कमलनाथ बोले 'नहीं साबित करूंगा बहुमत', सुप्रीम कोर्ट में जमकर हुए सवाल जवाब

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मीडिया से कहा कि वो फ्लोर टेस्ट का सामना नहीं करेंगे. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार बहुमत में है, वह क्यों बहुमत साबित करें.

कमलनाथ बोले 'नहीं साबित करूंगा बहुमत', सुप्रीम कोर्ट में जमकर हुए सवाल जवाब
दिल्ली: मध्य प्रदेश में सियासी हलचल अभी जारी है. अब इसके किरदार सुप्रीम कोर्ट में हैं. गुरुवार को भी सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जारी रही. इस दौरान वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने स्पीकर का पक्ष रखा. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी स्पीकर के विवेकाधिकार में दखल नहीं दे सकता. सिर्फ स्पीकर को अयोग्यता तय करने का अधिकार है. अगर उसकी तबीयत सही नहीं है तो कोई और ऐसा नहीं कर सकता. स्पीकर ने अयोग्य कह दिया तो कोई मंत्री नहीं बन सकता. इसलिए, इससे बचने के लिए स्पीकर के कुछ करने से पहले फ्लोर टेस्ट का मंत्र जपना शुरू कर दिया.
 
संकट में कमलनाथ सरकार
 
मध्य प्रदेश में सरकार बचाने और गिराने की कवायद हर स्तर पर जारी है. कांग्रेस के 22 बागी विधायकों के इस्तीफे से संकट में घिरे मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि वह बहुमत साबित नहीं करेंगे और न ही उन्होंने इस्तीफे के बारे में सोचा है. उन्होंने कहा कि हमारे विधायकों को डरा-धमका कर बेंगलुरु के रिजॉर्ट में बंधक बनाकर रखा गया है, पहले उन्हें छोड़ा जाए और वो आए अपनी बात स्पीकर के सामने रखें. इसके बाद जो भी फैसला होगा उसे स्वीकार करेंगे.
 
शिवराज सिंह चौहान की याचिका पर सुनवाई
 
मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार के बहुमत परीक्षण की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है. बीजेपी नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कोर्ट से जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराने की गुहार लगाई है. बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश विधानसभा स्पीकर पर कड़ा रुख अपनाते हए 16 विधायकों के इस्तीफे नहीं स्वीकारे जाने जाने पर सवाल पूछे.
 
फ्लोर टेस्ट के लिये हो रही तकरार
 
उल्लेखनीय है कि कमलनाथ सरकार के 22 विधायकों के इसतीफों के बाद उनकी कुर्सी खतरे में पड़ गयी है. सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि स्पीकर का रोल निष्पक्ष नहीं हैं. कोर्ट ने पूछा, MLA वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात करें तो स्पीकर फैसला ले लेंगे  तो इस पर सिंघवी ने कहा कि आप वीडियो कांफ्रेंसिंग की बात करके एक तरह से विधायकों को बंधक बनाए जाने को मान्यता दे रहे हैं. बिना आपके आदेश के मैं दो हफ्ते में इस्तीफे या अयोग्यता पर फैसला लेने को तैयार हूं. ऐसा किए बिना फ्लोर टेस्ट नहीं होना चाहिए.