सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंची महाराष्ट्र की सियासी लड़ाई

महाराष्ट्र की राजनीति अब विधायक मंडली और कॉमन मिनिमम प्रोग्राम से आगे बढ़ चुका है. अब यह सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच चुका है. जिसके बाद 30 नवंबर को विधानसभा में शक्ति परीक्षण होगा. दोनों ही जगह यह फैसला होगा कि क्या देवेंद्र फड़णवीस के नेतृत्व में भाजपा सरकार रहेगी या फिर 5 दिनों के बाद वापस विपक्ष में आ जाएगी.   

सर्वोच्च अदालत की चौखट पर पहुंची महाराष्ट्र की सियासी लड़ाई

मुंबई: महाराष्ट्र में शनिवार की सुबह किसी के लिए ग्रह दशा खराब कर देने वाली थी तो किसी के लिए इसका असर बहुत लंबे समय तक रह जाने वाला था. भाजपा का साथ देकर एनसीपी से बागी हुए अजित पवार ने 22 विधायकों का समर्थन दिखा उप मुख्यमंत्री पद की शपथ तो ले ली लेकिन शाम होते-होते यह संख्या घटती चली गई. पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार और शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अजित पवार के 22 विधायकों के समर्थन को सिरे से नकारा. एनसीपी प्रमुख ने तो यहां तक कह दिया कि वे अजित पवार के खिलाफ और उनके साथ जाने वाले विधायकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे. जाहिर है यह कार्रवाई एंटी-डिफेक्शन कानून से जुड़ी हुई है. यह सब अभी खत्म ही हुआ कि एनसीपी-शिवसेना-कांग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज कराने पहुंच गए. 

तीनों पार्टियां ने कहा सरकार बनाने की संख्या हमारे पास

तीनों पार्टियों ने संयुक्त रूप से दर्ज किए गए याचिका में लिखा कि भाजपा के देवेंद्र फडणवीस को राज्यपाल ने जो बुला कर शपथ दिलाया वह सरासर असंवैधानिक प्रक्रिया है. राज्यपाल के खिलाफ भी तीनों पार्टियों ने अर्जी लगाई और कोर्ट से मांग की है कि उन्हें सरकार बनाने का मौका दिया जाए. पार्टियों का दावा है कि उनके पास 144 विधायकों का समर्थन है. बागी हुए विधायकों के अलावा. उन्होंने यह भी कहा कि तीनों पार्टियों की महा विकास अगाड़ी गठबंधन ने संयुक्त रूप से उद्धव ठाकरे को इसका नेता चुना था. इतने दिनों से सभी पार्टियां  मिलजुल कर कॉमन मिनिमम प्रोग्राम भी तैयार कर चुकी थी. आज दावा करने ही वाली थी कि सुबह में यह झटका मिला. 

विधायक दल के नेता से हटाए गए अजित पवार

तीनों पार्टियों ने कोर्ट से गुहार लगाई है कि इस पूरे मामले को संवैधानिक दृष्टिकोण से जांच कर असंवैधानिक करार दिया जाए और उन्हें सरकार बनाने का न्योता भी दिया जाए. चीफ जस्टिस बोबडे से इसकी अपील की गई है. इससे पहले शरद पवार ने सभी विधायकों के साथ अपने आवास पर बैठक की. इस बैठक में कुल 44 एनसीपी विधायक पहुंचे और 10 गायब रहे. 30 नवंबर को फड़णवीस सरकार के लिए फ्लोर टेस्ट पास करना बहुत जरूरी है वरना सरकार गिर जाएगी. मालूम हो कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भतीजे अजित पवार को एनसीपी के विधायक दल  के नेता से हटा दिया है. जिसका मतलब है कि अब एनसीपी की राहें अजित पवार से अलग है. 

उधर अजित पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह कहा कि भाजपा के साथ आने का फैसला सही है. उन्होंने कहा कि वे अब अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे. उन्होंने भाजपा के साथ स्थिर सरकार बनाने का मन बना लिया है. अब यह देखना बाकी है कि महाराष्ट्र की राजनीति नए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद भी कौन सा नया मोड़ लेती है.