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Bangladesh Protest Update: बांग्लादेश में 1 जुलाई से शुरू हुआ कोटा आंदोलन हाई कोर्ट के जरिए स्वतंत्रता सेनानियों के कोटे को बहाल करने के बाद शुरू हुआ था. जिसमें कहा गया था कि उनके वंशजों के लिए सिविल सेवा के एक तिहाई पद आरक्षित किए जाएं. कोर्ट के इस फैसले के बाद काफी हिंसक झड़पे हुईं. मरने वालों की तादाद कम से कम 39 हो गई है, और हज़ारों लोग घायल बताए गए हैं.
लाठी-डंडों और पत्थरों से लैस हजारों छात्रों ने ढाका, चटगाँव, रंगपुर और कुमिला सहित बांग्लादेश के अलग-अलग शहरों में सशस्त्र पुलिस का सामना किया. प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि शेख हसीना सरकार 1971 में पाकिस्तान से आज़ादी की लड़ाई में लड़ने वाले लोगों के परिवारों के लिए 30 प्रतिशत सरकारी नौकरियां देना बंद करे.
विरोध प्रदर्शन पिछले महीने के अंत में शुरू हुआ था. हालांकि, सोमवार को यह तब और बढ़ गया जब ढाका यूनीवर्सिटी में छात्र कार्यकर्ताओं की पुलिस और सत्तारूढ़ अवामी लीग के जरिए समर्थित जवाबी प्रदर्शनकारियों से झड़प हो गई.
समाचार एजेंसी एएफपी के जरिए विश्लेषित अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और सप्ताह के शुरू में सात लोगों की मौत के अलावा गुरुवार को कम से कम 32 लोगों की मौत हुई है, जिससे मरने वालो की कुल तादाद 39 हो गई है.
उग्र विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रदर्शनकारी छात्रों ने बुधवार को ढाका को "पूरी तरह से बंद" करने का आह्वान किया, इसके साथ ही सरकार के वार्ता प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया.
ढाका के जात्राबारी में आरक्षण आंदोलन के दौरान गुरुवार को 35 साल के पत्रकार हसन मेहेदी की हत्या कर दी गई. ढाका मेडिकल कॉलेज अस्पताल पुलिस चौकी के प्रभारी इंस्पेक्टर मोहम्मद बच्चू मिया ने बताया कि हसन ढाका टाइम्स के स्टाफ रिपोर्टर थे.
बढ़ते हिंसक विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को अगली सूचना तक देश भर में माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर के शिक्षण संस्थानों को बंद करने का ऐलान किया है. ढाका स्थित द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश के विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने भी अगले आदेश तक सभी सार्वजनिक और निजी विश्वविद्यालयों, इससे संबद्ध मेडिकल कॉलेजों और अन्य संस्थानों को बंद करने का आदेश दिया है.
छात्रों के विरोध प्रदर्शन और उसके बाद हुई आगजनी और पथराव की वजह से ढाका और देश के अन्य बड़े शहरों में काफी व्यवधान पैदा हो गया है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. द डेली स्टार के अनुसार, कम से कम आठ जिलों में छात्र सड़कों पर उतर आए और सड़कें और रेल ट्रैक को रोक दिया.
बांग्लादेश में मोबाइल उपयोगकर्ताओं ने गुरुवार को बताया कि आरक्षण आंदोलन से संबंधित व्यापक हिंसा के कारण वे मोबाइल इंटरनेट का इस्तेाल करने और सोशल मीडिया तक पहुंचने में नाकाम हैं. कई जगहों पर 4जी नेटवर्क को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. केवल 2जी नेटवर्क चल रहा है.