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Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंजानिए, देश के कितने MPs और MLAs कर रहे हैं आपराधिक मामलों का सामना, दोषसिद्धि से खो देंगे अपना पद

जानिए, देश के कितने MPs और MLAs कर रहे हैं आपराधिक मामलों का सामना, दोषसिद्धि से खो देंगे अपना पद

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने अपने सर्वे के नतीजों के बाद कहा है कि 2,495 सांसदों, विधायकों में से 363 को दोषसिद्धि की तारीख से अयोग्य घोषित किया जाएगा और उनकी रिहाई के बाद से छह साल की अवधि के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दे दिया जाएगा. 

अलामती तस्वीर
अलामती तस्वीर

नई दिल्लीः एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने कहा है कि कुल 363 सांसद, विधायक आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं और दोषसिद्धि होने पर जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत उन्हें अयोग्य करार दिया जाएगा. केंद्र और राज्यों में 39 मंत्रियों ने भी जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा आठ के तहत दर्ज आपराधिक मामलों का ऐलान किया है. कानून की धारा आठ की उप-धाराएं (1), (2) और (3) में प्रावधान है कि इनमें से किसी भी उप-धारा में दर्ज अपराध के लिए कसूरवार मुजरिम को दोषसिद्धि की तारीख से अयोग्य घोषित किया जाएगा और उनकी रिहाई के बाद से छह साल की अवधि के लिए उन्हें चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया जाएगा. 

2,495 सांसदों, विधायकों में 15 प्रतिशत के खिलाफ चार्जशीट दाखिल  
चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाले संगठन एडीआर और ‘नेशनल इलेक्शन वाच’ ने 2019 से 2021 तक 542 लोकसभा सदस्यों और 1,953 विधायकों के हलफनामों का विश्लेषण किया है. एडीआर के मुताबिक 2,495 सांसदों, विधायकों में से 363 (15 प्रतिशत) ने घोषणा की है कि उनके खिलाफ कानून में सूचीबद्ध अपराधों के लिए अदालतों के जरिए आरोप तय किए गए हैं. इनमें 296 विधायक और 67 सांसद हैं. 

भाजपा में दागी सांसदों और विधायकों की तादाद सबसे ज्यादा 
एडीआर ने कहा कि राजनीतिक दलों में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में ऐसे सांसदों, विधायकों की संख्या सबसे अधिक 83 है. कांग्रेस में 47 और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में 25 ऐसे सांसद, विधायक हैं. एडीआर के मुताबिक 24 मौजूदा लोकसभा सदस्यों के खिलाफ कुल 43 आपराधिक मामले लंबित हैं और 111 मौजूदा विधायकों के खिलाफ कुल 315 आपराधिक मामले 10 साल या उससे अधिक समय से लंबित हैं.

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बिहार और केरल के सर्वाधिक विधायक गंभीर मामलों का सामना कर रहे हैं 
जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 (1), (2) और (3) के तहत सूचीबद्ध अपराध गंभीर, जघन्य प्रकृति के हैं. बिहार में 54 विधायक ऐसे हैं, जो इस तरह के गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं, इसके बाद केरल में ऐसे 42 विधायक हैं. एडीआर ने अपनी नई रिपोर्ट में कहा कि चार केंद्रीय मंत्री और राज्यों में 35 मंत्री हैं, जिन्होंने आपराधिक मामलों की सूचना दी है. 

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