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Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंदेश में कांग्रेस, पंजाब में किसान कर रहे प्रोटेस्ट, राष्ट्रपति ने कृषि बिलों पर दस्तखत कर बनाया कानून

देश में कांग्रेस, पंजाब में किसान कर रहे प्रोटेस्ट, राष्ट्रपति ने कृषि बिलों पर दस्तखत कर बनाया कानून

बता दें मॉनसून सेशन में लाए गए इन तीनों बिलों के खिलाफ अपोज़ीशन पार्टियां मुखालिफत कर रही हैं और पंजाब में किसानों ने रेल 24 सितंबर से रेल रोको आंदोलन चलाया हुआ है.

फाइल फोटो
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नई दिल्ली: एक तरफ जहां तमाम अपोज़ीशन पार्टियां मुल्क भर में और पंजाब में किसान कृषि बिल की मुखालिफत में प्रोटेस्ट कर रहे हैं वहीं दूसरी जानिब आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) तीनों बिलों पर दस्तखत कर दिए हैं. जिसके बाद यह तीनों बिल अब कानून बन गए हैं. 

बता दें मॉनसून सेशन में लाए गए इन तीनों बिलों के खिलाफ अपोज़ीशन पार्टियां मुखालिफत कर रही हैं और पंजाब में किसानों ने रेल 24 सितंबर से रेल रोको आंदोलन चलाया हुआ है. यहां तक कि एनडीए की हिमायती पार्टी और पंजाब असेंबली में अपोज़ीशन का किरदार अदा कर रही अकाली दल ने भी सनीचर देर रात अपनी हिमायत वापस ले ली थी. इससे पहले अकाली दल लीडर हरसिमरत कौर बादल ने भी मरकज़ की नरेंद्र मोदी हुकूमत से इस्तीफा दे दिया था.

यह भी पढ़िए: जानिए क्या है एमएसपी, जिसके लिए किसान और अपोज़ीशन पार्टियां कर रही हैं प्रोटेस्ट

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इन बिलों की मुखालिफत सबसे ज्यादा पंजाब और हरियाणा में हो रही है. दूसरी तरफ कांग्रेस और दूसरी अपोज़ीश पार्टियां भी इस बिल की मुखालिफत में पूरी मजबूती से खड़ी है. बिलों को लेकर कांग्रेस का मोदी हुकूमत पर सबसे बड़ा इल्ज़ाम यह है कि वह मंडी व्यवस्था खत्म कर किसानों को एमएसपी (Minimum Support Price) से महरूम करना चाहती है. 

किसानों के MSP खोने का डर
दरअसल, मरकज़ी और सूबाई हुकूमतें किसानों से MSP की तय कीमतों पर गेहूं और चावल सबसे ज्यादा खरीदती हैं. पंजाब-हरियाणा में गेहूं-चावल खूब होता है. ऐसे में कृषि बिलों के कानून बनने के बाद इन दो राज्यों के किसानों को उनके उत्पाद की खरीद MSP पर न होने का डर सता रहा है. उन्हें यह डर है कि अगर हुकूमत उनका अनाज नहीं खरीदेगी तो फिर वह किसे अपने अनाज बेचेंगे? अभी तो हूकूमत अनाज लेकर उसे निर्यात कर देती है या फिर और जगहों पर बांट देती है लेकिन बाद में किसान परेशान हो जाएंगे. 

पीएम मोदी ने कही यह बात
उन्हें यह भी डर है कि प्राइवेट कंपनियां या बिजनेसमेन एमएसपी की जगह मनमानी कीमतों पर उनकी फसल की खरीद कर सकती हैं. क्योंकि किसानों के पास स्टोरेज का मुनासिब इंतेज़ाम नहीं है तो उन्हें अपनी फसल मजबूर होकर कम दाम पर भी बेचना पड़ सकती है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार किसानों को यह भरोसा दिला रहे हैं कि एमएसपी खत्म नहीं होगी, न ही हुकूमतें किसानों के फसल खरीदना बंद करेंगी.

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