादू ही कुछ ऐसा था कि आज भी उनके गाने कभी पुराने नहीं लगते. इन्हें जितनी बार सुनो, यह मन में वही जोश और ताजगी भर देते हैं. सुरों के इस फनकार ने 31 जुलाई 1980 को हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह दिया था.

मोहम्मद रफी का संगीत सुन आज भी लोग इसलिए मदहोश हुए जाते हैं, क्योंकि रफी साहब खुद भी संगीत के लिए दीवाने थे. म्यूजिक के लिए उनका प्यार उनके हर गाने में झलकता है.

बेहद दिलचस्प है ये किस्सा

वैसे तो रफी साहब का हर गाना यादगार है सभी के पीछे एक मजेदार किस्सा छिपा होता था. हालांकि, आज हम आपके सामने उनके उस गाने के बारे में बात करने जा रहे हैं, जिसे गाते हुए उनके गले से खून बहने लगा था. इस किस्से का जिक्र म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद की बायोग्राफी 'नौशादनामा: द लाइफ एंड म्यूजिक ऑफ नौशाद' में भी किया गया है.

घंटों रियाज करते थे रफी साहब

दरअसल, 1952 में रिलीज हुई फिल्म 'बैजू बावरा' में मोहम्मद रफी ने 'ओ दुनिया के रखवाले' गाना गाया था. यह गाना सुपरहिट रहा, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इस गाने के लिए रफी साहब ने कड़ी मेहनत की थी.

उन्हें इस गाने के लिए कई दिनों तक घंटों-घंटों बैठकर रियाज करना पड़ता था. क्योंकि, इस गाने के लिए उन्हें अपनी आवाज को काफी ऊंचे स्केल पर रखना पड़ता था.

गले से बहने लगा था खून

कई दिनों की मेहनत के बाद आखिरकार यह गाना पूरा हो ही गया. कहते हैं कि गाने की फाइनल रिकॉर्डिंग की खत्म होने तक मोहम्मद रफी के गले से खून तक बहने लगा था. उनके गले की हालत काफी खराब हो चुकी थी. इसके बावजूद उन्होंने कभी इसकी शिकायत या अपनी तकलीफ नौशाद को नहीं बताई, जो इस फिल्म के म्यूजिक डायरेक्टर थे. हालांकि, इसके बाद कई दिनों तक रफी कोई गाना नहीं गा पाए थे

एक कैदी ने जाहिर की आखिरी इच्छा

मोहम्मद रफी के इस गाने को लेकर एक किस्सा और बहुत चर्चा में रहा है. नौशाद ने ही एक बार एक कार्यक्रम में बताया था कि 'ओ दुनिया के रखवाले' गाने ने हर शख्स के दिल में एक खास जगह बनाई है. उन्होंने बताया था कि एक कैदी को फांसी दी जा रही थी.

इस दौरान जब उससे उसकी आखिरी इच्छा पूछी गई तो उसने रफी साहब के इसी गाने को सुनने की इच्छा जाहिर की. इसके बाद जेल के रिकॉर्डर में यह गाना बजाया गाया और इसके बाद ही कैदी को फांसी दी गई. इसी दौरान वहां मौजूद ज्यादातर लोगों की आंखें नम हो गई थीं.

निधन पर रो पड़ी थी पूरी कायनात

मोहम्मद रफी ने अपने करियर में 25 हजार से भी ज्यादा गाने गाए. वह जाते-जाते भी इस संगीत प्रेमियों के लिए खूबसूरत सौगात छोड़ गए हैं. रफी साहब का जब निधन हुआ उस दिन लगता है पूरी कायनात रो पड़ी थी. 31 जुलाई को उन्हें हार्ट अटैक आया और उन्होंने हमेशा के लिए अपनी आंखें मूंद ली. उस दिन जमकर बारिश हुई. कहते हैं कि उनकी अंतिम यात्रा में 10 हजार से भी ज्यादा लोग शामिल हुए थे.

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