डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने की UP हिंसा में PFI की संलिप्तता की पुष्टि

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नागरिकता कानून पर हुई हिंसा में PFI की संलिप्तता की पुष्टि की और कहा कि हमारी सरकार इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रही है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Dec 31, 2019, 01:16 PM IST
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने की UP हिंसा में PFI की संलिप्तता की पुष्टि

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैलाने में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का हाथ था, अब सरकार की ओर से प्रस्ताव लाकर इसे प्रतिबंधित किया जाएगा. बता दें कि इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून पर प्रदेश भर में हिंसा में शामिल होने के सबूतों के बाद डीजीपी मुख्यालय ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश गृह विभाग को भेज दी है. 

प्रस्ताव लाकर प्रतिबंधित करेंगेः  केशव 

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार की तरफ से प्रस्ताव लाकर इस संगठन पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. प्रदेश में हुई हिंसा में इस संगठन का हाथ था. 

जानिये क्या है पीएफआई (PFI) 

पीएफआई का पूरा नाम पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया है. यह एक कट्टरपंथी  इस्लामी संगठन है जिस पर कई गैर कानूनी गतिविधियां संचालित करने का आरोप है. साल 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के मुख्य संगठन के रूप में पीएफआई का गठन किया गया था. इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है. पीएफआई खुद को न्याय, आजादी और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले संगठन के रूप में बताता है लेकिन साल 2012 में केरल सरकार ने एक मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट से कहा था कि पीएफआई की गतिविधियां देश की सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं.

PFI पर हिंसा फैलाने का आरोप

डीजीपी मुख्यालय ने अपनी सिफारिश में पीएफआई के बारे में लिखा कि इसमें इस्लामिक स्टूडेंट मूवमेंट ऑफ इंडिया यानि सिमी के ज्यादातर सदस्य जुड़ गए हैं. इन संगठनों के लोगों के पास से पूरे राज्य में आपत्तिजनक साहित्य और सामग्री बरामद की गई हैं. पुलिस ने बताया कि यूपी की हिंसा में पकड़े गए कई लोगों के संबंध पीएफआई से निकले जबकि पीएफआई के कई सदस्य पकड़े गए जिन पर हिंसा फैलाने का आरोप है.

ये भी देखें- योगी सरकार ने केंद्र से की PFI को बैन करने की सिफारिश

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