अंटार्कटिका के माउंट विन्सन की चोटी फतह करेगा आर्यन

भारत के बच्चे भी चढ़ सकते हैं बड़े पहाड़ों पर. भारत का आर्यन अब अंटार्कटिका की खून जमा देने वाली सर्दी में चढ़ेगा माउंट विन्सन पर..  

अंटार्कटिका के माउंट विन्सन की चोटी फतह करेगा आर्यन

नई दिल्ली. नाम है आर्यन बालाजी लेकिन काम है पर्वतारोहण का. उम्र में छोटा पर इरादों में बड़े इस हिन्दुस्तानी पर्वतारोही के आगे झुकने वाला है माउंट विन्सन. क्योंकि अंटार्कटिका में स्थित माउंट विन्सन की चोटी पर चढ़ने की कल्पना भी किसी की भी दिल की धड़कनें बढ़ा सकती है. और फिर आर्यन तो अभी सिर्फ 14 साल का है जिसका पर्वतारोहण का अनुभव भी बहुत अधिक नहीं है. 

छह साल की उम्र से कर दी थी शुरुआत  

आर्यन के लिए पर्वतारोहण कोई नई बात नहीं है. उसने सिर्फ छह साल की उम्र से ही पर्वतारोहण शुरू कर दिया था. और उसके इस शौक की प्रेरणा जाती है उसके पिता सीडीआर बालाजी को. बालाजी भारतीय जलसेना में अधिकारी पद पर सेवा दे रहे हैं और वे स्वयं भी पर्वतारोही हैं. अपने बेटे आर्यन को पर्वतारोहण की सारी ट्रेनिंग पिता ने ही दी है. 

पर्वतारोहण इस बच्चे का खेल है

पर्वतारोहण यूँ तो बच्चों का खेल बिलकुल नहीं है पर इस बच्चे के लिए खेल ही है. आर्यन अब तक आठ साल से पहाड़ों पर चढ़ता और उतरता रहा है. उसके लिए माउंट विन्सन भी कोई बड़ा टारगेट नहीं है. लेकिन उसने उसके बाद के अपने टारगेट पर अभी सोचा नहीं है. 

विश्व-कीर्तिमान बनाएंगे आर्यन 

14 साल की छोटी उम्र में माउंट विन्सन पर चढ़ने की चुनौती को सफलता से पार करना ही अपने आप में एक कीर्तिमान से कम नहीं. किन्तु वास्तव में आर्यन की यह चढ़ाई उनको दुनिया का सबसे कम उम्र का माउंट विन्सन का पर्वतारोही वाला कीर्तिमान प्रदान करेगी. लेकिन अब बस कुछ दिन की बात है और 2020 में शुरू हो जाएगा आर्यन का माउंट विन्सन अभियान.

कई पदक जीत चुका है छोटा पर्वतारोही 

आर्यन को पिछले आठ सालों में कई पुरस्कार मिले हैं. उसके दावे के अनुसार वह अब तक माउंट एवरेस्ट बेस कैंप, तंजानिया में माउंट किलीमिंजारो माजरो, रूस में माउंट एल्ब्रस, नेपाल में तीन उच्चतम दर्रे और लेह में कांग यात्से पर चढ़ कर सबसे कम उम्र के पर्वतारोही का विश्व कीर्तिमान बना चुके हैं. 

पिता दे रहे हैं माउंट विन्सन के लिए ट्रेनिंग 

बालाजी अपने बेटे को इस चुनौती के लिए तैयार कर रहे हैं. आर्यन की ट्रेनिंग चल रही है और उसके पिता उसे अंटार्कटिका के अत्यंत कठोर वातावर के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार कर रहे हैं. इस अभियान के लिए उसे मेडिकली फिट होना भी जरूरी है. कार्डियो और योग के साथ आर्यन कई तरह की जिम ट्रेनिंग नियमित रूप से कर रहा है. बस उसका अब एक ही ध्येय है इस अभियान को सफल कर देश का गौरव बढ़ा सकूँ!

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