क्या है ब्लैक कोकीन? जानें कैसे बनती है, एनसीबी के लिए इसे पकड़ना है बड़ी चुनौती

एनसीबी ने बोलीविया से मुंबई आई एक महिला को गिरफ्तार कर करीब 3.2 किलो ब्लैक कोकीन जब्त किया है. ब्लैक कोकीन की कीमत करीब 13 करोड़ आंकी गई है. आइये जानते हैं इस ड्रग्स के बारे में ए टू जेड चीजें.  

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Oct 2, 2022, 01:35 PM IST
  • ब्लैक कोकीन में किसी तरफ की गंध नहीं आती
  • यह देखने में किसी कोयले की तरह लगता है

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क्या है ब्लैक कोकीन? जानें कैसे बनती है, एनसीबी के लिए इसे पकड़ना है बड़ी चुनौती

नई दिल्ली: हाल ही में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने बोलीविया से मुंबई आई एक महिला को गिरफ्तार कर करीब 3.2 किलो ब्लैक कोकीन जब्त किया है. इसकी ब्लैक कोकीन की कीमत करीब 13 करोड़ आंकी गई है. तो आइये जानते हैं कि आखिर क्या है ब्लैक कोकीन? क्यों एजेंसियों के लिए इसे पकड़ना चुनौती होता है? इस रिपोर्ट में एक्सपर्ट से इस बारे में पूरी जानकारी जुटाई गई है.

क्या है ब्लैक कोकीन
ब्लैक कोकीन खतरनाक नशीला पदार्थ है. सामान्य कोकीन और कई तरह के केमिकल को मिलाकर इसे बनाया जाता है. ब्लैक कोकीन को कोकीन हाइड्रोक्लोराइड या कोकीन बेस भी कहा जाता है. इसमें कोयला, कोबाल्ट, एक्टिवेटेड कार्बन और आयरन सॉल्ट जैसी चीजें मिलाकर तैयार किया जाता है. इसका रंग पूरी तरह काला होता है. ब्लैक कोकीन को दुर्लभ और अवैध ड्रग्स की कैटेगरी में रखा गया है.

क्यों पकड़ना मुश्किल

विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक कोकीन को पकड़ना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि इसमें से किसी तरफ की गंध नहीं आती. इसे इस तरह के केमिकल को मिलाकर बनाया जाता है, जिससे गंध बेहद कम हो जाती है. वहीं ये ये कोयला जैसा नजर आता है. तस्करों द्वारा त्योहारों और पार्टियों के सीजन में नए ग्राहकों को लुभाने के लिए भी ब्लैक कोकीन का इस्तेमाल किया जा रहा है.

क्या बोले एनसीबी डायरेक्टर
एनसीबी मुंबई के जोनल डायरेक्टर अमित घवाटे ने बताया कि नए तरह का ड्रग्स होने के चलते ब्लैक कोकीन को बाजार में बेचने में आसानी होती है. वहीं गंध न होने की वजह से इसे स्निफर डॉग भी नहीं पकड़ पाते. स्निफर डॉग को अलग अलग ड्रग्स की गंध से उन्हें पकड़ने के लिए तैयार किया जाता है. यही वजह है कि गंध नाहोने से कई बार तस्कर ब्लैक कोकीन को आसानी से भारत में प्रवेश करा देते हैं. 

कहां बनती है ड्रग्स
वरिष्ठ पत्रकार और कई किताबों के लेखक विवेक अग्रवाल ने को बताया कि कोकीन का सबसे ज्यादा उत्पादन दक्षिण अमेरिकी देशों में होता है. यहीं से अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडीकेट चलाया जाता है. इनमें कोलंबिया, पेरू, ब्राजील और बोलिविया जैसे देश कोकीन के सबसे बड़े स्रोत हैं. इन देशों में ब्लैक कोकीन बनती है और फिर इथोपिया और केन्या समेत कई देशों के अलग अलग रुट के जरिए इसे भारत में भेजा जाता है. आजकल कोकीन कई रास्तों से भारत मे आ रहा है, लेकिन मुख्य तौर पर इसे सी रुट और हवाई रुट के माध्यम से ही लाया जाता है.

भारत के इन शहरों में सप्लाई
एक बार जब ब्लैक कोकीन आ जाती है, फिर केमिकल ट्रीटमेंट के जरिए इसमें से कोकीन बेस अलग कर दिया जाता है और फिर मुंबई, गोवा, दिल्ली जैसे बड़े शहरों में इसे सप्लाई किया जाता है. इसका नशा मेट्रो सिटीज के अलावा दूसरी श्रेणी के शहरों में भी बढ़ रहा है. आमतौर पर कोकीन को पैसे वाले लोगों का ड्रग्स भी कहा जाता है, क्योंकि इसकी कीमत बाकी नशीले पदार्थों से काफी ज्यादा होती है.

कितना खतरनाक है इसका नशा
दिल्ली के फिजिशियन और वरिष्ठ डॉक्टर अमित कुमार ने बताया कि कोकीन को इंसानी शरीर के लिए बेहद हानिकारक माना जाता है. ये बाकी ड्रग्स के मुकाबले ज्यादा खतरनाक होता है. खून का बहाव तेज हो जाता है और इसका असर सीधा दिल और दिमाग पर होता है. इससे हार्ट अटैक की संभावना बढ़ जाती है. इसके ओवरडोज से किसी भी व्यक्ति की मौत तक हो सकती है.

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