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PoK में इमरान सरकार का अत्याचार, आजादी मांगने निकले लोगों को मार डाला!

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में इमरान सरकार की हैवानियत का ट्रेलर देखने को मिला है. जहां, पुलिस की लाठीचार्ज में 2 लोगों की मौत हो गई जबकि कई लोग घायल हैं. ये अत्याचार इसलिए हुआ क्योंकि 22 अक्टूबर को काला दिवस मनाते वक्त लोग प्रदर्शन कर रहे थे.

PoK में इमरान सरकार का अत्याचार, आजादी मांगने निकले लोगों को मार डाला!

नई दिल्ली: जिस कश्मीर का हिस्सा पाकिस्तान के कब्जे में है, उस पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में 22 अक्टूबर के दिन इंसानियत रोती रही और इमरान की हुकूमत हंसती रही. पीओके में पाप का का नंगा नाच होता रहा और पाकिस्तान की फौज हंसती रही. पाक अधिकृत कश्मीर में अत्याचार का खुला खेल चलता रहा और पाकिस्तान की पुलिस अट्टहास करती रही. इस घटना के बाद पाकिस्तान के हुक्मरान इमरान खान का काला चेहरा बेनकाब हो गया है.

22 अक्टूबर को काला दिवस के दौरान बरपा कहर

दरअसल, मंगलवार के दिन पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद में काला दिवस मनाया जा रहा था. पाकिस्तान सरकार और फौज के अत्याचार के खिलाफ पीओके के कई पार्टियां की तरफ से शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया जा रहा था. पीओके के लोग पाकिस्तान के नाजायज कब्जे से मुक्त होने के लिए आजादी की मांग उठा रहे थे. पीओके की धरती से उठी ये आवाज इस्लामाबाद में बैठे वजीर-ए-आजम इमरान खान को नागवार गुजर गई. पाक फौज के मुखिया जनरल कमर जावेद बाजवा की आंखों को मुजफ्फराबाद में निकली ये आजादी वाली रैली चुभने लगी. फिर सरकार और फौज ने हरी झंडी दे दी और फिर मुजफ्फराबाद में हो रहे प्रदर्शन पर लाठियां बरसने लगीं. 

हेलीकॉप्टर से हो रही थी निगरानी

पुलिस ने इस कदर लाठियां बरसानी शुरू की कि भगदड़ मच गई. लोग गिर पड़े फिर भी बर्बर पुलिसवाले की लाठियां उन पर बरसती रहीं. आंसू गैस के गोले भी छोड़ गए. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिसवालों ने पथराव तक करना शुरू कर दिया. सड़क पर पुलिस की बर्बरता चालू थी तो ऊपर आसमान से हेलीकॉप्टर के जरिए निगरानी भी की जा रही थी. लाठीचार्ज में दो लोगों की मौत हो गई तो वहीं कई घायल भी हो गए. यही नहीं, इस प्रदर्शन में शामिल होने आए करीब 100 लोगों का अता-पता भी नहीं चल पा रहा है.

पीओके के मुजफ्फराबाद में जो कुछ भी हुआ, इमरान खान की हुकूमत की बर्बरता की पोल खोलने के लिए काफी हैं. पूरी दुनिया आंखें फाड़-फाड़ कर देख रही है कि कैसे पाकिस्तान सरकार और फौज के इशारे पर पीओके में मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है. कैसे जनता की आवाज का गला दबाया जा रहा है? कैसे आजादी की मांग को बुलंद करने पर कत्लेआम शुरू हो गया?

इन सवालों का जवाब कौन देगा?

प्रदर्शन में शामिल होने आए लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब वो शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे तो फिर लाठियां क्यों भांजी गई? क्या इमरान खान की हुकूमत में प्रदर्शन करना भी गुनाह हो गया? इन सवालों के जवाब देने में पाकिस्तान सरकार अब हकला रही है लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जो भी इस बर्बरता के गुनहगार हैं, उन्हें बख्शा न जाए.

ऑल इंडिपेंडेंट पार्टीज अलायंस और पीपुल्स नेशनल अलांयस के बैनर तले आजादी की मांग को लेकर पीओके में लोग प्रदर्शन करने जुटे थे. पाकिस्तान के कब्जे में छटपटा रहे लोग अपनी आवाज बुलंद करते हुए सड़क पर मार्च कर रहे थे तभी चारों तरफ से पाकिस्तान के वर्दीवाले गुंडों ने इन्हें घेर लिया और लाठियां बरसाने लगे. किसी का सिर फूटा, किसी का पैर टूटा, कई लहूलुहान होकर गिरते चले गए. और तो और दो लोगों की तो जान ही चली गई.

22 अक्टूबर को क्यों मनाते हैं काला दिवस?

हर साल 22 अक्टूबर को पीओके के लोग काला दिवस मनाते हैं. 1947 में इसी दिन कबायलियों की मदद से पाकिस्तान ने मुजफ्फराबाद पर कब्जा कर लिया था. तब से हर साल 22 अक्टूबर को पीओके में पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ आक्रोश जाहिर कर काला दिवस मनाया जाता है. हर साल काला दिवस पर पाकिस्तान पीओके के लोगों पर कहर ढाती है और इस बार भी ऐसा ही किया गया.

पीओके से आईं दहशत भरी तस्वीरें इमरान खान के दोहरे रवैये से पूरी दुनिया को वाकिफ कराने के लिए काफी हैं. पाकिस्तान के पीएम इमरान खान पर जो दुनिया भर में घूम-घूमकर ये झूठ और प्रोपगैंडा फैलाते हैं कि भारत कश्मीर घाटी में मानवाधिकार का उल्लंघन कर रहा है. लेकिन पीओके से आई तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि उल्टा चोर कोतवाल को डांटे.