15 साल पहले तैयार हुआ स्कूल, लेकिन अब भी पेड़ के नीचे पढ़ते हैं बच्चे

मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के एक गांव में बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने के लिए मजबूर हैं. भले ही आंधी आए या बरसात. खास बात ये है कि यहां स्कूल बिल्डिंग तैयार करने का काम 15 साल पहले ही पूरा कर लिया गया था.

15 साल पहले तैयार हुआ स्कूल, लेकिन अब भी पेड़ के नीचे पढ़ते हैं बच्चे

भोपाल: मध्य प्रदेश के बाजना तहसील के भडानकला गांव के बच्चों का दर्द सुनने वाला कोई नहीं है. यहां के बच्चे आंधी और बारिश के बीच भी पेड़ के नीचे पढ़ने के लिए मजबूर हैं. हालांकि उनके स्कूल की  बिल्डिंग 15 साल पहले ही तैयार हो गई थी.

मामूली वजह से चालू नहीं हुआ स्कूल
भडानकला गांव के बच्चे सालों से जर्जर पंचायत भवन के बाहर पेड़ के नीचे बैठ के पढ़ रहे हैं. क्योंकि 15 साल पहले तैयार हुई उनके स्कूल की बिल्डिंग अब जर्जर हो चुकी है. जो कि कभी भी ध्वस्त हो सकती है. 15 साल पहले जब बच्चों का स्कूल बनकर तैयार हुआ था तो लोग बेहद खुश थे. आखिर सालों बाद उनके बच्चों को पढ़ाई करने के लिए छत जो मिल रही थी. लेकिन अधिकारियों ने स्कूल को चालू करने से इसलिए मना कर दिया था क्योंकि उसका फर्श तैयार नहीं हुआ था.

तय किया गया कि जब फर्श तैयार हो जाएगा तो इसे  बच्चों के लिए खोल दिया जाएगा. लेकिन स्कूल का फर्श आज तक तैयार नहीं हुआ. स्कूल की  बिल्डिंग बने 15 साल बीत चुके हैं. अब तो स्कूल की इमारत खंडहर हो चुकी है. जिसमें शिफ्ट करना खतरे से खाली नहीं है.

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100 बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ने के लिए मजबूर
इस स्कूल में कक्षा 6, 7 और 8 की पढ़ाई होती है. यहां गांव भडानकला के अलावा बाकी के तीन गांव झगड़ापाड़ा, सालिया और वडली के बच्चे भी पढ़ने आते हैं. लेकिन उनके लिए स्कूल नहीं है. यहां लगभग 100 बच्चे रोजाना पढ़ाई करने काफी दूर दूर से आते हैं.

शिक्षक और गांव के लोग हैं मजबूर  
इस स्कूल के शिक्षक बताते है कि जिस पंचायत भवन और उप स्वास्थ्य केंद्र में कई सालों से कक्षाएं लगाई जा रही है वह पंचायत भवन भी अब जर्जर हालत में है और  इसलिए बच्चों को जर्जर भवन में दुर्घटना की आशंका के चलते बाहर पेड़ के नीचे बैठाया जाता है. हालांकि सामने ही 15 साल से माध्यमिक विद्यालय का भवन तैयार है लेकीन सिर्फ फर्श का काम नही होने का कारण बता कर आज तक इन बच्चों को इस नए भवन में शिफ्ट नही किया गया.

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ग्रामीण भी बताते है कि 15 साल से स्कूल के लिए भवन तैयार है लेकिन बच्चे आज भी पंचायत बहन के बाहर पढ़ते है. अधिकारी और  नेता आते है लेकिन मात्र आश्वासन देकर चले जाते है. यहां आज तक कुछ नही हुआ. बारिश के मौसम में बच्चों को जर्जर पंचायत भवन में बैठाना और ज्यादा  खतरनाक साबित हो  सकता है.  इसलिए जर्जर पंचायत भवन के बाहर पेड़ के नीचे तिरपाल लगाकर बैठाना पड़ता है.

ये मामला विशुद्ध रुप से प्रशासनिक लापरवाही का है. लेकिन जिला प्रशासन के आला अधिकारियो के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही. जब ज़ी मीडिया ने इस विकट समस्या की जानकारी कलेक्टर को दी तो उन्होंने बताया कि उन्हें हमारे माध्यम से ही इस समस्या के बारे में जानकरी मिली हैं. जिसके बाद उन्होंने भी मात्र आश्वासन देकर मामला फिलहाल के लिए टाल दिया.

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