"मदरसों को न बोर्ड से जुड़ने की ज़रूरत है न सरकारी फंड की; नहीं बदलेंगे सिलेबस"

Madrasas do not need to join the board nor government funds: जमीयत उलेमा ए हिंद के सद्र मौलाना अरशद मदनी (Arshad Madni) ने इतवार को सहारनपुर में देशभर के मदरसा मैनेजर के एक जलसे को ख़िताब करते हुए कहा है कि मदरसों का मक़सद मज़हबी तालीम देना है, इसलिए उसे किसी बोर्ड से जुड़ने और उसमें मॉडर्न सिलेबस लागू करने का कोई मतलब ही नहीं है.

"मदरसों को न बोर्ड से जुड़ने की ज़रूरत है न सरकारी फंड की; नहीं बदलेंगे सिलेबस"
Image Credit: मौलाना अरशद मदनीSource: ज़ी मीडिया ब्‍यूरो

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Hussain Tabish

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हुसैन ताबिश Zee News  में एसोसिएट न्यूज़ एडिटर हैं.वो Salaam TV और JK & Ladakh TV के डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की टीम को लीड करते हैं. उन्हें फील्ड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क पर ख़बरों से खेलने का लगभग 18 सालों का अनुभव है. Zee से पहले वो HT Media, Amar Ujala, Prasar Bharti, Raj Express, Forward Press, Mahanagar Media Network Ltd, BIG Pvt. Ltd. और 'देशबंधु' अखबार जैसे संस्थानों में फील्ड रिपोर्टिंग और डेस्क पर संपादन की भूमिका निभा चुके हैं. वह भारत सरकार के ICSSR-फंडेड मीडिया रिसर्च प्रोजेक्ट में रिसर्च एसोसिएट रह चुके हैं. उन्हें हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली विधान सभा चुनावों के पहले ओपिनियन पोल सर्वे का अनुभव है. बिहार में मुस्लिम महिलाओं में शिक्षा का निम्न स्तर, अकुशल मजदूरों के पलायन और इंसेफेलाइटिस पर रिपोर्टिंग के लिए उन्हें फेलोशिप मिल चुका है. जर्नलिज्म में एम.फिल और पी.एचडी की शिक्षा प्राप्त हुसैन ताबिश एक पत्रकार के अलावा मीडिया शोधार्थी, शिक्षक और प्रशिक्षक भी हैं, फिर भी वो खुद को हमेशा जर्नलिज्म का इंटर्न मानते हैं. राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध, मानवाधिकार, जेंडर सेंसिटिविटी, सोशल जस्टिस और माइनॉरिटी इश्यूज उनके प्रिय विषय हैं.(उनतक पहुँचने का पता mohammad.tabish@India.com

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