संसद और 26/11 के बाद सरकार ने नहीं दी थी एयरस्ट्राइक की अनुमतिः बीएस धनोआ

धनोआ ने कहा कि दिसंबर, 2001 में संसद पर आतंकी हमले के बाद वायु सेना ने पाकिस्तान के आतंकी शिविरों को ध्वस्त करने की योजना तैयार की थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उसे स्वीकार नहीं किया. दिसंबर, 2008 में मुंबई में आतंकी हमले के बाद भी तत्कालीन वायु सेना प्रमुख गुलाम कश्मीर में मौजूद आतंकी शिविरों पर हमला करने के लिए तैयार थे.

संसद और 26/11 के बाद सरकार ने नहीं दी थी एयरस्ट्राइक की अनुमतिः बीएस धनोआ

नई दिल्लीः पूर्व वायु सेना प्रमुख बीएस धनोआ ने शनिवार को कहा कि 2001 में संसद पर हमला और 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के बाद भी पाकिस्तान के आतंकी शिविरों पर हवाई हमला करने के लिए वायु सेना तैयार थी, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने उसकी अनुमति नहीं दी. वह एक समारोह को संबोधित करने पहुंचे थे. 

धनोआ ने कहा कि दिसंबर, 2001 में संसद पर आतंकी हमले के बाद वायु सेना ने पाकिस्तान के आतंकी शिविरों को ध्वस्त करने की योजना तैयार की थी, लेकिन तत्कालीन सरकार ने उसे स्वीकार नहीं किया. दिसंबर, 2008 में मुंबई में आतंकी हमले के बाद भी तत्कालीन वायु सेना प्रमुख गुलाम कश्मीर में मौजूद आतंकी शिविरों पर हमला करने के लिए तैयार थे, लेकिन उसकी अनुमति नहीं दी गई. उस समय तकनीकी रूप से वायु सेना पाकिस्तानी वायु सेना से मजबूत स्थिति में भी थी.

सरकार ने फैसला किया, हमने बालाकोट को अंजाम दिया
पूर्व वायु सेना प्रमुख ने कहा कि पुलवामा में सेना के काफिले पर आतंकी हमले के बाद वायु सेना पाकिस्तान के बालाकोट में आतंकी शिविरों पर हमला करने में इसलिए सफल रही क्योंकि सरकार ने इसका फैसला किया. उन्होंने कहा, 'इस बार राष्ट्रीय नेतृत्व ने फैसला किया और हमने उसे अंजाम दिया. धनोआ ने कहा कि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे को खत्म नहीं होने देगा, क्योंकि इससे उसे कई लाभ मिलते हैं. पाकिस्तान झूठ फैलाने में लगा है और वह कश्मीर में हमले जारी रखेगा.

भारत के पास पूरी क्षमता
धनोआ 31 दिसंबर, 2016 से 30 सितंबर, 2019 तक वायु सेना प्रमुख रहे थे. उन्होंने कहा कि भारत के पास जमीन, आकाश और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता है.

हमारे पड़ोसी परमाणु शक्ति से संपन्न 
पूर्व वायु सेना प्रमुख ने कहा कि हमारे पड़ोस में दो परमाणु शक्ति संपन्न देश पाकिस्तान और चीन मौजूद हैं. चीन ने अपनी वायु सेना को अत्याधुनिक बना लिया है. उसने तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में व्यापक पैमाने पर वायु सेना की तैनाती भी की है. वह दक्षिण चीन सागर में भी अपनी ताकत बढ़ाने में लगा है, उसने ऐसे युद्धपोत बनाए हैं जो डूब नहीं सकते.

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