भारतीय सेना लिख रही आधुनिकीकरण की नई कहानी, तकनीक की जुबानी

कहते हैं कि आपत्ति और आवश्यकता से ही अविष्कार का जन्म होता है, लेकिन भारतीय सेना के लिहाज से यह कथन उल्टा है. यह कुछ नई पहल करते रहने की तलब है जो भारतीय सेना में नए-नए अविष्कारों को जन्म देती है. यह भारतीय थलसेना प्रमुख बिपिन रावत ने दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में कहा.  

भारतीय सेना लिख रही आधुनिकीकरण की नई कहानी, तकनीक की जुबानी

नई दिल्ली: भारतीय सेना के सेनाध्यक्ष बिपिन रावत ने राजधानी के मानेकशॉ सेंटर में आर्मी तकनीक सेमिनार के उद्घाटन समारोह में भारतीय सेना की तकनीकी क्षमता के विषय में बात करते हुए कहा कि सेना सबके साथ मिलकर आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है. यह पहल हमारी सेना को और अधिक शक्ति प्रदान करेगी और उसे सफलता भी दिलाएगी. उन्होंने कहा कि भारतीय सेना आवश्यकता के हिसाब से अविष्कार करने पर काम नहीं करती बल्कि पहल करने के लिहाज से नई-नई तकनीकों को तैयार करती रहती है. 

नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर निभाएंगे भविष्य में बड़ी भूमिका: थलसेना प्रमुख

भारतीय सेना का सिद्धांत ही है कि तकनीकी सैन्य उपकरणों में हमेशा आगे रहे. उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर और जंगी हथियार भविष्य में किसी भी युद्ध के दौरान बड़ी भूमिका निभाते नजर आने वाले हैं.

लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं कि सेना का वह बल जमीन पर पैर डिगाए सुरक्षा और सेवा के लिए खड़ा रहता है उसकी कोई अहमियत नहीं. उन्होंने कहा कि ये बल हमेशा के लिए अहम था और रहेगा भी. आने वाले सालों में भी. नॉन-कॉन्टैक्ट हथियारों का बस यह फायदा होगा कि इनकी वजह से दुश्मन सेना के दांत पहले ही खट्टे किए जा सकते हैं.

सभी तकनीकों से लैस होगा भारतीय सेना का जंगी जखीरा

भारतीय थलसेना प्रमुख ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और सभी जरूरतों से लैस होने की जरूरत है. इसको लेकर भारतीय सेना बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है. थलसेना प्रमुख बिपिन रावत ने यह भी कहा कि सेना बहुत ज्यादा समय तक बंद दरवाजे के अंदर से ही तकनीकी विकास नहीं करेगी बल्कि जल्द ही इसके दरवाजे सबके लिए खुलने वाले हैं.

तकनीकी विकास सेमिनार में तकनीक पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि हमें आधुनिक हथियारों का बड़ा जखीरा खड़ा करने के लिए तकनीक को पूरी तरीके से आत्मसात कर लेना होगा. 

भारतीय थलसेना प्रमुख ने सेना के खतरों पर बात करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपने फैसलों पर आगे बढ़ें और उन्हें जमीन पर उतारें. अब तकनीक का इस्तेमाल दो कामों या दो तरीकों से करना होगा. कोई भी उद्योग रक्षा उपकरण बनाने के आदेश पर काम करने नहीं बैठा है.